Thursday, July 18, 2019

क्या कहते हैं हमारे शरीर के तिल?

क्या कहते हैं हमारे शरीर के तिल?
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शरीर पर पाए जाने वाले तिलों के ज्योतिषीय फल जानने की हर व्यक्ति में जिज्ञासा रहती है। आज हम तिलों के महत्व व फल पर चर्चा करेंगे।

महिलाओं के शरीर पर तिल
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- महिला के बाईं तरफ मस्तक पर तिल हो तो वह किसी राजा की रानी बनती है। वर्तमान में तो कोई राजा रानी नहीं हैं उसे हम अमीरी से जोडक़र देख सकते हैं। यूं कहा जा सकता है कि जिस महिला के बाईं तरफ मस्तक पर तिल होता है वह धन-दौलत उसके चारों तरफ बिखरी रहती है। उसे हर वो सुख मिलता है जिसकी उसे आशा नहीं होती है। उसका पति उसे अपनी हथेलियों पर रखता है।

- गाल पर बांई तरफ तिल हो तो ऐशो-आराम का सुख मिलता है। उसे धैर्यवान और स्वयं को प्यार करने वाला जीवनसाथी मिलता है। 

- कहा जाता है कि जिस महिला के छाती पर तिल होता है उसे पुत्र की प्राप्ति होती है। हालांकि विज्ञान इसे नहीं मानता है। स्त्री के दोनों स्तनों पर तिल उसे कामुक बनाता है। उसे प्रेमी या पति से विशेष प्यार मिलता है। बाईं जांघ पर तिल हो तो नौकर-चाकर का सुख मिलता है। दायीं जांघ पर तिल उसे पति की प्राणप्रिया बनाता है। पांव पर तिल हो तो विदेश यात्रा का योग रहता है। कान पर तिल हो तो आभूषण पहनने का सुख मिलता है। मस्तक पर तिल हो तो हर जगह इज्जत मिलती है।

- महिलाओं के शरीर के तीन ऐसे अंग हैं जिन पर तिल होना उनके लिए हानिकारक माना जाता है। जिस महिला के नाक पर तिल होता वह सौंदर्य की अनुपम मूर्ति नजर आती है लेकिन उसमें चूर-चूर कर घमंड और अहम् भरा होता है। जिसके चलते हर शख्स के साथ उनकी अनबन रहती है। इनके उन्हीं लोगों के साथ विचार मिलते हैं जो उनकी जी-हुजूरी करते हैं।

- जिन महिलाओं के कमर और हिप्स के जोड़ पर तिल होता है, वह महिलाएँ ताउम्र अवसाद का शिकार रहती हैं। उनके दिमाग में हर घड़ी अपना अतीत घूमता रहता है, जिसके चलते वे न तो पीहर में और न ही ससुराल में सुख भोग पाती हैं।

- जिन महिलाओं के गुप्तांगों के ऊपर तिल होता है वह हमेशा शारीरिक सुख को लालायित रहती हैं। ऐसी महिलाएं एक से अधिक पुरुषों से यौन संबंध बनाती हैं। जिन महिलाओं के इस स्थान पर तिल पाया जाता है वह कभी भी एक पुरुष से सन्तुष्ट नहीं हो पाती हैं।

पुरुष के शरीर पर तिल... 
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- जिस पुरुष के आंख पर तिल होता है तो वह नायक अर्थात् वह नेतृत्वकर्ता होता है। 

- गाल पर तिल हो तो उसे स्त्री का सुख मिलता है। सिर (मस्तक) पर तिल होता है, वह हर जगह इज्जत पाता है। 

- मुख पर तिल होता है तो उसे बहुत दौलत मिलती है। 

- नीचे के होंठ पर तिल हो तो वह व्यक्ति कंजूस होता है। 

- ऊपर के होंठ पर तिल हो तो धन पाता है तथा चारों तरफ इज्जत मिलती है। 

- कान पर तिल हो तो वह खूब पैसे वाला होता है। 

- गर्दन पर तिल हो तो उस व्यक्ति की लंबी उम्र होती है तथा उसे आराम मिलता है।

- दाहिने कंधे पर तिल हो तो वह व्यक्ति कलाकार होता है। क्षेत्र कोई-सा भी हो सकता। 

- छाती के दाहिनी तरफ तिल हो तो अच्छी स्त्री मिलती है। 

- हाथ के पंजे पर तिल हो तो वह व्यक्ति दिलदार व दयालु रहता है। 

- पांव पर तिल हो तो उस व्यक्ति के विदेश यात्रा का योग बनता है।

- जिस पुरुष के गुप्तांग पर तिल हो वह एक से अधिक स्त्रियों से यौन संबंध बनाता है। ऐसे पुरुष अय्याश प्रवृत्ति के भी होते हैं।

राजेन्द्र गुप्ता

Tuesday, July 09, 2019

Who is a Soul Mate? By Rrachita Gupta Ravera

GENERALLY when a regular person who does not deal too much with spiritual terms hears the word SOUL MATE he gets a very definite flash of a romantic partner.

As part of our common language we refer to our love parteners as soul mates. But actually this is not true.
Much against popular belief, a soul mate is not necessarily your life partener or your love companion. Infact a soul mate cannot be restricted to just a romantic connotation. 

We must understand that soul mate is literally someone who is a partener of your soul purpose for either:
1. A specific karma to be performed
2. A specific time period has to be spent together as decided by fate so that common life experiences can be shared together as per a karmic contract drawn up even before our birth with that person.
Sure , soulmate means someone who your  soul will feel a strange connection, maybe even a yearning to connect with. Out of thousands the radar of your soul will turn towards that person and you will want to be with them.

But that can happen between a father and daughter or an aunt and her niece or even two unlikely persons who later become the best of buddies. You can have a lovely platonic warm hearted and emotionally fulfilling relationship with your soul mate.

Understand that any relation or bond you feel very strongly about in this lifetime is  your soul mate.  They can be your parents, or your children ,or your spouse , or your office colleague,  or even your neighbour.

Infact soul mates can even be animals or birds you feel a strong connection with. They are also souls albeit in a different physical form. But remember its the soul energies contacting and connecting with each other and not the bodily form only.

When we are born into this physical reality, we have an entire procedure of karmic balance sheeting done in the Hall of Judgement.  This tradition has been documented in abcient civilizations such as the Egyptian (hall of death and Osiris), the Jewish (book of Zorah and how many Sephiroth have been traversed in the tree of Life) and even our very own Indian as in Yamraaj sitting with his karma judiciary.

In this divine court the souls who have been travelling over many births now have to settle their karmic debts.  They have to choose their new births and their new parents and their new habitats in a way that the pending karmic debts of previous births are settled to a maximum in this lifetime at least so that as the soul proceeds further in its evolution cycle the baggage of preceding debts becomes lesser and lesser.

The intrinsic responsibility of each soul in its Divine path is to keep shedding this preceding baggage as it moves to merge with the Whilte Light.

It does this by settling the SOUL CONTRACTS of debts and credits it has built up over lifetimes with its soul mates. The same souls keep criss crossing each other during different lifetimes.
It is true that certain karmic connections may draw people towards each other. This does not mean, however, that these will be ideal relationships. The success of these relationships will depend on the maturity and sensitivity with which we approach them.
They may succeed but more often they will be fraught with internal bitterness.

Thus if you meet a person in this lifetime you feel attracted to then pay heed to it. Form a bond or relationship with that person. Your soul may either be repaying his debts then you will feel losses or suffering in the bond. Accept it with peace. Accept it with a feeling of surrender and acceptance.  Once your repayment is done then you can go your seperate ways. Finally released of any obligations to each other. Aaah! The liberation of the soul to seek new partners and settle more scores so that the soul may be light again; it may be pure again. It may be again as the Divine wants it to be for your highest happiness

Accept your soul mates with open arms. They may come as friends to  give you their due or they may come as your enemy to take back from you what you owe them.  You can have hundreds of soul mates in one lifetime so stop looking for just romantic ones.

Ofcourse the romantic soul mate is one of the  most fulfilling BONDS we can have in a birth cycle. Its that person who gives us a sense of completion. There is more harmony than conflict and the souls seem to talk in silent secret language all of its own. There is a deep thirst to unite intellectually, emotionally and physically with this person. Compassion and understanding towards the other flows naturally.  This kind of spiritual UNION is not in every one's cosmic life plan and maturity suggests that one not remain fixated on finding just the romantic soul mate but rather the variety of other soulmates that are also searching for you and trying to gravitate towards you in non romantic roles.
Form all sorts of bonds so that maximum give and take can be done. The more you settle, the faster you can progress in your spiritual life as you rise from the chords holding you chained to earthly obligations.

Meditate.  Mingle. Understand who to give to and who to take from. Surrender to this ultimate divine bahi-khata or karmic ledger. Its all part of your human experience as the travelling soul that you inherently are.

Angel blessings
Rrachita Gupta Ravera

Wednesday, June 26, 2019

सिद्ध लाल किताब टोटके : finance property depression

सिद्ध लाल किताब टोटके :

आज संसार में हर आदमी दुखी है . चाहे अमीर हो या गरीब, बडा हो या छोटा . हर इंसान को कोई न कोई परेशानी लगी रहती है . ज्योतिष में इसके लिए कई उपाय सुझाए गए हैं . जिनको विधि पूर्वक करके हम लाभ उठा सकते हैं .

लाल किताब उत्तर भारत में खास कर पंजाब में बहुत प्रसिद्ध है . अब इसका प्रचार धीरे-धीरे पूरे भारत में हो रहा है . इसकी लोकप्रियता का मुख्य कारण इसके आसान, सस्ते और सटीक उपाय हैं . इसमें कई उपाय ग्रहों की बजाय लक्षणों से बताये जाते हैं . आपके लाभ के लिए कुछ सिद्ध उपाय निम्न प्रकार से हैं –

1. यदि आपको धन की परेशानी है, नौकरी मे दिक्कत आ रही है, प्रमोशन नहीं हो रहा है या आप अच्छे करियर की तलाश में है तो यह उपाय कीजिए :
किसी दुकान में जाकर किसी भी शुक्रवार को कोई भी एक स्टील का ताला खरीद लीजिए . लेकिन ताला खरीदते वक्त न तो उस ताले को आप खुद खोलें और न ही दुकानदार को खोलने दें ताले को जांचने के लिए भी न खोलें . उसी तरह से डिब्बी में बन्द का बन्द ताला दुकान से खरीद लें . इस ताले को आप शुक्रवार की रात अपने सोने के कमरे में रख दें . शनिवार सुबह उठकर नहा-धो कर ताले को बिना खोले किसी मन्दिर, गुरुद्वारे या किसी भी धार्मिक स्थान पर रख दें . जब भी कोई उस ताले को खोलेगा आपकी किस्मत का ताला खुल जायगा .

2. यदि आप अपना मकान, दुकान या कोई अन्य प्रापर्टी बेचना चाहते हैं और वो बिक न रही हो तो यह उपाय करें :

बाजार से 86 (छियासी) साबुत बादाम (छिलके सहित) ले आईए . सुबह नहा-धो कर, बिना कुछ खाये, दो बादाम लेकर मन्दिर जाईए . दोनो बादाम मन्दिर में शिव-लिंग या शिव जी के आगे रख दीजिए . हाथ जोड कर भगवान से प्रापर्टी को बेचने की प्रार्थना कीजिए और उन दो बादामों में से एक बादाम वापिस ले आईए . उस बादाम को लाकर घर में कहीं अलग रख दीजिए . ऐसा आपको 43 दिन तक लगातार करना है . रोज़ दो बादाम लेजाकर एक वापिस लाना है . 43 दिन के बाद जो बादाम आपने घर में इकट्ठा किए हैं उन्हें जल-प्रवाह (बहते जल, नदी आदि में) कर दें . आपका मनोरथ अवश्य पूरा होगा . यदि 43 दिन से पहले ही आपका सौदा हो जाय तो भी उपाय को अधूरा नही छोडना चाहिए . पूरा उपाय करके 43 बादाम जल-प्रवाह करने चाहिए . अन्यथा कार्य में रूकावट आ सकती है .

3. यदि आप ब्लड प्रेशर या डिप्रेशन से परेशान हैं तो :
इतवार की रात को सोते समय अपने सिरहाने की तरफ 325 ग्राम दूध रख कर सोंए . सोमवार को सुबह उठ कर सबसे पहले इस दूध को किसी कीकर या पीपल के पेड को अर्पित कर दें . यह उपाय 5 इतवार तक लगातार करें . लाभ होगा .

4. माईग्रेन या आधा सीसी का दर्द का उपाय :
सुबह सूरज उगने के समय एक गुड का डला लेकर किसी चौराहे पर जाकर दक्षिण की ओर मुंह करके खडे हो जांय . गुड को अपने दांतों से दो हिस्सों में काट दीजिए . गुड के दोनो हिस्सों को वहीं चौराहे पर फेंक दें और वापिस आ जांय . यह उपाय किसी भी मंगलवार से शुरू करें तथा 5 मंगलवार लगातार करें . लेकिन….लेकिन ध्यान रहे यह उपाय करते समय आप किसी से भी बात न करें और न ही कोई आपको पुकारे न ही आप से कोई बात करे . अवश्य लाभ होगा .

5. फंसा हुआ धन वापिस लेने के लिए :
यदि आपकी रकम कहीं फंस गई है और पैसे वापिस नहीं मिल रहे तो आप रोज़ सुबह नहाने के पश्चात सूरज को जल अर्पण करें . उस जल में 11 बीज लाल मिर्च के डाल दें तथा सूर्य भगवान से पैसे वापिसी की प्रार्थना करें . इसके साथ ही “ओम आदित्याय नमः ” का जाप करें .

नोट :
1. सभी उपाय दिन में ही करने चाहिए . अर्थात सूरज उगने के बाद व सूरज डूबने से पहले .
2. सच्चाई व शुद्ध भोजन पर विशेष ध्यान देना चाहिए .
3. किसी भी उपाय के बीच मांस, मदिरा, झूठे वचन, परस्त्री गमन की विशेष मनाही है .
4. सभी उपाय पूरे विश्वास व श्रद्धा से करें, लाभ अवश्य होगा .

Saturday, June 15, 2019

रविवार, 16 जून को ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा

*कल रविवार, 16 जून को ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा है।*

रविवार और पूर्णिमा के योग में सुबह जल्दी उठें। स्नान के बाद सूर्यदेव को जल अर्पित करें। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें, चावल, फूल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें।

सूर्यदेव की पूजा में धूप, दीप जलाकर सूर्यदेव की आरती करें।

पूर्णिमा तिथि पर विष्णुजी के स्वरूप सत्यनारायण भगवान की कथा करनी चाहिए। अगर संभव हो सके तो किसी ब्राह्मण से कथा करवानी चाहिए। ब्राह्मण की मदद से पूजा विधि-विधान से हो जाती है।

महिलाओं के लिए इस तिथि का काफी अधिक महत्व है।
इस पूर्णिमा पर वट सावित्री व्रत किया जाता है। महिलाएं अपने पति के सौभाग्य और लंबी उम्र के लिए ये व्रत करती हैं।

वट सावित्री पूर्णिमा पर विवाहित महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करती हैं और 108 परिक्रमा लगाती हैं। पेड़ पर कच्चा सूत लपेटा जाता है और पति की लंबी उम्र का वरदान मांगा जाता है।

स्कंद पुराण और भविष्य पुराण के अनुसार वट सावित्रि व्रत ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा को रखा जाता है। इस दिन महिलाओं को नए कपड़े पहनना चाहिए,सोलह श्रृंगार करना चाहिए।

बरगद की पूजा करके वट वृक्ष को फल चढ़ाएं,फूल और माला अर्पित करें, धूप-दीप जलाएं।

इस तिथि पर विवाहित महिलाओं को सत्यवान और सावित्री की कथा सुननी चाहिए।
ये प्राचीन परंपरा है, इस संबंध में मान्यता है कि ये कथा सुनने से महिलाओं को सौभाग्य मिलता है।

पूर्णिमा पर माता सावित्री की पूजा करें। किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को अपने सामर्थ्य के अनुसार दान दें,
भोजन कराएं।

सूर्यास्त के बाद किसी हनुमान मंदिर जाएं और भगवान के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।

शाम के समय घर में तुलसी के पास दीपक जलाएं और परिक्रमा करें। ध्यान रखें सूर्यास्त के बाद तुलसी को स्पर्श न करें और जल भी नहीं चढ़ाएं।

रात में घर के मंदिर में दीपक जलाएं, इस दीपक से सकारात्मकता बढ़ती है और नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव खत्म होता है।

सूर्य से संबंधित चीजें जैसे तांबे का बर्तन, पीले या लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, माणिक्य, लाल चंदन आदि का दान करें।
अपनी श्रद्धानुसार इन चीजों में से किसी भी चीज का दान किया जा सकता है।

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Monday, April 29, 2019

नवग्रहो को अपने अनुकुल बनाने के कुछ उपाय-*

*नवग्रहो को अपने अनुकुल बनाने के कुछ उपाय-*

सूर्य को अनुकुल बनाने के उपाय- अपने पिता एवँ पिता तुल्य जनोँ का मान-सम्मान करे। अहोरात्र(24घण्टे) मे से अपना कुछ समय उनको जरुर दे। उन्के पास बैठे, उनकी बातो से अपनी समस्याओँ का समाधान निकाले। ताम्बे के पात्र से पानी पिये। अपने समुदाय के प्रति सजग बने। अगर हो सके तो रविवार को एक पाठ “आदित्यह्रदय स्तोत्र” का जरुर करे। 100% सूर्य का अच्छा प्रभाव मिलेगा।
चंद्र को अनुकुल बनाने के उपाय- अपनी माता एवँ माता तुल्य स्त्रियोँ को खुश रखे। उनका आदरभाव करे। कुछ समय उनके पास बैठे। जो समस्या उनको बताने लायक हो उसके बारे मे उन से चर्चा करेँ अन्यथा उनकी बातो से अपनी समस्या का समाधान खुद निकाले। सुबह चाय या काफी लेने से पहले आधा कप या एक चम्मच गाय कच्चा दुध जरुर पीये। हो सके तो चांदी धातु शरीर पर जरुर धारण करे। शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेके कृष्ण पक्ष कि सप्तमी तक रात्रि मे चंद्रमा को अर्घ जरुर दे। मानसिक शांति के लिए Meditation जरुर करे।
मंगल को अनुकुल बनाने के उपाय- अपने भाईयोँ से मिलकर रहेँ। दिन मे नही तो रात्रि मे अपने भाईयोँ के साथ भोजन करे। किसी संकट मे आये व्यक्ति कि मदद करेँ। शारीरिक क्षमता के अनुसार रक्त का दान करेँ। किसी समझदार व्यक्ति की राय से काम करे। अन्य व्यक्ति की प्रतिष्ठा ध्यान रखे। नित्य दुध जरुर पीयेँ। घर के अग्नि स्थान(रसोई) को साफ रखे। हनुमान जी उपासना करे।
बुध को अनुकुल बनाने के उपाय – अपने मित्र ओर पडोसी से अच्छे सम्बंध रखे। अपनी क्षमता के अनुसार उनकी मदद करेँ। असहाय ओर निर्धन, गरीब व्यक्तियो कि मदद करे। नपुँसक जनो को कैसे भी(मन,कर्म,वचन) ठैस ना पहुंचाये। 1 वर्ष मे एक पेड जरुर लगाये। पशुओ को हरित घास जरुर खिलायेँ। गणेश जी की उपसान करे। हो सके तो बुधवार को गणेश अथर्वशीष का पाठ जरुर करे।
गुरु को अनुकुल बनाने के उपाय – अपने गुरु तथा अपने से बडे जनो के प्रति आदर भाव रखे। आस्तिक बने। मंदिर जरुर जाये। अपने ओर अन्य धर्मो के प्रति सद्भाभावना रखे। अपने परिवार के साथ तीर्थ स्थलो मे जायेँ। गरीब बच्चो को पठन-पाठन के लिए मदद करेँ। नित्य अपने गुरु मंत्र का जाप जरुर करेँ।
शुक्र को अनुकुल बनाने के उपाय – अपने परिवार कि तथा अन्य समुदाय कि स्त्रियोँ कि मदद करेँ। कुँवारी कन्या कि मदद करे। स्त्रियोँ के प्रति अच्छे विचार रखे। अपनी धर्म पत्नी के अलावा अन्य स्त्रियोँ को माता, बहन एवँ बेटी का दर्जा दे। नित्य संगीत जरुर सुने। अंधे व्यक्ति कि मदद करेँ। दोपहर के भोजन दही जरुर ग्रहण करे। अपने कुल-देवी की उपासना करे।
शनि को अनुकुल बनाने कि उपाय – अपने से निम्न(छोटे) वर्ग के जनो कि मदद करेँ। नोकर या अपने आस-पास के निन्म वर्गो के जनो कि मदद करे। घर के बुजुर्ग जनो को खुश रखे। दिन का कुछ समय उनके साथ जरुर बितायेँ। दिव्यांग जनो की मदद करे। हो सके तो शनिवार को पीपल के निचे तेल का दिपक जरुर करे।
राहु एवँ केतु को अनुकुल बनाने के उपाय – अपने आस-पास साफ-सफाई रखे। गलत संगत से बचे। किसी भी प्रकार का नशा ना करेँ। सभी धर्मो के जनोँ कि मदद करेँ। नशा करने वाले व्यक्तियो को नशा ना करने की सलाह देँ। पशु-पक्षियोँ पर दया भाव रखे। रात को जल्दी सोने का प्रयत्न करे। शिव जी की उपासना करे। अपने कुलदेवी देवाताओ कि उपासना करे। अपने हर कार्य के लिए नियमित बनेँ। अपनी वस्तुओँ को उनकी जगह पर हि रखेँ।

          

Saturday, January 12, 2019

ज्योतिष में बुध और जातक mercury and other planets conjoin astrology

ज्योतिष में बुध और जातक ================= बुध दिमाग है, चालाकी है, चतुराई है, पैसा है, सामाजिक तालमेल है, गणितबाज़ी है, वाणी है, घुटन देने वाला ज़हर है, शरीर को सुखा देने वाला है, कमज़ोर कर देने वाला है और वित्त मंत्री है | कुण्डली में जब बुध शत्रु ग्रह या उनकी राशी ( सुर्य, चन्द्रमा, ब्रहसपति, मंगल ) में होता है तो जातक को दिक्कत देता है, बेवझा धन हानि या फ़िर ओवर कान्फ़िडेन्स के कारण जातक को नुकसान होता है |

जब बुध सुर्य के साथ होता है तो जातक को जलदी सफ़लता देता है, खास कर 21-22 से ही जातक किसी ना किसी रूप में धन कमाना शुरु कर देता है,लेकिन उसके बाद जब जातक को लगे कि सब कुछ सैट है, जहाँ पर जातक रिसक लेता है लालच करता है, 30-32 तक पहुँच कर जातक को नीचे गिराना शुरु कर देता है |

जब कुण्डली में बुध चन्द्रमा के साथ होता है, तो भी धन तो देता है लेकिन रिश्ते के मामले में धोखा देता है, कम उम्र में ही जातक के चरित्र का पतन होना शुरू हो जाता है, जातक प्रेम सम्बन्ध की तरफ़ और खुद की खुबसुरती की तरफ़ ज़्यादा ध्यान देने लग जाता है और पढाई से जातक का मन भटक जाता है, हर समय जातक के मन में कोई ना कोई फ़ितूर चलता रहता है, जातक कभी शान्त नहीं रह पाता |

कुण्डली में जब मंगल बुध के साथ होता है तो यही बुध जातक के जोश, जुनुन और जुररत को बांध देता है, जातक के दोस्त ही उसके सामने उसका उपहास करते हैं और जातक को इस मानहानी के घूट पीने पडते हैं, वह अन्दर ही अन्दर घुटता रहता है | और यही बुध मंगल के कारण ही जातक का शरीर कमज़ोर होता है, पतला होता है, जातक में खून की कमी या फ़िर हृदय से सम्बन्ध रोग होते हैं, हर छोटी छोटी बात पर जातक घबराता है, एग्ज़ेम है उस से पहले जातक का मन घबराता है, कोई इन्ट्रवियु है उस से पहले जातक को घबराहट शुरु हो जाती है, कलास में प्रिंसिपल ने आना है ये सुन कर ही जातक घबरा जाता है |

और जब कुण्डली में बुध ब्रहसपति के साथ होता है, तो जातक अपने ही बडो का सम्मान नहीं करता, जातक एक अच्छा शिष्य नही बन सकता क्युकि वो चीज़ो को बारीकी से समझने की कोशिश नहीं करता | जातक को अपने ही माता पिता की सलाह पर चलना पसंद नहीं होता, हालकि माता पिता से सम्बन्ध अच्छे रहते हैं लेकिन कुछ ना कुछ वैचारिक मत भेद चलते रहते हैं | जातक का अपने ही पिता के साथ दोस्ताना सम्बन्ध नहीं होता, जातक अपने पिता के साथ फ़ुरसत के पल नहीं बिता सकता, जातक अपने ही पिता के साथ खरीदारी करने नही जा सकता, और अगर कर भी आये तो घर आकर बहस और नोक झोक शुरु हो जाती है | ऐसा बुध कभी भी जातक को बडो के सानिधय में रहने नहीं देता, जातक को उस के टीचर्स से बात चीत करने नहीं देगा, टीचर्स से सवाल करने नहीं देगा, चीज़ो को समझने नहीं देगा, सिर्फ़ किताबी रट्टा मारने की आदत बना देता है | जातक खुद को दूसरो से ज़्यादा बुद्धीमान और चतुर समझने लगता है | और जातक धर्म से विमुख होता चला जाता है, संस्कार और रिवाजो से दूर होता चला जाता है | और एक समय ऐसा आ जाता है कि जातक के पास धन तो होता है लेकिन रिश्ते नहीं होते, रिश्तो का सुख नहीं होता | जातक के खुद बच्चे उस का बुढापे में साथ नहीं देते उसका हाल नहीं पुछते |