पारद शिवलिंग…………………….
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पारद (पारा) को रसराज कहा जाता है। पारद से बने शिवलिंग की पूजा करने से बिगड़े काम भी बन जाते हैं। धर्मशास्त्रों के अनुसार पारद शिवलिंग साक्षात भगवान शिव का ही रूप है इसलिए इसकी पूजा विधि-विधान से करने से कई गुना फल प्राप्त होता है तथा हर मनोकामना पूरी होती है। घर में पारद शिवलिंग सौभाग्य, शान्ति, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए अत्यधिक सौभाग्यशाली है। दुकान, ऑफिस व फैक्टरी में व्यापारी को बढाऩे के लिए पारद शिवलिंग का पूजन एक अचूक उपाय है। शिवलिंग के मात्र दर्शन ही सौभाग्यशाली होता है। इसके लिए किसी प्राणप्रतिष्ठा की आवश्कता नहीं हैं। पर इसके ज्यादा लाभ उठाने के लिए पूजन विधिक्त की जानी चाहिए।
# पूजन की विधि ……………………
सर्वप्रथम शिवलिंग को सफेद कपड़े पर आसन पर रखें।
स्वयं पूर्व-उत्तर दिशा की ओर मुँह करके बैठ जाए।
अपने आसपास जल, गंगाजल, रोली, मोली, चावल, दूध और हल्दी, चन्दन रख लें।
सबसे पहले पारद शिवलिंग के दाहिनी तरफ दीपक जला कर रखो।
थोडा सा जल हाथ में लेकर तीन बार निम्न मन्त्र का उच्चारण करके पी लें।
प्रथम बार ॐ मुत्युभजाय नम:
दूसरी बार ॐ नीलकण्ठाय: नम:
तीसरी बार ॐ रूद्राय नम:
चौथी बार ॐशिवाय नम:
हाथ में फूल और चावल लेकर शिवजी का ध्यान करें और मन में ''ॐ नम: शिवाय`` का 5 बार स्मरण करें और चावल और फूल को शिवलिंग पर चढ़ा दें।
इसके बाद ॐ नम: शिवाय का निरन्तर उच्चारण करते रहे।
फिर हाथ में चावल और पुष्प लेकर ''ॐ पार्वत्यै नम:`` मंत्र का उच्चारण कर माता पार्वती का ध्यान कर चावल पारा शिवलिंग पर चढ़ा दें।
इसके बाद ॐ नम: शिवाय का निरन्तर उच्चारण करें।
फिर मोली को और इसके बाद बनेऊ को पारद शिवलिंग पर चढ़ा दें।
इसके पश्चात हल्दी और चन्दन का तिलक लगा दे।
चावल अर्पण करे इसके बाद पुष्प चढ़ा दें।
मीठे का भोग लगा दे।
भांग, धतूरा और बेलपत्र शिवलिंग पर चढ़ा दें।
फिर अन्तिम में शिव की आरती करे और प्रसाद आदि ले लो।
जो व्यक्ति इस प्रकार से पारद शिवलिंग का पूजन करता है इसे शिव की कृपा से सुख समृद्धि आदि की प्राप्ति होती है।
# लाभ ……………………..
इसे घर में स्थापित करने से भी कई लाभ हैं, जो इस प्रकार हैं…………………
* पारद शिवलिंग सभी प्रकार के तन्त्र प्रयोगों को काट देता है.
* पारद शिवलिंग जहां स्थापित होता है उसके १०० फ़ीट के दायरे में उसका प्रभाव होता है. इस प्रभाव से परिवार में शांति और स्वास्थ्य प्राप्ति होती है.
* पारद शिवलिंग शुद्ध होना चाहिये, हस्त निर्मित होना चाहिये, स्वर्ण ग्रास से युक्त होना चाहिये, उसपर फ़णयुक्त नाग होना चाहिये. कम से कम सवा किलो का होना चाहिये.
* य़दि बहुत प्रचण्ड तान्त्रिक प्रयोग या अकाल मृत्यु या वाहन दुर्घटना योग हो तो ऐसा शुद्ध पारद शिवलिंग उसे अपने ऊपर ले लेता है. ऐसी स्थिति में यह अपने आप टूट जाता है, और साधक की रक्षा करता है.
* पारद शिवलिंग की स्थापना करके साधना करने पर स्वतः साधक की रक्षा होती रहती है.विशेष रूप से महाविद्या और काली साधकों को इसे अवश्य स्थापित करना चाहिये.
* पारद शिवलिंग को घर में रखने से सभी प्रकार के वास्तु दोष स्वत: ही दूर हो जाते हैं साथ ही घर का वातावरण भी शुद्ध होता है।
* पारद शिवलिंग साक्षात भगवान शिव का स्वरूप माना गया है। इसलिए इसे घर में स्थापित कर प्रतिदिन पूजन करने से किसी भी प्रकार के तंत्र का असर घर में नहीं होता और न ही साधक पर किसी तंत्र क्रिया का प्रभाव पड़ता है।
* यदि किसी को पितृ दोष हो तो उसे प्रतिदिन पारद शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए। इससे पितृ दोष समाप्त हो जाता है।
* अगर घर का कोई सदस्य बीमार हो जाए तो उसे पारद शिवलिंग पर अभिषेक किया हुआ पानी पिलाने से वह ठीक होने लगता है।
* पारद शिवलिंग की साधना से विवाह बाधा भी दूर होती है।
# शुद्ध पारद शिवलिंग की पहचान*******
पारद शिवलिंग पारा अर्थात Mercury का बना होता है. आज कल बाजार में पारद शिवलिंग बने बनाए मिलते है. ये सर्वथा अशुद्ध एवं किन्ही विशेष परिस्थितियों में हानि कारक भी होते है. जैसे सुहागा एवं ज़स्ता के संयोग से बना शिवलिंग भी पारद शिवलिंग जैसा ही लगता है. इसी प्रकार एल्युमिनियम से बना शिवलिंग भी पारद शिवलिंग जैसा ही लगता है. किन्तु उपरोक्त दोनों ही शिवलिंग घर में या पूजा के लिए नहीं रखने चाहिए. इससे रक्त रोग, श्वास रोग एवं मानसिक विकृति उत्पन्न होती है. अतः ऐसे शिवलिंग या इन धातुओ से बने कोई भी देव प्रतिमा घर या पूजा के स्थान में नहीं रखने चाहिए.
पारद शिव लिंग का निर्माण क्रमशः तीन मुख्या धातुओ के रासायनिक संयोग से होता है. “अथर्वन महाभाष्य में लिखा है क़ि-“द्रत्यान्शु परिपाकेनलाब्धो यत त्रीतियाँशतः. पारदम तत्द्वाविन्शत कज्जलमभिमज्जयेत. उत्प्लावितम जरायोगम क्वाथाना दृष्टोचक्षुषः तदेव पारदम शिवलिंगम पूजार्थं प्रति गृह्यताम. अर्थात अपनी सामर्थ्य के अनुसार कम से कम कज्जल का बीस गुना पारद एवं मनिफेन (Magnesium) के चालीस गुना पारद, लिंग निर्माण के लिए परम आवश्यक है. इस प्रकार कम से कम सत्तर प्रतिशत पारा, पंद्रह प्रतिशत मणि फेन या मेगनीसियम तथा दस प्रतिशत कज्जल या कार्बन तथा पांच प्रतिशत अंगमेवा या पोटैसियम कार्बोनेट होना चाहिए.ऐसे पारद शिवलिंग को आप केवल बिना पूजा के अपने घर में रख सकते है. यदि आप चाहें तो इसकी पूजा कर सकते है. किन्तु यदि अभिषेक करना हो तो उसके बाद इस शिवलिंग को पूजा के बाद घर से बाहर कम से कम चालीस हाथ की दूरी पर होना चाहिए. अन्यथा इसके विकिरण का दुष्प्रभाव समूचे घर परिवार को प्रभावित करेगा. किन्तु यदि रोज ही नियमित रूप से अभिषेक करना हो तो इसे घर में स्थायी रूप से रखा जा सकता है. ऐसे व्यक्ति बहुत बड़े तपोनिष्ठ उद्भात्त विद्वान होते है. यह साधारण जन के लिए संभव नहीं है. अतः यदि घर में रखना हो तो उसका अभिषेक न करे.
पारद शिवलिंग यदि कोई अति विश्वसनीय व्यक्ति बनाने वाला हो तो उससे आदेश या विनय करके बनवाया जा सकता है. वैसे भी इसका परीक्षण किया जा सकता है. यदि इस शिवलिंग को अमोनियम हाईड्राक्साइड से स्पर्श कराया जाय तो कोई दुर्गन्ध नहीं निकलेगा. किन्तु पोटैसियम क्लोरेट से स्पर्श कराया जाय तो बदबू निकलने लगेगी. यही नहीं पारद शिव लिंग को कभी भी सोने से स्पर्श न करायें नहीं तो यह सोने को खा जाता है.
यद्यपि पारद शिवलिंग एवं इसके साथ रखे जाने वाले दक्षिणा मूर्ती शंख की बहुत ही उच्च महत्ता बतायी गयी है. विविध धर्म ग्रंथो में इसकी भूरी भूरी प्रशंसा की गयी है. किन्तु यदि इसके निर्माण की विश्वसनीयता पर तनिक भी संदेह हो तो इसका परित्याग ही सर्वथा अच्छा है. अतः सामान्य रूप से बाज़ार में मिलाने वाले पारद शिवलिंग के नाम पर कोई शिवलिंग तब तक न खरीदें जब तक आप उसकी शुद्धता पर आश्वस्त न हो जाएँ.
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Saturday, July 30, 2016
पारद शिवलिंग Ways to worship PARAD SHIVA
Sunday, July 17, 2016
Worship Rahu
Rahu is the north node of the Moon and a powerful shadow planet. You can worship it by doing any of the mantras listed here.
Appeasement of Rahu brings mental peace, material prosperity and marriage.
1. Follow any one mantra that appeals to you.
2. Do atleast 108 times chanting on rudraksha mala or sphatik mala or rose quartz mala with 108 beads in it.
3. Try to follow same time every day.
4. Lighting a blue candle while chanting helps to focus and enhances the productivity of the prayer.
By Acharya Rrachita Gupta
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Jai rahve namah!
Saturday, July 09, 2016
पुदीना का तेल के चमत्कारी लाभ
पुदीना का तेल के चमत्कारी लाभ
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Acharya Rrachita Gupta
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पुदीने के तेल मेंमेंथोन मेंथॉल और मेंथाइल एस्टर् होते हैं, जिनकी वजह से इसके गुणों की फेहरिस्त काफी लम्बी है। इस तेल का प्रयोग कई उत्पादों, जैसे साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट,चाय, आइसक्रीम, च्युइंग गम आदि के निर्माण में भी किया जाता है। पर दूसरी तरफ इसके हमारे शरीर पर होने वाले उपकार भी कई हैं। काफी पुराने समय से पुदीना अपने औषधीय गुणों की वजह से जाना जाता है और तभी से इसका प्रयोग काफी बड़ी तादाद में किया जाता रहा है। इसे विश्व की सबसे पुरानी औषधि भी कहा जाता है।आज स्वास्थ्य और जीवन ग्रुप मे पुदीने तेल के लाभ पर विशेष जानकारी ।
पुदीने के तेल के शरीर पर उपचार
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हाज़मे की समस्या से मुक्ति
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यह तेल हाज़मे की समस्या के लिए काफी बेहतरीन औषधि है। अगर आपने भोजन थोड़ा ज़्यादा कर लिया है, तो एक गिलास में इस तेल की कुछ बूँदें डालें और इसे पी लें। यह गैस की समस्या को प्रभावी रूप से दूर करने में सक्षम है। इसके बिलकुल उलट गुण के अंतर्गत यह आपके भूख न लगने की समस्या का भी बेहतरीन इलाज है। यह दस्त, मतली, पेट में अन्य प्रकार की गड़बड़ी आदि समस्याओं को ठीक करने में सक्षम है। एक शोध के अनुसार ब्लेंडेड पेपरमिंट तथा कैरवै के तेल से सीने में जलन की समस्या से भी निजात मिलती है।
दांतों की देखभाल
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पुदीने के तेल में एंटी सेप्टिक(Antiseptic) गुण होते हैं और यह साँसों की बदबू को दूर करता है। यह आपके दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ बनाता है तथा कीटाणुओं से लड़ता है। पुदीने के तेल को कई टूथपेस्ट्स में भी मिश्रित किया जाता है। यह दांतों के दर्द को दूर करने तथा इन्हेलेशन की समस्या का भी प्रभावी उपचार है।
नाखूनों की देखभाल
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पुदीने के तेल में एंटी फंगल गुण भी होते हैं, जो आपके नाखूनों को फंगल इन्फेक्शन से बचाते हैं। ये नाखूनों को काफी स्वस्थ रखते हैं तथा इन्हें टूटने से भी बचाते हैं।
सिर का दर्द दूर करता हैं
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सिर में दर्द की समस्या को दूर करने के लिए पुदीने का तेल काफी प्रभावी उपचार होता है। इस तेल को लें तथा इसमें पानी मिलाकर इसे डाइल्यूट कर लें। इसे अपने सिर पर लगाएं तथा अच्छे से मालिश करें। यह न सिर्फ दर्द को दूर करता है, बल्कि सिर के उस भाग को सुकून भी प्रदान करता है।
तनाव।
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ज़्यादातर एसेंशियल ऑयल्स जिनमें से एक पुदीने का तेल भी है, आपको डिप्रेशन, चिंता और थकावट से मुक्ति दिलाते हैं। यह तेल आपमें ऊर्जा का संचार करता है और आपके मन में चल रही बेचैनी की भावना को भी दूर करता है। इस तेल से आपका मस्तिष्क काफी अच्छे से चलता है, क्योंकि यह आपके दिमाग में चल रही दुश्चिंताओं को हटाता है और आपको ध्यान लगाने में सहायता करता है।
सांस की समस्या
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मेंथॉल से आपकी साँसों की तकलीफ काफी प्रभावी रूप से दूर होती है। यह एक उपयोगी एक्सपेक्टोरेन्ट है, जिसकी वजह से यह आपको तुरंत राहत प्रदान करता है। जिन सामान्य समस्याओं से आप इसकी मदद से निपट सकते हैं, उनमें मुख्य है नाक का बंद होना, साइनसाइटिस, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, ठण्ड और कफ। अतः अब से जब भी आपको ठण्ड लगे, तो थोड़ा सा पुदीने का तेल अपनी छाती पर लगा लें। इससे आपकी स्थिति सुधरेगी और आपके शरीर को काफी सुकून मिलेगा।
दर्द से छुटकारा
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इस तेल के प्रयोग से आप दर्द से भी छुटकारा प्राप्त कर सकते हैं। शोध से यह साबित हुआ है कि पुदीने का तेल दर्द से प्रभावित भागों को ठीक करने में सक्षम है। इसमें शरीर को ठंडक प्रदान करने के भी गुण होते हैं, जिससे बुखार कम करने में काफी मदद मिलती है। कई लोग इसका रेफ्रिजरेन्ट के रूप में भी प्रयोग करते हैं। यह चोट और घाव की स्थिति में प्रभावित भाग को राहत पहुंचाता है। आप इस तेल का प्रयोग सूजन, दर्द तथा जलन दूर करने के लिए भी कर सकते हैं।
प्रतिरोधी तंत्र
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आप अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा खुद को कई बीमारियों से प्रभावित होने से बचाने के लिए पुदीने के तेल का प्रयोग कर सकते हैं। जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होती है, वे कई तरह की बीमारियों से पीड़ित रहते हैं। इसमें एंटी वायरल, एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण हमारी प्रतिरोधक क्षमता पर हमला करने वाली कई बीमारियों का पुख्ता तरीके से इलाज करते हैं।
रक्त का संचार
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आप पुदीने के तेल की मदद से रक्त संचार भी बढ़ा सकते हैं। कई शोधों से साबित हुआ है कि एसेंशियल वेपर हमारी ओल्फैक्टरी नसों को छूते हैं और इससे हमारे पल्स रेटमें तेज़ी आती है। इसकी मदद से मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों को भी कई समस्याओं से बचाया जा सकता
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Monday, July 04, 2016
AMAVASYA OR NEW MOON RITUALS FOR PROSPERITY AND HAPPINESS
🍛सामग्री : १. काले तिल, २. जौं, ३. चावल, ४. गाय का घी, ५. चंदन पाउडर, ६. गुगल, ७. गुड़, ८. देशी कपूर, गौ चंदन या कण्डा।
🔥 विधि: गौ चंदन या कण्डे को किसी बर्तन में डालकर हवनकुंड बना लें, फिर उपरोक्त ८ वस्तुओं के मिश्रण से तैयार सामग्री से, घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर नीचे दिये गये देवताओं की १-१ आहुति दें।
🔥 आहुति मंत्र 🔥
🌷 १. ॐ कुल देवताभ्यो नमः
🌷 २. ॐ ग्राम देवताभ्यो नमः
🌷 ३. ॐ ग्रह देवताभ्यो नमः
🌷 ४. ॐ लक्ष्मीपति देवताभ्यो नमः
🌷 ५. ॐ विघ्नविनाशक देवताभयो नमः
💰 जिनको पैसो की कमजोरी है तो तुलसी माता को १०८ प्रदिक्षणा करें | और श्री हरि.... श्री हरि.... श्री हरि.... श्री हरि.... ‘श्री’ माना सम्पदा, ‘हरि’ माना भगवान की दया पाना | तो गरीबी चली जाए।
🌷 *सोमवती अमावस्या* 🌷
🌷 *सोमवती अमावस्याः दरिद्रता निवारण*
🙏🏻 सोमवती अमावस्या के पर्व में स्नान-दान का बड़ा महत्त्व है।
🙏🏻 इस दिन भी मौन रहकर स्नान करने से हजार गौदान का फल होता है।
🙏🏻 इस दिन पीपल और भगवान विष्णु का पूजन तथा उनकी 108 प्रदक्षिणा करने का विधान है। 108 में से 8 प्रदक्षिणा पीपल के वृक्ष को कच्चा सूत लपेटते हुए की जाती है। प्रदक्षिणा करते समय 108 फल पृथक रखे जाते हैं। बाद में वे भगवान का भजन करने वाले ब्राह्मणों या ब्राह्मणियों में वितरित कर दिये जाते हैं। ऐसा करने से संतान चिरंजीवी होती है।
🙏🏻 इस दिन तुलसी की 108 परिक्रमा करने से दरिद्रता मिटती है।
💥 *विशेष* कल 04 जुलाई 2016 सोमवार को (सूर्योदय से शाम 04:32 तक) सोमवती अमावस्या है।
🙏🏻💐🙏🏻
Thursday, June 02, 2016
Crystal cleansing methods by www.AstroRrachita.in
Let us explore few crystal cleansing methods here:
Note: I would suggest using Reiki symbols and Reiki flow for every cleansing method. Reiki all the cleansing material used: salt, water, container, candle etc.
Salt Water: Add salt to water and soak crystals for few hours in salt water. Not all crystals resonate with salt and water, so check before soaking crystals.
Dry Salt: Place your crystals in a bowl of dry sea salt/rock salt/Himalayan salt. Make sure there are no left over salt particles once you are done cleansing.
Running water: Hold your crystal under a tap, stream or any form of fresh running water. Imagine all the accumulated negative energy flowing away with running water.
Earth: Place your crystals back to its original cradle. Bury your crystals in your garden, planter or backyard. Alternatively, gather some soil in a container and bury your crystal. After removing, wipe it clean and make sure no soil particles are left.
Breathe: Hold your crystal in your palm and blow forcefully on your crystal. Imagine you are blowing a white light over crystals. Keep blowing till you feel your crystal is shiny or simply blow thrice with the intention to cleanse.
Flame: Just rotate your crystal 7 times over a candle flame to cleanse it. You can even pass your crystal quickly through flame.
Moon/Sun: This is one of the simplest and safest methods. Simply leave your crystals out in sunlight or moon light. Not all crystals resonate with sunlight so please check crystal’s properties before placing in sunlight.
Smudging: Use sage or incense stick to cleanse the crystal. Simply pass your crystal through sage/incense stick smoke.
Reiki only: Hold crystal in palm and draw CKR. Give Reiki with the intention to remove negative energy from the crystal.
Bell or Singing Bowl: The vibration of the bell or the singing bowl has the power to cleanse your crystals. Just play the sound of bell/singing bowl near the crystals.
Selenite: Selenite is considered as ‘Universal Stone Cleaner’. It does not need cleansing. Simply place your crystal over a selenite cluster or place selenite over your crystal. Alternatively, put all crystals in a box and program your selenite to cleanse all crystals in the box.
Beach: Going to a beach? Take your crystal along and cleanse with sea water.
Pendulum: Program your pendulum to cleanse the crystal and hold it over your crystal.
Third Eye: Direct white light on your crystals with your third eye with the set intention.Crystal Clusters/Geode: Some crystals ( citrine, carnelian, selenite) doesn’t need frequent cleansing. They can be used to cleanse other crystals too. Simply place your crystals on the geode or cluster.
Plants: Lay your crystal besides your favorite flower or plant. Plants have the natural ability to transmute negative energy to positive energy.
Pyramid dome: The shape of a pyramid itself is very powerful. Place your crystals under the pyramid dome. Pyramid dome neutralizes the accumulated negative energy of crystals when placed inside the dome.
Flower essence: Soak flower petals of any flower in water for few hours. Fill this water in a spray bottle and spray on crystals.
Important Uses and Effects of Palm Chakras
Important Uses and Effects of Palm Chakras
Apart from 7 major chakras, the other two important chakras are the foot chakra and the palm chakra. The palm chakras are extremely important for those who are into spiritual healing as these chakras are powerful tool for giving and receiving healing.
There are 7 chakras located in palms- one in the middle of the palm, one in the wrist point and other 5 in each finger and thumb. The left hand palm chakra rotates in clockwise direction whereas right palm chakra rotates in anti-clockwise direction. It is said that left hand palm chakras helps receive energy whereas right hand palm chakras helps sending energy. Actually your dominant hand sends out energy and non-dominant hand receives.
Stimulation of Other Chakras Through The Palm Chakra
When we meet someone, we bring our right hand forward. We are subconsciously directing our energy to them; that’s our heart chakra’s response. When there is an argument or confusion, our natural instinct takes our left hand to throat chakra; indicating poor communication and blocked throat chakra. If we are excited, our natural extinct takes our hand to heart chakra.When we are depressed or outraged, our instinct takes our hand to forehead.
Palm Chakras
Functions of Palm Chakras:
1.Healing self and others
2.Aura Scanning
3.Sending and receiving energy
4.Helps balance spiritual, mental and emotional bodies
5.Enhance creativity
6.Feel crystals energy
7.Opened spirituality
Balanced Palm Chakras help in:
Helps send and receive energy
Accurate aura scan
Manifest openness
Allows you to give and receive unconditionally without expectation and guilt
Ability to charge/attune objects
Feel crystals energy
Unbalanced Palm Chakras mean:
Illness
Inability to receive
Denying to accept healing
Refusal to heal
Hesitate asking for help
Miser
Method for Unblocking The Chakra:
Draw Reiki symbols on palms and cup palms together asking Reiki to open palm chakras.
Draw symbols. Imagine a red flower blooming in the middle of the palms. As this flower blooms, your palm chakra opens.
Ask your dowser to open and cleanse your palm chakra by holding it over chakras.
When you wash your hands, take few grains of rock-salt and then wash.
Practice making energy balls to activate palm chakras.
Personality Analysis through your Signature : आपके हस्ताक्षर आपका व्यक्तित्व

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13. जो लोग हस्ताक्षर करते समय अपना मिडिल नेम पहले लिखते हैं, वे अपनी पसंद-नापंसद को अधिक महत्व देते हैं। इसके बाद कार्यों को पूरा करने में लग जाते हैं।
14. जो लोग हस्ताक्षर का पहला अक्षर बड़ा लिखते हैं, वे अद्भुत प्रतिभा के धनी होते हैं। ऐसे लोग किसी भी कार्य को अपने अलग ही अंदाज से पूरा करते हैं। अपने कार्य में पारंगत होते हैं। पहला अक्षर बड़ा बनाने के बाद अन्य अक्षर छोटे-छोटे और सुंदर दिखाई देते हों तो व्यक्ति धीरे-धीरे किसी खास मुकाम पर पहुंच जाता है। ऐसे लोगों को जीवन में सभी सुख-सुविधाएं प्राप्त हो जाती हैं ।
Tuesday, May 31, 2016
The tree dries up and dies!
In the movie _Taare Zameen Par_
The art teacher tells the rude and cursing father of the dyslexic kid about *Solomon Islands..*
In those islands, the tribal don’t cut down a tree. *They surround the tree and curse it for hours every day..*
Within a few weeks, the tree
dries up and becomes dead..
Many of us might find that example too difficult to believe. How can intangible and invisible thoughts and words kill a tree.!
Well, if you get to read Bruce H. Lipton’s THE BIOLOGY OF BELIEF, you won’t only believe in the Solomon Islands story, but would also think a dozen times before saying something demoralizing to yourself and the people you love..
In this book, Mr. Lipton tells in detail about the power of conscious and subconscious mind..
The subconscious mind is millions of times more powerful than the conscious mind, and decides most of the things in our lives according to the beliefs it has..
Many times we fail to change an unpleasant habit despite our will-power and consistent efforts..
It’s because the habit has been so strongly programmed in our subconscious mind that the efforts made by our conscious mind hardly make any difference.
*Conscious Mind is just a shadow*
*of our Unconscious Mind..*
So, when the tribals of Solomon Islands curse a tree, they are actually installing negative and harmful beliefs in the tree’s emotion (yes, trees do have emotions too).
Within few days, those negative emotions becomes a belief & eventually changes the molecular architecture of the tree and kill it from inside..
2500 years ago, when the Buddha said that *‘you are what you think',* he was not articulating a random philosophical theory.
Actually he was telling a scientific fact which is now proved correct by Quantum Physics and Molecular Biology.
While reading the book, u will recall how *Buddha had talked about subconscious mind and its unfathomable power over our lives..*
*He called it Alay Vigyan which means store consciousness..*
*This is the part of mind where all our beliefs and experiences are stored; and they dictate our life from there..*
The book has a special chapter on Conscious Parenting where it talks about the beneficial and harmful effects of what parents say to their children..
If you are a parent and you keep cursing your child in the name of constructive criticism, you are installing beliefs in their mind which will keep harming them forever..
But if you keep appreciating them in a sincere way, you are installing beliefs in their mind which will help then for their entire life..
And also be careful of what
you keep saying to yourself.
Repetition of words and thoughts is the best way to install a belief in your subconscious mind..
If you keep saying you are a loser,
don’t be surprised if you become one within a few months or years..
And if you have friends who keep saying such things to you, there is no harm in saying a quick goodbye to them..
Have a great day !!!!
Tuesday, March 29, 2016
तीसरी आँख को विकसित करने लिए कुछ महत्वपूर्ण ध्यान :-
तीसरी आँख को विकसित करने लिए कुछ महत्वपूर्ण ध्यान :-
☀साक्षी को खोजना ☀
शिव ने कहा: होश को दोनों भौहों के मध्य में लाओ और मन को विचार के समक्ष आने दो। देह को पैर से सिर तक प्राण तत्व से भर जाने दो, ओर वहां वह प्रकाश की भांति बरस जाए।
वह विधि पाइथागोरस को दी गई थी। पाइथागोरस वह विधि लेकर ग्रीस गया। और वास्तव में यह पश्चिम में सारे रहस्यवाद का उद्गम बन गया। स्त्रोत बन गया। वह पश्चिम में पूरे रहस्यवाद का जनक है।
यह विधि बहुत गहन पद्धतियों में से है। इसे समझने का प्रयास करो: ‘’होश को दोनों भौहों के मध्य में लाओ।‘’
आधुनिक मनोविज्ञान और वैज्ञानिक शोध कहती है कि दोनों भौंहों के मध्य में एक ग्रंथि है जो शरीर का सबसे रहस्यमय अंग है। यह ग्रंथि, जिसे पाइनियल ग्रंथि कहते है। यही तिब्बतियों का तृतीय नेत्र है—शिवनेत्र : शिव का, तंत्र का नेत्र। दोनों आंखों के बीच एक तीसरी आँख का अस्तित्व है, लेकिन साधारणत: वह निष्कृय रहती है। उसे खोलने के लिए तुम्हें कुछ करना पड़ता है। वह आँख अंधी नहीं है। वह बस बंद है। यह विधि तीसरी आँख को खोलने के लिए ही है।
‘’होश को दोनों भौंहों के मध्य में लाऔ।‘’......अपनी आंखें बंद कर लो, और अपनी आंखों को दोनों भौंहों के ठीक बीच में केंद्रित करो। आंखे बंद करके ठीक मध्य में होश को केंद्रित करो, जैसे कि तुम अपनी दोनों आँखो से देख रहे हो। उस पर पूरा ध्यान दो।
वह विधि सचेत होने के सरलतम उपायों में से है। तुम शरीर के किसी अन्य अंग के प्रति इतनी सरलता से सचेत नहीं हो सकते। यह ग्रंथि होश को पूरी तरह आत्मसात कर लेती है। यदि तुम उस पर होश को भ्रूमध्य पर केंद्रित करो तो तुम्हारी दोनों आंखें तृतीय नेत्र से सम्मोहित हो जाती है। वे जड़ हो जाती है, हिल भी नहीं सकती। यदि तुम शरीर के किसी अन्य अंग के प्रति सचेत होने का प्रयास कर रहे हो तो यह कठिन है। यह तीसरी आँख होश को पकड़ लेती है। होश को खींचती है। वह होश के लिए चुम्बकीय है। तो संसार भर की सभी पद्धतियों ने इसका उपयोग किया है। होश को साधने का यह सरलतम उपाय है। क्योंकि तुम ही होश को केंद्रित करने का प्रयास नहीं कर रहे हो; स्वयं वह ग्रंथि भी तुम्हारी मदद करती है; वह चुम्बकीय है। तुम्हारा होश बलपूर्वक उनकी और खींच लिया जाता है। वह आत्मसात हो जाता है।
तंत्र के प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है कि होश तीसरी आँख का भोजन है। वह आँख भूखी है; जन्मों-जन्मों से भूखी है। यदि तुम उस पर होश को लाओगे तो वह जीवंत हो जाती है। उसे भोजन मिल जाता है। एक बार बस तुम इस कला को जान जाओं। तुम्हारा होश स्वयं ग्रंथि द्वारा ही चुम्बकीय ढंग से खिंचता है। आकर्षित होता है। तो फिर होश को साधना कोई कठिन बात नहीं है। व्यक्ति को बस ठीक बिंदु जान लेना होता है। तो बस अपनी आंखें बंद करों, दोनों आँखो को भ्रूमध्य की और चले जाने दो, और उस बिंदु को अनुभव करो। जब तुम उस बिंदु के समीप आओगे तो अचानक तुम्हारी आँख जड़ हो जाएंगी। जब उन्हें हिलाना कठिन हो जाए तो जानना कि तुमने ठीक बिंदु को पकड़ लिया है।
‘’होश को दोनों भौंहों के मध्य में लाओ और मन को विचार के समक्ष आने दो।‘’......यदि यह होश लग जाए तो पहली बार तुम्हें एक अद्भुत अनुभव होगा। पहली बार तुम विचारों को अपने सामने दौड़ता हुआ अनुभव करोगे। तुम साक्षी हो जाओगे। यह बिलकुल फिल्म के परदे जैसा होता है। विचार दौड़ रहे है और तुम एक साक्षी हो।
सामान्यतया तुम साक्षी नहीं होते: तुम विचारों के साथ एकात्म हो। यदि क्रोध आता है तो तुम क्रोध ही हो जाते हो। कोई विचार उठता है तो तुम उसके साक्षी नहीं हो सकते। तुम विचार के साथ एक हो जाते हो। एकात्म हो जाते हो, और इसके साथ ही चलने लगते हो। तुम एक विचार ही बन जाते हो। जब काम उठता है तो तुम काम ही बन जाते हो। जब क्रोध उठता है तो तुम क्रोध ही बन जाते हो। जब लोभ बनता है तो तुम लोभ ही बन जाते हो। कोई चलता हुआ विचार और उनसे तुम्हारा तादात्म्य हो जाता है। विचार और तुम्हारे बीच में कोई अंतराल नहीं होता।
लेकिन तृतीय नेत्र पर केंद्रित होकर तुम अचानक एक साक्षी हो जाते हो। तृतीय नेत्र के द्वारा तुम विचारों को ऐसे ही देख सकते हो जैसे की आकाश में बादल दौड़ रहे हों, अथवा सड़क पर लोग चल रहे है।
साक्षी होने का प्रयास करो। जो भी हो रहा हो, साक्षी होने का प्रयास करो। तुम बीमार हो, तुम्हारा शरीर दुःख रहा है और पीड़ित है, तुम दुःखी और पीड़ित हो , जो भी हो रहा है, स्वयं का उससे तादात्म्य मत करो। साक्षी बने रहो। द्रष्टा बने रहो। फिर यदि साक्षित्व संभव हो जाए तो तुम तृतीय नेत्र मे केंद्रित हो जाओगे।
दूसरा, इससे उल्टा भी हो सकता है। यदि तुम तृतीय नेत्र में केंद्रित हो तो तुम साक्षी बन जाओगे। ये दोनों चीजें एक ही प्रक्रिया के हिस्से है। तो पहली बात: तृतीय नेत्र में केंद्रित होने से साक्षी का प्रादुर्भाव होगा। अब तुम अपने विचारों (से साक्षात्कार कर सकते हो। यह पहली बात होगी। और दूसरी बात यह होगी कि अब तुम श्वास के सूक्ष्म और कोमल स्पंदन को अनुभव कर सकोगे। अब तुम श्वास के प्रारूप को श्वास के सार तत्व को अनुभव कर सकेत हो।
पहले यह समझने का प्रयास करो कि ‘’प्रारूप’’ का, श्वास के सार तत्व का क्या अर्थ है। श्वास लेते समय तुम केवल हवा मात्र भीतर नहीं ले रहे हो। विज्ञान कहता है कि तुम केवल वायु भीतर लेते हो—बस ऑक्सीजन, हाइड्रोजन व अन्या गैसों का मिश्रण। वे कहते है कि तुम ‘’वायु’’ भीतर ले रहे हो। लेकिन तंत्र कहता है कि वायु बस एक वाहन है, वास्तविक चीज नहीं है। तुम प्राण को, जीवन शक्ति को भीतर ले रहे हो। वायु केवल माध्यम है; प्राण उसकी अंतर्वस्तु है। तुम केवल वायु नहीं, प्राण भीतर ले रहे हो।
तृतीय नेत्र में केंद्रित होने से अचानक तुम श्वास के सार तत्व को देख सकते हो—श्वास को नहीं बल्कि श्वास के सार तत्व को, प्राण को। और यदि तुम श्वास के सार तत्व को, प्राण को देख सको तो तुम उसे बिंदु पर पहुंच गए जहां से छलांग लगती है, अंतस क्रांति घटित होती है।
ध्यानयोग : प्रथम और अंतिम मुक्ति, ओशो
