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Monday, February 03, 2020

मीन मे शुक्र ग्रह का प्रभाव VENUS IN PISCES transit for all 12 zodiac signs

*शुक्र आज 3 तारीख को  अपनी राशि बदल रहा हैं ओर मीन राशि मे जा रहे हैं जो उस की उच्च राशि हैं*

*शुक्र का मीन राशि में गोचर देगा उच्च राशि के प्रभाव (3 फरवरी, 2020)*

शुक्र को जीवन में सुख सुविधा प्रदान करने वाला मुख्य ग्रह माना गया है। शुक्र के प्रभाव से जीवन में अनेक प्रकार की सुख-सुविधाओं की बढ़ोतरी होती है और व्यक्ति अपने जीवन में राज योग भोगता है। प्रेमियों के लिए भी शुक्र देव बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में शुक्र का अपनी उच्च राशि मीन में 3 फरवरी 2020 को गोचर करना कई जातकों के लिए वरदान साबित होने वाला है।

*शुक्र देंगे प्रेमियों को वैलेंटाइन डे उपहार*

इस चलते वैलेंटाइन डे पर कई राशि के जातक अपने प्रियतम संग प्रेम के इस दिवस का आनंद लेते दिखाई देंगे। आपकी सभी सुंदर परियोजनाएँ सही कर्म में होंगी। ऐसे में आप अपने साथी या प्रेमी को खुश करने के लिए उन्हें खाने के लिए बाहर लेकर जा सकते हैं क्योंकि आपका साथी आपको इस विशेष दिन बेहद ख़ास अनुभव कराएगा। इस समय अगर आपको उनके हर वक़्त फ़ोन में लगे रहने से दिक्कत महसूस होती थी तो आपकी ये शिकायत भी इस दौरान दूर होगी। कुल मिलाकर कहें तो शुक्र का मीन में गोचर प्रेमियों के लिए सोने पर सुहागे का कार्य करेगा।

*शुक्र गोचर का समय*

जीवन में सुखों का प्रदाता और प्रेम को बढ़ाने वाला शुक्र ग्रह 3 फरवरी, सोमवार की सुबह 02:13 बजे कुम्भ राशि से निकलकर देव गुरु बृहस्पति के स्वामित्व वाली मीन राशि में प्रवेश कर चुके हैं 
। वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुक्र के गोचर की अवधि काफी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इसके शुभ प्रभाव से अनेक प्रकार के शुभ कार्य संपन्न होते हैं। मीन राशि में शुक्र के गोचर का प्रभाव सभी बारह राशियों पर देखने को मिलेगा क्योंकि यह शुक्र की उच्च राशि है।

तो आईये जानते हैं कि शुक्र के मीन राशि में गोचर का सभी राशि के जातकों पर कैसा प्रभाव पड़ने की संभावना है:

*यह राशिफल चंद्र राशि पर आधारित है।*

मेष राशि
आपके लिए शुक्र दूसरे और सातवें भाव के स्वामी हैं और इस गोचर की अवधि में आपके बारहवें भाव में विराजमान हो जाएंगे। इसके परिणाम स्वरूप आपके खर्चों में एकाएक वृद्धि होने लगेगी, जिसका असर आपकी आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा, लेकिन यह खर्चे आपकी सुख सुविधाओं को बढ़ाने वाले होंगे और आपको खुशी देंगे, जिससे आप आसानी से इस खर्च को वहन कर पाएंगे। आप की आमदनी भी बढ़ेगी आपके व्यापार में विदेशी संपर्कों का आपको लाभ हासिल होगा और धन निवेश के लिए भी यह समय काफी उन्नति दायक साबित होगा। आपको व्यसनों से बचने का प्रयास करना चाहिए। कुछ लोगों को व्यापार के सिलसिले में विदेश जाने का मौका भी मिल सकता है। इसके अलग कुछ ऐसे लोग, जिनका विवाह होने वाला है, उन्हें विवाह के बाद विदेश जाने की संभावना बनेगी। इस दौरान आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा क्योंकि अति व्यस्त दिनचर्या और अनियमित खान-पान के कारण आपको स्वास्थ्य कष्ट हो सकते हैं। यह समय धन निवेश करने के लिए अनुकूल रहेगा।

उपायः प्रत्येक शुक्रवार के दिन किसी धार्मिक स्थान पर मिश्री का दान करें।

वृषभ राशि
शुक्र देव आपकी राशि के स्वामी हैं यानि कि आप के पहले भाव के स्वामी होने के साथ-साथ आप के छठे भाव के स्वामी भी हैं। मीन राशि में शुक्र देव के इस गोचर की अवधि में वे आप के ग्यारहवें भाव में जाएंगे, जिसकी वजह से आपकी आमदनी में जबरदस्त इजाफा होगा। आपकी मनोनुकूल इच्छाएं पूरी होंगी और आपको खुशी मिलेगी। स्वास्थ्य में सुधार होगा और पुरानी चली आ रही किसी बीमारी से मुक्ति मिलेगी। इस दौरान आपकी मित्र मंडली में इजाफा होगा। प्रेम संबंध के मामलों में यह गोचर काफी अनुकूल साबित होगा और आपके प्रेम जीवन को प्रेम से सराबोर कर देगा। आप अपने प्रियतम के साथ बेहतरीन पलों का आनंद लेंगे और आपको खुशी का एहसास होगा। आपकी शिक्षा में वृद्धि होगी और नौकरी के क्षेत्र में भी आपको इस दौरान अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। व्यापार में लाभ होने से आप काफी प्रसन्नता महसूस करेंगे।

उपायः आपको शुक्रवार के दिन अरंड मूल धारण करनी चाहिए।

मिथुन राशि
मिथुन राशि के स्वामी बुध शुक्र के परम मित्र हैं। आपकी राशि के लिए शुक्र देव पाँचवें और बारहवें भाव के स्वामी हैं तथा गोचर की इस अवधि में आपके दशम भाव में प्रवेश करेंगे। इस गोचर के प्रभाव से आपके परिवार में सुख शांति की बयार बहेगी। परिवार में ख़ुशियाँ आएँगी। परिवार के लोग कोई नया वाहन खरीदने का विचार करेंगे, जिसमें उन्हें सफलता हासिल होगी। लोगों के बीच प्रेम बढ़ेगा। यदि कार्य क्षेत्र की बात की जाए तो उसमें आपको अच्छे नतीजे मिलेंगे, लेकिन आप अति आत्मविश्वास के शिकार हो सकते हैं, जिसकी वजह से आपका काम बिगड़ सकता है, इसलिए से बचने का प्रयास करें। आपकी वाणी में मिठास बढ़ेगी और लोग आपके प्रति आकर्षित होंगे, जिससे आप का दबदबा बढ़ेगा। अपनी विद्या के बल पर आप अपने कार्य क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करेंगे और इस सिलसिले में की गई यात्राएं भी आपके लिए फ़ायदेमंद साबित होंगी। बेवजह की बातों से अपना मन अलग रखें, नहीं तो काम में समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

उपायः श्री दुर्गा सप्तशती का नियमित पाठ करें।

कर्क राशि
आपकी राशि के लिए शुक्र देव चौथे भाव और ग्यारहवें भाव के स्वामी होकर गोचर की इस अवधि में आपके नौवें भाव में प्रवेश करेंगे। इस गोचर के परिणाम स्वरूप आपको लंबी यात्राओं पर जाने का मौका मिलेगा। यह यात्राएं आपके सुख और आनंद में वृद्धि करेंगी। आप परिवार के लोगों के साथ या ऑफिस के सहकर्मियों के साथ किसी पिकनिक पर अच्छे रमणीक स्थान पर घूमने जा सकते हैं। आपके मान और सम्मान में बढ़ोतरी होगी। आपकी आमदनी भी बढ़ेगी और लोगों के बीच आपकी पूछ बढ़ेगी। कुछ लोगों को इस दौरान सुदूर स्थान पर जाकर प्रॉपर्टी का लाभ मिलेगा, यानि कि अपने जन्म स्थान से दूर कुछ लोग प्रॉपर्टी बना पाएंगे। इसके अतिरिक्त व्यापार के सिलसिले में आपको जबरदस्त लाभ होने के भी योग बनेंगे ।

उपायः शुक्रवार के दिन चीनी दान में दें।

सिंह राशि
आपकी राशि के लिए शुक्र देव तीसरे और दसवें भाव के स्वामी हैं और मीन राशि में गोचर करते हुए आपके आठवें भाव में प्रवेश करेंगे, जिसकी वजह से आपको कार्यक्षेत्र में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। आपको अपने साथ काम करने वाले लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करना होगा, अन्यथा आपको अपने पद से विमुक्त किया जा सकता है। इस दौरान अनचाहे ट्रांसफर के भी योग बन सकते हैं। गुप्त सुखों को भोगने की लालसा जागेगी, जिसकी वजह से आप काफी धन भी खर्च करेंगे। हालांकि मर्यादित आचरण करना ही बेहतर रहेगा। भाई बहनों को कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है और यात्राओं में बेवजह का तनाव और खर्चे आपको परेशान करेंगे। अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान आपको इस दौरान रखना चाहिए।

उपायः आप को शुक्रवार के दिन गौमाता को आटे की लोई अपने हाथ से खिलानी चाहिए।

कन्या राशि
कन्या राशि के जातकों के लिए शुक्र देव आपके दूसरे और नौवें भाव के स्वामी होने के बाद गोचर की इस अवधि में आप के सातवें भाव में प्रवेश करेंगे। इस गोचर के परिणाम स्वरूप आपको अपने दांपत्य जीवन में अनेक सुखों का लाभ मिलेगा आप उत्तम दांपत्य जीवन का सुख भोगेंगे। आपका जीवन साथी आपके लिए लाभ का माध्यम भी बनेगा और आपको इच्छित सुख प्रदान करेगा। आप दोनों के बीच संबंध बेहतर बनेंगे और परिवार को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रयत्न करेंगे। व्यापार के सिलसिले में इस दौरान आपको जबरदस्त लाभ होने के योग बन रहे हैं, इसलिए इस अवसर का पूरा लाभ उठाएं। यात्राओं से आपको लाभ मिलेगा। मान व सम्मान की बढ़ोतरी होगी और जनता की नजर में आपकी छवि बेहतर बनेगी। अपने संचित धन को व्यवसाय में निवेश कर सकते हैं। मानसिक रूप से आप काफी मजबूत रहेंगे और लोगों के प्रति स्नेह की भावना आपके मन में रहेगी, जिससे आप लोगों के प्रिय बनेंगे ।

उपायः शुक्रवार के दिन माता महालक्ष्मी की उपासना करनी चाहिए।

तुला राशि
आपकी राशि के स्वामी शुक्र देव हैं। अर्थात आप के प्रथम भाव के साथ-साथ आपके अष्टम भाव के स्वामी शुक्र देव अपने मीन राशि में गोचर की समय अवधि में आपके छठे भाव में प्रवेश करेंगे, जिसकी वजह से आपके खर्चों में यकायक वृद्धि होगी और यह आपकी जेब पर काफी भारी पड़ सकती है, इसलिए आपको काफी सोच समझकर अपना बजट प्लान करना होगा। स्वास्थ्य के मामले में यह समय बेहतर नहीं रहेगा और आपको अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखना पड़ेगा क्योंकि आपको इस दौरान असंतुलित दिनचर्या के चलते या व्यर्थ खान पान के चलते स्वास्थ्य समस्याएं परेशान कर सकती हैं। ये परेशानियाँ लंबे समय तक चल सकती हैं। धन हानि होने की संभावना रहेगी लेकिन इस दौरान यदि आपका कोई कर्ज़ है तो वह चुकता हो जाएगा, जिससे आपको आर्थिक रूप से कमज़ोरी तो होगी, लेकिन राहत की सांस भी मिलेगी। कार्य क्षेत्र में यह समय आँख और कान खोल कर अपने काम पर फोकस करने का है, तभी आपको अच्छे नतीजे हासिल होंगे। इस समय को बेहतर बनाने के लिए आपको एड़ी चोटी का जोर लगाना होगा और खूब मेहनत करनी पड़ेगी ।

उपायः आपको उत्तम गुणवत्ता का ओपल रत्न शुक्रवार के दिन चाँदी की अंगूठी में अनामिका उंगली में धारण करना चाहिए।

वृश्चिक राशि
आपकी राशि के लिए शुक्र देव सातवें और बारहवें भाव के स्वामी हैं तथा गोचर की इस अवधि में आप के पांचवे भाव में गोचर करेंगे, जिसकी वजह से आपके प्रेम संबंधों में खुशबू बिखर जाएगी और आपका प्रेम जीवन काफी मजबूती से आगे बढ़ेगा। आप और आपके प्रियतम के बीच की सभी ग़लतफहमियाँ दूर हो जाएंगी और आप प्रेम के बंधन में बंध कर अपने जीवन को एक खुशनुमा राह पर आगे बढ़ाएंगे। इस दौरान आपकी शिक्षा में आपको बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे और आपकी गणना विद्वानों में होगी। अपनी क्रिएटिविटी के कारण आपको सब की प्रशंसा मिलेगी और आपका धन बढ़ेगा। अर्थात् प्रचुर धन लाभ के योग बनेंगे। दोस्तों और विपरीत लिंगी जातको में आप खासे लोकप्रिय हो जाएंगे और आपके सोशल सर्किल में इजाफा होगा। इस समय में आप कोई क्रिएटिव काम करेंगे, जिससे आपको प्रसिद्धि भी प्राप्त होगी। कुछ भाग्यशाली लोगों को इस दौरान संतान प्राप्ति के योग भी बनेंगे। व्यापार के सिलसिले में लाभ प्राप्ति का अवसर आपको अवश्य मिलेगा।

उपायः शुक्रवार को लौंग वाला पान माता महालक्ष्मी को अर्पित करें।

धनु राशि
धनु राशि के जातकों के लिए शुक्र महाराज छठे भाव के साथ-साथ ग्यारहवें भाव के स्वामी भी होते हैं और गोचर की इस अवधि में वे आप के चौथे भाव में प्रवेश करेंगे, जिससे परिवार में खुशियाँ आएँगी। कोई अच्छा समारोह या फिर कोई फंक्शन या शुभ कार्य आपके घर में संपन्न होगा, जिसमें अतिथियों के आगमन से घर में हर्ष और उल्लास की स्थिति बनेगी। मेहमानों का आगमन होगा जिसकी वजह से परिवार में नई चेतना और लोगों में एक दूसरे के प्रति स्नेह की भावना बढ़ेगी। कार्य क्षेत्र में भी आपको उत्तम नतीजे प्राप्त होंगे। आपके काम में आपको प्रशंसा मिलेगी और आपकी सुख भोगने की प्रवृत्ति बढ़ जाएगी। आपको अनेक प्रकार के सुख मिलेंगे। इस दौरान परिवार में कोई नया वाहन आ सकता है और अपने घर को सजाने संवारने पर भी आप खासा ध्यान देंगे।

उपायः शुक्रवार के दिन किसी महिला पुजारी को श्रृंगार की सामग्री भेंट करें।

मकर राशि
आपकी राशि के लिए शुक्र देव पांचवें और दसवें भाव के स्वामी हैं और इस प्रकार आपके लिए ये एक योगकारक ग्रह हैं। गोचर की इस अवधि में यह आपके तीसरे भाव में प्रवेश करेंगे, जिसकी वजह से आपको अनेक सुखद यात्राओं पर जाना पड़ेगा। गोचर की इस अवधि में आप मौज मस्ती के लिए या मित्रों के साथ घूमने करने के प्लान बनाएँगे, जिससे आपको खूब खुशी का अनुभव होगा और अपने आप को ऊर्जावान महसूस करेंगे। इस दौरान यात्राओं से आपको कुछ नए संपर्क जुड़ेंगे, जो भविष्य में आपके काम आएँगे। प्रेम जीवन में वृद्धि होगी। यदि आप अभी तक सिंगल हैं, तो आपके जीवन में कोई खास व्यक्ति आ सकता है, जिससे आपको प्रेम हो जायेगा। यदि आप विवाहित हैं तो आपकी संतान को इस दौरान प्रगति मिलेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी यह गोचर आपके लिए काफी अनुकूल रहेगा। कार्यस्थल पर अपने सहकर्मियों से आप यदि अपने व्यवहार को बेहतर बनाएँगे तो उससे आपको उनका सहयोग भी समय समय पर मिलता रहेगा और आप तरक्की की राह पर आगे बढ़ेंगे।

उपायः भगवान श्री गणेश जी की पूजा करें और उन्हें दूर्वांकुर (दूब घास) चढ़ाएँ।

कुंभ राशि
आपकी राशि के लिए शुक्र देव आपके चौथे और नौवें भाव के स्वामी होकर योगकारक ग्रह हैं और आपके दूसरे भाव में गोचर की अवधि में विराजमान होंगे। इस गोचर के फल स्वरूप आपको अनेक अच्छे नतीजे मिलेंगे। आप अच्छे भोजन का आनंद लेंगे और स्वादिष्ट व्यंजनों का जी भर कर मजा लेंगे। कोई सुख शांति पूर्ण काम होगा, जिससे घर में रौनक लौट आएगी। इस दौरान भाग्य का आपको पूरा साथ मिलेगा और आपकी योजनाएं आपको धन प्रदान करेंगी। धन संचित करने में भी आपको इस दौरान सफलता मिलेगी और आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। यह समय आपको सामाजिक और आर्थिक तौर पर काफी समृद्ध बनाएगा। इसके अतिरिक्त परिवार के लोगों से भी आपको लाभ होगा और कोई प्रॉपर्टी या फिर वाहन से आपको उत्तम प्रकृति के लाभ के योग बनेंगे। इस प्रकार यह गोचर आपके लिए काफी अनुकूल साबित होगा और आपकी भाग्य वृद्धि के साथ-साथ मान सम्मान में भी बढ़ोतरी लेकर आएगा।

उपायः आपको शुक्रवार के दिन घर की स्त्रियों को कोई सफ़ेद मिठाई खिलानी चाहिए।

मीन राशि
आपकी राशि के लिए शुक्र देव तीसरे और आठवें भाव के स्वामी हैं और गोचर की इस अवधि में आप के प्रथम भाव में विराजमान होंगे। इन दोनों ही भावों के स्वामी होने से आपको शारीरिक तौर पर कुछ परेशानियां झेलनी पड़ेंगी और आपको अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहना होगा। वहीं अचानक से धन लाभ के योग भी बनेंगे और आपका मन किसी प्रकार के शोध या छुपी हुई बातों को जानने में होगा। आप अपने किसी टैलेंट को समाज के सामने लेकर आएँगे, जिससे आपको मान सम्मान मिलेगा। इस दौरान आपके भाई बहनों से आपको अच्छे लाभ मिलेंगे और वे हर काम में आपके साथ खड़े नजर आएँगे। दांपत्य जीवन के लिहाज से यह समय काफी अनुकूल रहेगा और आप और आपके जीवनसाथी के मध्य प्रेम बढ़ेगा, जिससे आपको दांपत्य सुख की प्राप्ति होगी और व्यापार के सिलसिले में भी लाभ मिलेगा। इसका सबसे अच्छा लाभ यह होगा कि आपके व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ेगा और लोग आपके प्रति आकर्षित होंगे, जिससे आपको उनकी नजर में अपने आप को सिद्ध करने का मौका मिलेगा।

उपायः आपको दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए और मां दुर्गा को लाल पुष्प अर्पित करने चाहिए।
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Wednesday, June 26, 2019

सिद्ध लाल किताब टोटके : finance property depression

सिद्ध लाल किताब टोटके :

आज संसार में हर आदमी दुखी है . चाहे अमीर हो या गरीब, बडा हो या छोटा . हर इंसान को कोई न कोई परेशानी लगी रहती है . ज्योतिष में इसके लिए कई उपाय सुझाए गए हैं . जिनको विधि पूर्वक करके हम लाभ उठा सकते हैं .

लाल किताब उत्तर भारत में खास कर पंजाब में बहुत प्रसिद्ध है . अब इसका प्रचार धीरे-धीरे पूरे भारत में हो रहा है . इसकी लोकप्रियता का मुख्य कारण इसके आसान, सस्ते और सटीक उपाय हैं . इसमें कई उपाय ग्रहों की बजाय लक्षणों से बताये जाते हैं . आपके लाभ के लिए कुछ सिद्ध उपाय निम्न प्रकार से हैं –

1. यदि आपको धन की परेशानी है, नौकरी मे दिक्कत आ रही है, प्रमोशन नहीं हो रहा है या आप अच्छे करियर की तलाश में है तो यह उपाय कीजिए :
किसी दुकान में जाकर किसी भी शुक्रवार को कोई भी एक स्टील का ताला खरीद लीजिए . लेकिन ताला खरीदते वक्त न तो उस ताले को आप खुद खोलें और न ही दुकानदार को खोलने दें ताले को जांचने के लिए भी न खोलें . उसी तरह से डिब्बी में बन्द का बन्द ताला दुकान से खरीद लें . इस ताले को आप शुक्रवार की रात अपने सोने के कमरे में रख दें . शनिवार सुबह उठकर नहा-धो कर ताले को बिना खोले किसी मन्दिर, गुरुद्वारे या किसी भी धार्मिक स्थान पर रख दें . जब भी कोई उस ताले को खोलेगा आपकी किस्मत का ताला खुल जायगा .

2. यदि आप अपना मकान, दुकान या कोई अन्य प्रापर्टी बेचना चाहते हैं और वो बिक न रही हो तो यह उपाय करें :

बाजार से 86 (छियासी) साबुत बादाम (छिलके सहित) ले आईए . सुबह नहा-धो कर, बिना कुछ खाये, दो बादाम लेकर मन्दिर जाईए . दोनो बादाम मन्दिर में शिव-लिंग या शिव जी के आगे रख दीजिए . हाथ जोड कर भगवान से प्रापर्टी को बेचने की प्रार्थना कीजिए और उन दो बादामों में से एक बादाम वापिस ले आईए . उस बादाम को लाकर घर में कहीं अलग रख दीजिए . ऐसा आपको 43 दिन तक लगातार करना है . रोज़ दो बादाम लेजाकर एक वापिस लाना है . 43 दिन के बाद जो बादाम आपने घर में इकट्ठा किए हैं उन्हें जल-प्रवाह (बहते जल, नदी आदि में) कर दें . आपका मनोरथ अवश्य पूरा होगा . यदि 43 दिन से पहले ही आपका सौदा हो जाय तो भी उपाय को अधूरा नही छोडना चाहिए . पूरा उपाय करके 43 बादाम जल-प्रवाह करने चाहिए . अन्यथा कार्य में रूकावट आ सकती है .

3. यदि आप ब्लड प्रेशर या डिप्रेशन से परेशान हैं तो :
इतवार की रात को सोते समय अपने सिरहाने की तरफ 325 ग्राम दूध रख कर सोंए . सोमवार को सुबह उठ कर सबसे पहले इस दूध को किसी कीकर या पीपल के पेड को अर्पित कर दें . यह उपाय 5 इतवार तक लगातार करें . लाभ होगा .

4. माईग्रेन या आधा सीसी का दर्द का उपाय :
सुबह सूरज उगने के समय एक गुड का डला लेकर किसी चौराहे पर जाकर दक्षिण की ओर मुंह करके खडे हो जांय . गुड को अपने दांतों से दो हिस्सों में काट दीजिए . गुड के दोनो हिस्सों को वहीं चौराहे पर फेंक दें और वापिस आ जांय . यह उपाय किसी भी मंगलवार से शुरू करें तथा 5 मंगलवार लगातार करें . लेकिन….लेकिन ध्यान रहे यह उपाय करते समय आप किसी से भी बात न करें और न ही कोई आपको पुकारे न ही आप से कोई बात करे . अवश्य लाभ होगा .

5. फंसा हुआ धन वापिस लेने के लिए :
यदि आपकी रकम कहीं फंस गई है और पैसे वापिस नहीं मिल रहे तो आप रोज़ सुबह नहाने के पश्चात सूरज को जल अर्पण करें . उस जल में 11 बीज लाल मिर्च के डाल दें तथा सूर्य भगवान से पैसे वापिसी की प्रार्थना करें . इसके साथ ही “ओम आदित्याय नमः ” का जाप करें .

नोट :
1. सभी उपाय दिन में ही करने चाहिए . अर्थात सूरज उगने के बाद व सूरज डूबने से पहले .
2. सच्चाई व शुद्ध भोजन पर विशेष ध्यान देना चाहिए .
3. किसी भी उपाय के बीच मांस, मदिरा, झूठे वचन, परस्त्री गमन की विशेष मनाही है .
4. सभी उपाय पूरे विश्वास व श्रद्धा से करें, लाभ अवश्य होगा .

Monday, April 29, 2019

नवग्रहो को अपने अनुकुल बनाने के कुछ उपाय-*

*नवग्रहो को अपने अनुकुल बनाने के कुछ उपाय-*

सूर्य को अनुकुल बनाने के उपाय- अपने पिता एवँ पिता तुल्य जनोँ का मान-सम्मान करे। अहोरात्र(24घण्टे) मे से अपना कुछ समय उनको जरुर दे। उन्के पास बैठे, उनकी बातो से अपनी समस्याओँ का समाधान निकाले। ताम्बे के पात्र से पानी पिये। अपने समुदाय के प्रति सजग बने। अगर हो सके तो रविवार को एक पाठ “आदित्यह्रदय स्तोत्र” का जरुर करे। 100% सूर्य का अच्छा प्रभाव मिलेगा।
चंद्र को अनुकुल बनाने के उपाय- अपनी माता एवँ माता तुल्य स्त्रियोँ को खुश रखे। उनका आदरभाव करे। कुछ समय उनके पास बैठे। जो समस्या उनको बताने लायक हो उसके बारे मे उन से चर्चा करेँ अन्यथा उनकी बातो से अपनी समस्या का समाधान खुद निकाले। सुबह चाय या काफी लेने से पहले आधा कप या एक चम्मच गाय कच्चा दुध जरुर पीये। हो सके तो चांदी धातु शरीर पर जरुर धारण करे। शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेके कृष्ण पक्ष कि सप्तमी तक रात्रि मे चंद्रमा को अर्घ जरुर दे। मानसिक शांति के लिए Meditation जरुर करे।
मंगल को अनुकुल बनाने के उपाय- अपने भाईयोँ से मिलकर रहेँ। दिन मे नही तो रात्रि मे अपने भाईयोँ के साथ भोजन करे। किसी संकट मे आये व्यक्ति कि मदद करेँ। शारीरिक क्षमता के अनुसार रक्त का दान करेँ। किसी समझदार व्यक्ति की राय से काम करे। अन्य व्यक्ति की प्रतिष्ठा ध्यान रखे। नित्य दुध जरुर पीयेँ। घर के अग्नि स्थान(रसोई) को साफ रखे। हनुमान जी उपासना करे।
बुध को अनुकुल बनाने के उपाय – अपने मित्र ओर पडोसी से अच्छे सम्बंध रखे। अपनी क्षमता के अनुसार उनकी मदद करेँ। असहाय ओर निर्धन, गरीब व्यक्तियो कि मदद करे। नपुँसक जनो को कैसे भी(मन,कर्म,वचन) ठैस ना पहुंचाये। 1 वर्ष मे एक पेड जरुर लगाये। पशुओ को हरित घास जरुर खिलायेँ। गणेश जी की उपसान करे। हो सके तो बुधवार को गणेश अथर्वशीष का पाठ जरुर करे।
गुरु को अनुकुल बनाने के उपाय – अपने गुरु तथा अपने से बडे जनो के प्रति आदर भाव रखे। आस्तिक बने। मंदिर जरुर जाये। अपने ओर अन्य धर्मो के प्रति सद्भाभावना रखे। अपने परिवार के साथ तीर्थ स्थलो मे जायेँ। गरीब बच्चो को पठन-पाठन के लिए मदद करेँ। नित्य अपने गुरु मंत्र का जाप जरुर करेँ।
शुक्र को अनुकुल बनाने के उपाय – अपने परिवार कि तथा अन्य समुदाय कि स्त्रियोँ कि मदद करेँ। कुँवारी कन्या कि मदद करे। स्त्रियोँ के प्रति अच्छे विचार रखे। अपनी धर्म पत्नी के अलावा अन्य स्त्रियोँ को माता, बहन एवँ बेटी का दर्जा दे। नित्य संगीत जरुर सुने। अंधे व्यक्ति कि मदद करेँ। दोपहर के भोजन दही जरुर ग्रहण करे। अपने कुल-देवी की उपासना करे।
शनि को अनुकुल बनाने कि उपाय – अपने से निम्न(छोटे) वर्ग के जनो कि मदद करेँ। नोकर या अपने आस-पास के निन्म वर्गो के जनो कि मदद करे। घर के बुजुर्ग जनो को खुश रखे। दिन का कुछ समय उनके साथ जरुर बितायेँ। दिव्यांग जनो की मदद करे। हो सके तो शनिवार को पीपल के निचे तेल का दिपक जरुर करे।
राहु एवँ केतु को अनुकुल बनाने के उपाय – अपने आस-पास साफ-सफाई रखे। गलत संगत से बचे। किसी भी प्रकार का नशा ना करेँ। सभी धर्मो के जनोँ कि मदद करेँ। नशा करने वाले व्यक्तियो को नशा ना करने की सलाह देँ। पशु-पक्षियोँ पर दया भाव रखे। रात को जल्दी सोने का प्रयत्न करे। शिव जी की उपासना करे। अपने कुलदेवी देवाताओ कि उपासना करे। अपने हर कार्य के लिए नियमित बनेँ। अपनी वस्तुओँ को उनकी जगह पर हि रखेँ।

          

Saturday, October 06, 2018

विभिन्न रंग की बोतलों के पानी सेवन करने से लाभ


*विभिन्न रंग की बोतलों के पानी सेवन करने से लाभ

लाल (Red)रंग

*लाल रंग की बोतल का पानी अत्यंत गर्म प्रकृति का होता है। अतः जिनकी प्रकृति गर्म हो उन्हें इसे पीना नहीं चाहिए। इसको पीने से खूनी दस्त या उलटी हो सकती है। इस पानी का उपयोग केवल मालिश करने के लिए करना चाहिए। यह Blood और Nerves को उत्तेजित करता है। और शरीर में गर्मी बढ़ाता है। गर्मियों में इसका उपयोग नहीं करना चाहिए। यह सभी प्रकार के वात और कफ रोगों में लाभ प्रदान करता है।*

2नारंगी (Orange) रंग  की बोतल में तैयार किया गया जल Blood Circulation को बढ़ाता है और मांसपेशियों को मजबूत करता है। यह औषधि मानसिक शक्ति और इच्छाशक्ति को बढ़ाने वाली है। अतः यदि किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में सूर्य या चन्द्रमा निर्बल है तो उसे इस जल का उपयोग करके अत्यंत लाभ प्राप्त हो सकता है। या औषधि बुद्धि और साहस को भी बढ़ाता है। कफ सम्बंधित रोगों,खांसी, बुखार, निमोनिया, सांस से सम्बंधित रोग, Tuberculosis, पेट में गैस, हृदय रोग, गठिया, Anaemia, Paralysis आदि रोगों में लाभ देता है। यह औषधि माँ के स्तनों में दूध की वृद्धि भी करती है।*
पीला(Yellow) रंग शारीरिक एवं मानसिक स्वस्थता के लिए यह जल बहुत उपयोगी है परन्तु इस जल को थोड़ी मात्रा में लेना चाहिए। यह जल Digestive System को ठीक करता है अतः पेट दर्द, कब्ज आदि समस्यायों के निदान के लिए इस जल का सेवन लाभकारी है। परन्तु पेचिश होने पर इस जल को न लें। इसके अतिरिक्त हृदय, लीवर और Lungs के रोगों में भी इस जल को पीने से लाभ मिलता है।*
4हरा (Green )रंग  यह औषधि शारीरिक स्वस्थता और मानसिक प्रसन्नता देने वाली है। Muscles को regenerate करती है। Mind और Nervous system को स्वस्थ रखती है। इस जल को वात रोगों, Typhoid, मलेरिया आदि बुखार, Liver और Kidney में सूजन, त्वचा सम्बंधित रोगों, फोड़ा -फुन्सी, दाद, आँखों के रोग, डायबिटीज, सूखी खांसी, जुकाम, बवासीर, कैंसर, सिरदर्द, ब्लड प्रेशर, आदि में सेवन करना लाभप्रद है।*

5आसमानी (Blue) रंग: -*यह शीतल औषधि है। पित्त सम्बंधित रोगों में  है। यह प्यास को शांत करता है एवं बहुत अच्छा Antiseptic भी है। सभी प्रकार के बुखारों में सर्वोत्तम लाभकारी है। कफ वाले व्यक्तियों को इसका उपयोग नहीं करना चाहिए। यह बुखार, खांसी, दस्त, पेचिश, दमा, सिरदर्द, Urine सम्बन्धी रोग, पथरी, त्वचा रोग, नासूर, फोड़े -फुन्सी, आदि रोगों में अत्यंत लाभ प्रदान करता है।*

*6नीला (Indigo) रंग:-*
यह औषधि भी शीतल श्रेणी में आती है। इस औषधि को लेने में कुछ कब्ज की शिकायत हो सकती है परन्तु यह शीतलता और मानसिक शान्ति प्रदान करता है। शरीर पर इस जल का प्रभाव बहुत जल्दी होता है। यह Intestine, Leucoria, योनिरोग आदि रोगों में विशेष लाभप्रद है। तथा शरीर में गर्मी के सभी रोगों को समाप्त करता है।*
7 ,बैंगनी (Voilet) रंग
इस औषधि के गुण बहुतायत में नीले रंग के जल से मिलते जुलते हैं। इसके सेवन से Blood में RBC Count बढ़ जाता है। यही खून की कमी को दूर कर Anaemia रोग को ठीक करता है। Tuberculosis जैसे रोग को ठीक करता है। इस जल को पीने से नींद अच्छी आती है।गुरु कृपा केवलं।

Friday, June 29, 2018

नक्षत्र मंत्र/nakshatra mantras : वैदिक , पौराणिक और नक्षत्र देवता मंत्र*

*नक्षत्र मंत्र : वैदिक , पौराणिक और नक्षत्र देवता मंत्र*
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हमारे जीवन में नक्षत्रों का भी उतना ही महत्त्व है जितना की नवग्रहों का, ऋषि मुनियों ने नभ मंडल को कल  २७ नक्षत्र में बांटा हैं और प्रत्येक राशि के अंतर्गत ३ नक्षत्र आते हैं।
पीड़ा परेशानी होने पर हम ग्रहों की पूजा, दान  और जप तो करते हैं पर नक्षत्रों को भूल जाते हैं। यहाँ आपको नक्षत्रों की  जिसमे उनके वैदिक, पौराणिक मंत्र, नक्षत्र देवता के मंत्र और नक्षत्र मंत्र हैं।  अपने नक्षत्र मंत्र के जप करके आप लाभ उठा सकते है उसे बलवान कर सकते हैं साथ ही नक्षत्र की वनस्पति के वृक्ष को लगाकर उसकी सेवा करके यानि नित्य जल देते हुए मंत्र जप कर लाभ ले सकते हैं और यदि किसी कारण से नक्षत्र लाभ न दे रहा हो तो उसे अपने पक्ष में लाभ देने वाला बना सकते हैं।  आपका जन्म नक्षत्र कैसा है और आपके जीवन पर क्या प्रभाव दे रहा है इसके लिए किसी विद्वान पंडित जी या ज्योतिषी से सम्पर्क कर इस जानकारी का लाभ ले सकते हैं।

१) अश्विनी

नक्षत्र: अश्विनी
नक्षत्र देवता : अश्विनीकुमार
नक्षत्र स्वामी : केतु
नक्षत्र आराध्य वृक्ष : कुचला
राशी व्याप्ती : ४ हि चरण मेष राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी: घोडा
नक्षत्र तत्व : वायु
नक्षत्र स्वभाव : शुभ

वेद मंत्र

ॐ अश्विनौ तेजसाचक्षु: प्राणेन सरस्वती वीर्य्यम वाचेन्द्रो
बलेनेन्द्राय दधुरिन्द्रियम । ॐ अश्विनी कुमाराभ्यो नम: ।

पौराणिक मंत्र:

अश्विनी देवते श्वेतवर्णो तौव्दिभुजौ स्तुमः
lसुधासंपुर्ण कलश कराब्जावश्च वाहनौ ll

नक्षत्र देवता मंत्र:
अ)ॐअश्विनी कुमाराभ्यां नमः
आ) ॐ अश्विभ्यां नमः

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ अश्वयुगभ्यां नमःl

२) भरणी

नक्षत्र : भरणी
नक्षत्र देवता : यम - आद्य पितर
नक्षत्र स्वामी :शुक्र
नक्षत्र आराध्य वृक्ष : आँवला
राशी व्याप्ती : ४ हि चरण मेष राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी : हत्ती
नक्षत्र तत्व : अग्नी
नक्षत्र स्वभाव : क्रूर

वेद मंत्र

ॐ यमायत्वा मखायत्वा सूर्य्यस्यत्वा तपसे देवस्यत्वा सवितामध्वा
नक्तु पृथ्विया स गवं स्पृशस्पाहिअर्चिरसि शोचिरसि तपोसी।

पौराणिक मंत्र:

पाशदण्डं भुजव्दयं यमं महिष वाहनम l
यमं नीलं भजे भीमं सुवर्ण प्रतीमागतम् ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र:- ॐ यमाय् नमः l

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ अपभरणीभ्यो नमःl

३) कृतिका

नक्षत्र: कृतिका
नक्षत्र देवता : अग्नी
नक्षत्र स्वामी : रवि
नक्षत्र आराध्य वृक्ष : उंबर, औदुंबर
राशी व्याप्ती : १ले चरण मेष राशीमध्ये,
बाकीचे ३ चरण वृषभ राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी: बकरी
नक्षत्र तत्व :अग्नी
नक्षत्र स्वभाव : क्रूर

वेद मंत्र

ॐ अयमग्नि सहत्रिणो वाजस्य शांति गवं
वनस्पति: मूर्द्धा कबोरीणाम । ॐ अग्नये नम: ।

पौराणिक मंत्र:

कृतिका देवतामाग्निं मेशवाहनं संस्थितम् l
स्त्रुक् स्तुवाभीतिवरधृक्सप्तहस्तं नमाम्यहम् ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र:- ॐ आग्नेय नमः l

नक्षत्र नाम मंत्र :ॐ कृतिकाभ्यो नमः

४) रोहिणी

नक्षत्र: रोहिणी
नक्षत्र देवता :ब्रम्हा
नक्षत्र स्वामी : चंद्र
नक्षत्र आराध्य वृक्ष :जामुन जांभळी, जांभू
राशी व्याप्ती : ४ हि चरण वृषभ राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी: सर्प
नक्षत्र तत्व: पृथ्वी
नक्षत्र स्वभाव: शुभ

वेद मंत्र

ॐ ब्रहमजज्ञानं प्रथमं पुरस्ताद्विसीमत: सूरुचोवेन आव: सबुधन्या उपमा
अस्यविष्टा: स्तश्चयोनिम मतश्चविवाह ( सतश्चयोनिमस्तश्चविध: )

पौराणिक मंत्र:

प्रजापतीश्वतुर्बाहुः कमंडल्वक्षसूत्रधृत् l
वराभयकरः शुध्दौ रोहिणी देवतास्तु मे ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र:-
अ) ॐ ब्रम्हणे नमःl
आ) ॐ प्रजापतये नमःll

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ रौहिण्यै नमःl

५) मृगशिरा
नक्षत्र: मृगशिरा
नक्षत्र देवता: चंद्र
नक्षत्र स्वामी: मंगळ
नक्षत्र आराध्य वृक्ष : खैर (कात)
राशी व्याप्ती : २ चरण वृषभ राशीमध्ये,
बाकीचे २ चरण मिथुन राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी :सर्प
नक्षत्र तत्व: वायु
नक्षत्र स्वभाव: शुभ

वेद मंत्र

ॐ सोमधेनु गवं सोमाअवन्तुमाशु गवं सोमोवीर: कर्मणयन्ददाति
यदत्यविदध्य गवं सभेयम्पितृ श्रवणयोम । ॐ चन्द्रमसे नम: ।

पौराणिक मंत्र:

श्वेतवर्णाकृतीः सोमो व्दिभुजो वरदण्डभृत् lदशाश्वरथमारूढो मृगशिर्षोस्तु मे मुदे ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र :-
अ) ॐ चंद्रमसे नमःl
आ) ॐ सोमाय नमःl

नक्षत्र नाम मंत्र :- ॐ मृगशीर्षाय नमःl

६) आर्द्रा
नक्षत्र: आर्द्रा
नक्षत्र देवता : रुद्र (शिव)
नक्षत्र स्वामी : राहु
नक्षत्र आराध्य वृक्ष : कृष्णागरू,काला तेंदू
राशी व्याप्ती : ४ हि चरण मिथुन राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी : कुत्रा
नक्षत्र तत्व : जल
नक्षत्र स्वभाव : तीक्ष्ण

वेद मंत्र

ॐ नमस्ते रूद्र मन्यवSउतोत इषवे नम: बाहुभ्यां मुतते नम: ।
ॐ रुद्राय नम: ।

पौराणिक मंत्र:

रुद्र श्वेतो वृशारूढः श्वेतमाल्यश्चतुर्भुजःl
शूलखड्गाभयवरान्दधानो मे प्रसीदतु ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र:- ॐ रुद्राय नमः l

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ आर्द्रायै नमःl

७) पुनर्वसु
नक्षत्र: पुनर्वसु
नक्षत्र देवता: अदिती
नक्षत्र स्वामी: गुरू
नक्षत्र आराध्य वृक्ष :बांस / बांबू
राशी व्याप्ती: 3 चरणे मिथुन राशीमध्ये,
बाकीचे १ चरण कर्क राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी: मांजर
नक्षत्र तत्व: वायु
नक्षत्र स्वभाव: चर

वेद मंत्र

ॐ अदितिद्योरदितिरन्तरिक्षमदिति र्माता: स पिता स पुत्र:
विश्वेदेवा अदिति: पंचजना अदितिजातम अदितिर्रजनित्वम ।
ॐ आदित्याय नम: ।

पौराणिक मंत्र:

अदितीः पीतवर्णाश्च स्त्रुवाक्षकमण्डलून l
दधाना शुभदा मे स्यात पुनर्वसु कृतारव्या ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र :-
अ) ॐ आदित्यै नमःl
आ)ॐ आदितये नमःl

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ आर्द्रायै नमःl

८) पुष्य
नक्षत्र: पुष्य
नक्षत्र देवता: गुरु
नक्षत्र स्वामी: शनि
नक्षत्र आराध्य वृक्ष: पिंपळ, पीपल
राशी व्याप्ती :४ हि चरण कर्क राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी :बकरी
नक्षत्र तत्व :अग्नी
नक्षत्र स्वभाव:शुभ

वेद मंत्र

ॐ बृहस्पते अतियदर्यौ अर्हाद दुमद्विभाति क्रतमज्जनेषु ।
यददीदयच्छवस ॠतप्रजात तदस्मासु द्रविण धेहि चित्रम ।
ॐ बृहस्पतये नम:

पौराणिक मंत्र:

वंदे बृहस्पतिं पुष्यदेवता मानुशाकृतिम् l
सर्वाभरण संपन्नं देवमंत्रेण मादरात् ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र :- ॐ बृहस्पतये नमःl

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ पुष्याय नमःl

९) आश्लेषा
नक्षत्र:आश्लेषा
नक्षत्र देवता: सर्प
नक्षत्र स्वामी : बुध
नक्षत्र आराध्य वृक्ष: नागकेसर
राशी व्याप्ती :४ हि चरण कर्क राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी : मांजर
नक्षत्र तत्व : जल
नक्षत्र स्वभाव: तीक्ष्ण,शोक

वेद मंत्र
ॐ नमोSस्तु सर्पेभ्योये के च पृथ्विमनु:।
ये अन्तरिक्षे यो देवितेभ्य: सर्पेभ्यो नम: ।
ॐ सर्पेभ्यो नम:।

पौराणिक मंत्र:
सर्पोरक्त स्त्रिनेत्रश्च फलकासिकरद्वयःl
आश्लेषा देवता पितांबरधृग्वरदो स्तुमे ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र:- ॐ सर्पेभ्यो नमःl

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ आश्लेषायै नमःl

१०) मघा
नक्षत्र: मघा
नक्षत्र देवता: पितर
नक्षत्र स्वामी: केतु
नक्षत्र आराध्य वृक्ष: बरगद
राशी व्याप्ती : ४ हि चरण सिंह राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी: उंदीर
नक्षत्र तत्व: अग्नी
नक्षत्र स्वभाव :क्रुर, उग्र

वेद मंत्र

ॐ पितृभ्य: स्वधायिभ्य स्वाधानम: पितामहेभ्य: स्वधायिभ्य: स्वधानम: ।
प्रपितामहेभ्य स्वधायिभ्य स्वधानम: अक्षन्न पितरोSमीमदन्त:
पितरोतितृपन्त पितर:शुन्धव्म । ॐ पितरेभ्ये नम: ।

पौराणिक मंत्र :

पितरः पिण्डह्स्ताश्च कृशाधूम्रा पवित्रिणःl
कुशलं द्घुरस्माकं मघा नक्षत्र देवताःll

नक्षत्र देवता नाममंत्र:- ॐ पितृभ्यो नमःl

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ मघायै नमः

११)पुर्वा (फाल्गुनी)
नक्षत्र: पुर्वा (फाल्गुनी)
नक्षत्र देवता : भग
नक्षत्र स्वामी : शुक्र
नक्षत्र आराध्य वृक्ष : पलाश (पळस)
राशी व्याप्ती : ४ हि चरण सिंह राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी:उंदीर
नक्षत्र तत्व: क्रुर
नक्षत्र स्वभाव : शुभ

वेद मंत्र

ॐ भगप्रणेतर्भगसत्यराधो भगे मां धियमुदवाददन्न: ।
भगप्रजाननाय गोभिरश्वैर्भगप्रणेतृभिर्नुवन्त: स्याम: ।
ॐ भगाय नम: ।

पौराणिक मंत्र:

भगं रथवरारुढं व्दिभुंज शंखचक्रकम् l
फाल्गुनीदेवतां ध्यायेत् भक्ताभीष्टवरप्रदाम् ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र:- ॐ भगाय नमःl

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ पुर्व फाल्गुनीभ्यां नमःl

१२) उत्तरा (फाल्गुनी)
नक्षत्र:उत्तरा (फाल्गुनी)
नक्षत्र देवता : अर्यमा
नक्षत्र स्वामी: रवि
नक्षत्र आराध्य वृक्ष पाकड़
राशी व्याप्ती १ ले चरण सिंह राशीमध्ये,
बाकीचे ३ चरण कन्या राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी: गाय
नक्षत्र तत्व :वायु
नक्षत्र स्वभाव: शुभ

वेद मंत्र

ॐ दैव्या वद्धर्व्यू च आगत गवं रथेन सूर्य्यतव्चा ।
मध्वायज्ञ गवं समञ्जायतं प्रत्नया यं वेनश्चित्रं देवानाम ।
ॐ अर्यमणे नम: ।

पौराणिक मंत्र:

संपूजयाम्यर्यमणं फाल्गुनी तार देवताम् l
धुम्रवर्णं रथारुढं सुशक्तिकरसंयुतम् ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र :- ॐ अर्यम्ने नमः

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ उत्तरा फाल्गुनीभ्यां नमःl

१३) हस्त
नक्षत्र :हस्त
नक्षत्र देवता : सुर्य
नक्षत्र स्वामी : चंद्र
नक्षत्र आराध्य वृक्ष : ,चमेली रीठा
राशी व्याप्ती :४ हि चरण कन्या राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी : म्हैस
नक्षत्र तत्व : वायु
नक्षत्र स्वभाव: शुभ, सत्वगुणी

वेद मंत्र

ॐ विभ्राडवृहन्पिवतु सोम्यं मध्वार्य्युदधज्ञ पत्त व विहुतम
वातजूतोयो अभि रक्षतित्मना प्रजा पुपोष: पुरुधाविराजति ।
ॐ सावित्रे नम: ।

पौराणिक मंत्र:

सवितारहं वंदे सप्ताश्चरथ वाहनम् l
पद्मासनस्थं छायेशं हस्तनक्षत्रदेवताम् ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र :- ॐ सवित्रे नमःl

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ हस्ताय नमः

१४) चित्रा
नक्षत्र : चित्रा
नक्षत्र देवता: त्वष्टा
नक्षत्र स्वामी: मंगळ
नक्षत्र आराध्य वृक्ष: बेल
राशी व्याप्ती : २ चरण कन्या राशीमध्ये,
बाकीचे, २ चरण तुळ राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी: वाघ
नक्षत्र तत्व : वायु
नक्षत्र स्वभाव: तीक्ष्ण

वेद मंत्र

ॐ त्वष्टातुरीयो अद्धुत इन्द्रागी पुष्टिवर्द्धनम ।
द्विपदापदाया: च्छ्न्द इन्द्रियमुक्षा गौत्र वयोदधु: ।
त्वष्द्रेनम: । ॐ विश्वकर्मणे नम: ।

पौराणिक मंत्र:

त्वष्टारं रथमारूढं चित्रानक्षत्रदेवताम् l
शंखचक्रान्वितकरं किरीटीनमहं भजे ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र:- ॐ त्वष्ट्रे नमःl

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ चित्रायै नमःl

१५) स्वाती
नक्षत्र :स्वाती
नक्षत्र देवता: वायु
नक्षत्र स्वामी : राहु
नक्षत्र आराध्य वृक्ष: अर्जुन
राशी व्याप्ती : ४ हि चरण तुळ राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी: म्हैस
नक्षत्र तत्व: अग्नी
नक्षत्र स्वभाव: शुभ

वेद मंत्र

ॐ वायरन्नरदि बुध: सुमेध श्वेत सिशिक्तिनो
युतामभि श्री तं वायवे सुमनसा वितस्थुर्विश्वेनर:
स्वपत्थ्या निचक्रु: । ॐ वायव नम: ।

पौराणिक मंत्र:

वायुवरं मृगारुढं स्वाती नक्षत्र देवताम् l
खड्.ग चर्मोज्वल करं धुम्रवर्ण नमाम्यह्म् ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र:- ॐ वायवे नमःl

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ स्वात्यै नमःl

१६) विशाखा
नक्षत्रः विशाखा
नक्षत्र देवता : इंद्राग्नी
नक्षत्र स्वामी : गुरू
नक्षत्र आराध्य वृक्ष:  कटाई, नागकेशर
राशी व्याप्ती : पहिले 3 चरण तुळ राशीमध्ये,
बाकीचे १ चरण वृश्चिक राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी : वाघ
नक्षत्र तत्व : वायु
नक्षत्र स्वभाव: अशुभ

वेद मंत्र

ॐ इन्द्रान्गी आगत गवं सुतं गार्भिर्नमो वरेण्यम ।
अस्य पात घियोषिता । ॐ इन्द्रान्गीभ्यां नम: ।

पौराणिक मंत्र:
इंद्राग्नीशुभदौ स्यातां विशाखा देवतेशुभे l
नमोम्ये करथारुढौ वराभयकरांबुजौ l

नक्षत्र देवता नाममंत्र:- ॐ इंद्राग्नीभ्यां नमः

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ विशाखाभ्यां नमःl

१७) अनुराधा
नक्षत्र :अनुराधा
नक्षत्र देवता : मित्र
नक्षत्र स्वामी : शनि
नक्षत्र आराध्य वृक्ष :मौलश्री
राशी व्याप्ती : ४ हि चरण वृश्चिक राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी: हरीण
नक्षत्र तत्व: पृथ्वी
नक्षत्र स्वभाव: शुभ

वेद मंत्र

ॐ नमो मित्रस्यवरुणस्य चक्षसे महो देवाय तदृत
गवं सपर्यत दूरंदृशे देव जाताय केतवे दिवस्पुत्राय सूर्योयश
गवं सत । ॐ मित्राय नम: ।

पौराणिक मंत्र:

मित्रं पद्मासनारूढं अनुराधेश्वरं भजे l
शूलां कुशलसद्भाहुं युग्मंशोणितवर्णकम् ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र:- ॐ मित्राय नमः l

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ अनुराधाभ्यो नमःl

१८) जेष्ठा
नक्षत्र: जेष्ठा
नक्षत्र देवता: इंद्र
नक्षत्र स्वामी :बुध
नक्षत्र आराध्य वृक्ष: निर्गुडी/चीड़
राशी व्याप्ती : ४ हि चरण वृश्चिक राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी: हरीण
नक्षत्र तत्व: पृथ्वी
नक्षत्र स्वभाव: तीक्ष्ण

वेद मंत्र

ॐ त्राताभिंद्रमबितारमिंद्र गवं हवेसुहव गवं शूरमिंद्रम वहयामि शक्रं
पुरुहूतभिंद्र गवं स्वास्ति नो मधवा धात्विन्द्र: । ॐ इन्द्राय नम: ।

पौराणिक मंत्र:

श्वेतहस्तिनमारूढं वज्रांकुशलरत्करम् l
सहस्त्रनेत्रं पीताभं इंद्रं ह्रदि विभावये ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र:- ॐ इंद्राय नमःl

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ जेष्ठायै नमःl

१९) मूळ
नक्षत्र:मूळ
नक्षत्र देवता: निॠति (राक्षस)
नक्षत्र स्वामी: केतु
नक्षत्र आराध्य वृक्ष : साल
राशी व्याप्ती : ४ हि चरण धनु राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी: कुत्रा
नक्षत्र तत्व : जल
नक्षत्र स्वभाव: तीक्ष्ण

वेद मंत्र

ॐ मातेवपुत्रम पृथिवी पुरीष्यमग्नि गवं स्वयोनावभारुषा तां
विश्वेदैवॠतुभि: संविदान: प्रजापति विश्वकर्मा विमुञ्च्त ।
ॐ निॠतये नम: ।

पौराणिक मंत्र: खड्.गखेटधरं कृष्णं यातुधानं नृवाहनम् l
अर्ध्वकेशं विरुपाक्षं भजे मुलाधिदेवताम् ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र:- ॐ निॠतये नमः l

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ मुलाय नमःl

२०) पूर्वाषाढा
नक्षत्र: पूर्वाषाढा
नक्षत्र देवता: जल/ उदक
नक्षत्र स्वामी: शुक्र
नक्षत्र आराध्य वृक्ष: वेत
राशी व्याप्ती : ४ हि चरण धनु राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी:वानर
नक्षत्र तत्व: जल
नक्षत्र स्वभाव: उग्र

वेद मंत्र

ॐ अपाघ मम कील्वषम पकृल्यामपोरप: अपामार्गत्वमस्मद
यदु: स्वपन्य-सुव: । ॐ अदुभ्यो नम: ।

पौराणिक मंत्र:

आषाढदेवता नित्यमापः सन्तु शुभावहाःl
समुद्र गास्तरा गिणोल्हादिन्यःसर्वदेहिनाम्ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र:- ॐ अद्भयो नमःl

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ पूर्वाषाढाभ्यां नमःl

२१) उत्तराषाढा
नक्षत्र: उत्तराषाढा
नक्षत्र देवता: विश्वदेव
नक्षत्र स्वामी: रवि
नक्षत्र आराध्य वृक्ष :फणस, कटहल
राशी व्याप्ती : पहिले चरण धनु राशीमध्ये,
बाकीचे ३ चरण मकर राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी: मुंगुस
नक्षत्र तत्व: पृथ्वी
नक्षत्र स्वभाव: स्थिर

वेद मंत्र
ॐ विश्वे अद्य मरुत विश्वSउतो विश्वे भवत्यग्नय: समिद्धा:
विश्वेनोदेवा अवसागमन्तु विश्वेमस्तु द्रविणं बाजो अस्मै ।

पौराणिक मंत्र:

विश्वांदेवान् अहं वंदेषाढनक्षत्रदेवताम् l
श्रीपुष्टिकीर्तीधीदात्री सर्वपापानुमुक्तये ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र:- ॐ विश्वेभ्यो देवेभ्यो नमः l

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ उत्तराषाढाभ्यां नमःl

२२) श्रवण
नक्षत्र: श्रवण
नक्षत्र देवता: विष्णु
नक्षत्र स्वामी: चंद्र
नक्षत्र आराध्य वृक्ष: रुई ( अर्क ) मंदार
राशी व्याप्ती : ४ हि चरण मकर राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी: वानर
नक्षत्र तत्व: पृथ्वी
नक्षत्र स्वभाव: चर

वेद मंत्र

ॐ विष्णोरराटमसि विष्णो श्नपत्रेस्थो विष्णो स्युरसिविष्णो
धुर्वोसि वैष्णवमसि विष्नवेत्वा । ॐ विष्णवे नम: ।

पौराणिक मंत्र:

शांताकारं चतुर्हस्तं श्रोणा नक्षत्रवल्लभम् l
विष्णु कमलपत्राक्षं ध्यायेद् गरुड वाहन् ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र:- ॐ विष्णवे नमः l

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ श्रवणाय नमःl

२३) धनिष्ठा
नक्षत्र: धनिष्ठा
नक्षत्र देवता :वसु
नक्षत्र स्वामी: मंगळ
नक्षत्र आराध्य वृक्ष: शमी
राशी व्याप्ती: पहिले २ चरण मकर राशीमध्ये,
बाकीचे २ चरण कुंभ राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी: सिंह
नक्षत्र तत्व: पृथ्वी
नक्षत्र स्वभाव: थोडेसे शुभ

वेद मंत्र

ॐ वसो:पवित्रमसि शतधारंवसो: पवित्रमसि सहत्रधारम ।
देवस्त्वासविता पुनातुवसो: पवित्रेणशतधारेण सुप्वाकामधुक्ष: ।
ॐ वसुभ्यो नम: ।

पौराणिक मंत्र

श्राविष्ठादेवतां वंदे वसुन्वरधराश्रिताम् l
शंखचक्रांकितरांकिरीटांकित मस्तकाम् ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र:- ॐ वसुभ्यो नमःl

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ धनिष्ठायै नमःl

२४) शतभिषा
नक्षत्र: शतभिषा
नक्षत्र देवता: वरुण
नक्षत्र स्वामी: राहु
नक्षत्र आराध्य वृक्ष :कदंब
राशी व्याप्ती : ४ हि चरण कुंभ राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी: घोडा
नक्षत्र तत्व: जल
नक्षत्र स्वभाव: चर

वेद मंत्र

ॐ वरुणस्योत्त्मभनमसिवरुणस्यस्कुं मसर्जनी स्थो वरुणस्य
ॠतसदन्य सि वरुण स्यॠतमदन ससि वरुणस्यॠतसदनमसि ।
ॐ वरुणाय नम: ।

पौराणिक मंत्र:

वरुणं सततं वंदे सुधाकलश धारीणम् l
पाशहस्तं शतभिशग् देवतां देववंदीतम ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र:- ॐ वरुणाय नमः

नक्षत्र नाम मंत्र :- ॐ शतभिषजे नमः

२५) पुर्वाभाद्रपदा
नक्षत्र: पुर्वाभाद्रपदा
नक्षत्र देवता: अजैक चरण
नक्षत्र स्वामी: गुरू
नक्षत्र आराध्य वृक्ष: आंबा, आम
राशी व्याप्ती : पहिले ३ चरण कुंभ राशीमध्ये,
बाकीचे १ चरण मीन राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी :सिंह
नक्षत्र तत्व: अग्नी
नक्षत्र स्वभाव: उग्र

वेद मंत्र

ॐ उतनाहिर्वुधन्य: श्रृणोत्वज एकपापृथिवी समुद्र: विश्वेदेवा
ॠता वृधो हुवाना स्तुतामंत्रा कविशस्ता अवन्तु ।
ॐ अजैकपदे नम:।

पौराणिक मंत्र:

शिरसा महजं वंदे ध्येकपादं तमोपहम् l
मुदे प्रोष्ठपदेवानं सर्वदेवनमस्कृतम् ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र :-
ॐ अजैकपदे नमःl

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ पुर्वाप्रोष्ठपद्भ्यां नमःl

२६) उत्तराभाद्रपदा
नक्षत्र : उत्तराभाद्रपदा
नक्षत्र देवता : अहिर्बुंधन्य
नक्षत्र स्वामी: शनि
नक्षत्र आराध्य वृक्ष:नीम
राशी व्याप्ती : ४ ही चरण मीन राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी: गायक
नक्षत्र तत्व : जल
नक्षत्र स्वभाव : ध्रुव

वेद मंत्र

ॐ शिवोनामासिस्वधितिस्तो पिता नमस्तेSस्तुमामाहि गवं सो
निर्वत्तयाम्यायुषेSत्राद्याय प्रजननायर रायपोषाय ( सुप्रजास्वाय ) ।

पौराणिक मंत्र:

अहिर्मे बुध्नियो भूयात मुदे प्रोष्ठ पदेश्वरःl
शंखचक्रांकीतकरः किरीटोज्वलमौलिमान् ll

नक्षत्र देवता नाममंत्र:- ॐ अहिर्बुंधन्याय नमःl

नक्षत्र नाम मंत्र:- ॐ उत्तरप्रोष्ठपदभ्यां नमःl

२७) रेवती
नक्षत्र : रेवती
नक्षत्र देवता :पूषा
नक्षत्र स्वामी :बुध
नक्षत्र आराध्य वृक्ष: महुआ
राशी व्याप्ती : ४ ही चरण मीन राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी : हत्ती
नक्षत्र तत्व: जल
नक्षत्र स्वभाव: मृदु

वेद मंत्र
ॐ पूषन तव व्रते वय नरिषेभ्य कदाचन ।
स्तोतारस्तेइहस्मसि । ॐ पूषणे नम: ।

पौराणिक मंत्र नमःl
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