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Monday, April 29, 2019

नवग्रहो को अपने अनुकुल बनाने के कुछ उपाय-*

*नवग्रहो को अपने अनुकुल बनाने के कुछ उपाय-*

सूर्य को अनुकुल बनाने के उपाय- अपने पिता एवँ पिता तुल्य जनोँ का मान-सम्मान करे। अहोरात्र(24घण्टे) मे से अपना कुछ समय उनको जरुर दे। उन्के पास बैठे, उनकी बातो से अपनी समस्याओँ का समाधान निकाले। ताम्बे के पात्र से पानी पिये। अपने समुदाय के प्रति सजग बने। अगर हो सके तो रविवार को एक पाठ “आदित्यह्रदय स्तोत्र” का जरुर करे। 100% सूर्य का अच्छा प्रभाव मिलेगा।
चंद्र को अनुकुल बनाने के उपाय- अपनी माता एवँ माता तुल्य स्त्रियोँ को खुश रखे। उनका आदरभाव करे। कुछ समय उनके पास बैठे। जो समस्या उनको बताने लायक हो उसके बारे मे उन से चर्चा करेँ अन्यथा उनकी बातो से अपनी समस्या का समाधान खुद निकाले। सुबह चाय या काफी लेने से पहले आधा कप या एक चम्मच गाय कच्चा दुध जरुर पीये। हो सके तो चांदी धातु शरीर पर जरुर धारण करे। शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेके कृष्ण पक्ष कि सप्तमी तक रात्रि मे चंद्रमा को अर्घ जरुर दे। मानसिक शांति के लिए Meditation जरुर करे।
मंगल को अनुकुल बनाने के उपाय- अपने भाईयोँ से मिलकर रहेँ। दिन मे नही तो रात्रि मे अपने भाईयोँ के साथ भोजन करे। किसी संकट मे आये व्यक्ति कि मदद करेँ। शारीरिक क्षमता के अनुसार रक्त का दान करेँ। किसी समझदार व्यक्ति की राय से काम करे। अन्य व्यक्ति की प्रतिष्ठा ध्यान रखे। नित्य दुध जरुर पीयेँ। घर के अग्नि स्थान(रसोई) को साफ रखे। हनुमान जी उपासना करे।
बुध को अनुकुल बनाने के उपाय – अपने मित्र ओर पडोसी से अच्छे सम्बंध रखे। अपनी क्षमता के अनुसार उनकी मदद करेँ। असहाय ओर निर्धन, गरीब व्यक्तियो कि मदद करे। नपुँसक जनो को कैसे भी(मन,कर्म,वचन) ठैस ना पहुंचाये। 1 वर्ष मे एक पेड जरुर लगाये। पशुओ को हरित घास जरुर खिलायेँ। गणेश जी की उपसान करे। हो सके तो बुधवार को गणेश अथर्वशीष का पाठ जरुर करे।
गुरु को अनुकुल बनाने के उपाय – अपने गुरु तथा अपने से बडे जनो के प्रति आदर भाव रखे। आस्तिक बने। मंदिर जरुर जाये। अपने ओर अन्य धर्मो के प्रति सद्भाभावना रखे। अपने परिवार के साथ तीर्थ स्थलो मे जायेँ। गरीब बच्चो को पठन-पाठन के लिए मदद करेँ। नित्य अपने गुरु मंत्र का जाप जरुर करेँ।
शुक्र को अनुकुल बनाने के उपाय – अपने परिवार कि तथा अन्य समुदाय कि स्त्रियोँ कि मदद करेँ। कुँवारी कन्या कि मदद करे। स्त्रियोँ के प्रति अच्छे विचार रखे। अपनी धर्म पत्नी के अलावा अन्य स्त्रियोँ को माता, बहन एवँ बेटी का दर्जा दे। नित्य संगीत जरुर सुने। अंधे व्यक्ति कि मदद करेँ। दोपहर के भोजन दही जरुर ग्रहण करे। अपने कुल-देवी की उपासना करे।
शनि को अनुकुल बनाने कि उपाय – अपने से निम्न(छोटे) वर्ग के जनो कि मदद करेँ। नोकर या अपने आस-पास के निन्म वर्गो के जनो कि मदद करे। घर के बुजुर्ग जनो को खुश रखे। दिन का कुछ समय उनके साथ जरुर बितायेँ। दिव्यांग जनो की मदद करे। हो सके तो शनिवार को पीपल के निचे तेल का दिपक जरुर करे।
राहु एवँ केतु को अनुकुल बनाने के उपाय – अपने आस-पास साफ-सफाई रखे। गलत संगत से बचे। किसी भी प्रकार का नशा ना करेँ। सभी धर्मो के जनोँ कि मदद करेँ। नशा करने वाले व्यक्तियो को नशा ना करने की सलाह देँ। पशु-पक्षियोँ पर दया भाव रखे। रात को जल्दी सोने का प्रयत्न करे। शिव जी की उपासना करे। अपने कुलदेवी देवाताओ कि उपासना करे। अपने हर कार्य के लिए नियमित बनेँ। अपनी वस्तुओँ को उनकी जगह पर हि रखेँ।

          

Saturday, January 12, 2019

ज्योतिष में बुध और जातक mercury and other planets conjoin astrology

ज्योतिष में बुध और जातक ================= बुध दिमाग है, चालाकी है, चतुराई है, पैसा है, सामाजिक तालमेल है, गणितबाज़ी है, वाणी है, घुटन देने वाला ज़हर है, शरीर को सुखा देने वाला है, कमज़ोर कर देने वाला है और वित्त मंत्री है | कुण्डली में जब बुध शत्रु ग्रह या उनकी राशी ( सुर्य, चन्द्रमा, ब्रहसपति, मंगल ) में होता है तो जातक को दिक्कत देता है, बेवझा धन हानि या फ़िर ओवर कान्फ़िडेन्स के कारण जातक को नुकसान होता है |

जब बुध सुर्य के साथ होता है तो जातक को जलदी सफ़लता देता है, खास कर 21-22 से ही जातक किसी ना किसी रूप में धन कमाना शुरु कर देता है,लेकिन उसके बाद जब जातक को लगे कि सब कुछ सैट है, जहाँ पर जातक रिसक लेता है लालच करता है, 30-32 तक पहुँच कर जातक को नीचे गिराना शुरु कर देता है |

जब कुण्डली में बुध चन्द्रमा के साथ होता है, तो भी धन तो देता है लेकिन रिश्ते के मामले में धोखा देता है, कम उम्र में ही जातक के चरित्र का पतन होना शुरू हो जाता है, जातक प्रेम सम्बन्ध की तरफ़ और खुद की खुबसुरती की तरफ़ ज़्यादा ध्यान देने लग जाता है और पढाई से जातक का मन भटक जाता है, हर समय जातक के मन में कोई ना कोई फ़ितूर चलता रहता है, जातक कभी शान्त नहीं रह पाता |

कुण्डली में जब मंगल बुध के साथ होता है तो यही बुध जातक के जोश, जुनुन और जुररत को बांध देता है, जातक के दोस्त ही उसके सामने उसका उपहास करते हैं और जातक को इस मानहानी के घूट पीने पडते हैं, वह अन्दर ही अन्दर घुटता रहता है | और यही बुध मंगल के कारण ही जातक का शरीर कमज़ोर होता है, पतला होता है, जातक में खून की कमी या फ़िर हृदय से सम्बन्ध रोग होते हैं, हर छोटी छोटी बात पर जातक घबराता है, एग्ज़ेम है उस से पहले जातक का मन घबराता है, कोई इन्ट्रवियु है उस से पहले जातक को घबराहट शुरु हो जाती है, कलास में प्रिंसिपल ने आना है ये सुन कर ही जातक घबरा जाता है |

और जब कुण्डली में बुध ब्रहसपति के साथ होता है, तो जातक अपने ही बडो का सम्मान नहीं करता, जातक एक अच्छा शिष्य नही बन सकता क्युकि वो चीज़ो को बारीकी से समझने की कोशिश नहीं करता | जातक को अपने ही माता पिता की सलाह पर चलना पसंद नहीं होता, हालकि माता पिता से सम्बन्ध अच्छे रहते हैं लेकिन कुछ ना कुछ वैचारिक मत भेद चलते रहते हैं | जातक का अपने ही पिता के साथ दोस्ताना सम्बन्ध नहीं होता, जातक अपने पिता के साथ फ़ुरसत के पल नहीं बिता सकता, जातक अपने ही पिता के साथ खरीदारी करने नही जा सकता, और अगर कर भी आये तो घर आकर बहस और नोक झोक शुरु हो जाती है | ऐसा बुध कभी भी जातक को बडो के सानिधय में रहने नहीं देता, जातक को उस के टीचर्स से बात चीत करने नहीं देगा, टीचर्स से सवाल करने नहीं देगा, चीज़ो को समझने नहीं देगा, सिर्फ़ किताबी रट्टा मारने की आदत बना देता है | जातक खुद को दूसरो से ज़्यादा बुद्धीमान और चतुर समझने लगता है | और जातक धर्म से विमुख होता चला जाता है, संस्कार और रिवाजो से दूर होता चला जाता है | और एक समय ऐसा आ जाता है कि जातक के पास धन तो होता है लेकिन रिश्ते नहीं होते, रिश्तो का सुख नहीं होता | जातक के खुद बच्चे उस का बुढापे में साथ नहीं देते उसका हाल नहीं पुछते |

Wednesday, December 26, 2018

अंगारक योग ANGARAK YOG RAHU + MARS IN DIFFERENT HOUSES

🏵️ ।। अंगारक योग   ।।🏵️  

यदि जन्मकुंडली में मंगल और राहु एक साथ हो अर्थात कुंडली में मंगल राहु का योग हो तो उसे "अंगारक" योग कहते हैं । अगर ये योग बन रहा हो तो सर्वप्रथम तो कुंडली के जिस भी भाव में यह योग बने उस भाव और जिन भावों पर राहु व मंगल की द्रष्टी हो उन भावों को पीड़ित कर देता है और उन भावों से नियंत्रित होने वाले पहलुओं में संघर्ष बने रहते हैं।

कुंडली के 12 भाव में अंगारक योग से होने वाला प्रभाव :-

1-प्रथम भाव में अंगारक योग होने से पेट व लीवर रोग, माथे पर चोट, अस्थिर मानसिकता, क्रूरता और निजी भावनाओं की असंतुष्टि देता है।

2-द्वितीय भाव में अंगारक योग होने से धन में उतार-चढ़ाव, तंगहाली, वाणी-दोष, कुटंभियों से विवाद व सक्की मिजाज बनाता है।

3-तृतीय भाव में अंगारक योग होने से भाई-बहनों-मित्रों से कटु संबंध, वटवारा, अति उत्साही, एवं नास्तिक छल-कपट से सफल होते है।

4-चतुर्थ भाव में अंगारक योग होने से माता को दुख, अशान्ती, क्लेश, मकान में बाधाऐं व भूमि संबंधित विवाद होते हैं।

5-पंचम भाव में अंगारक योग होने से संतानहीनता, संतान से असंतुष्ट, नाजायज प्रेम संबंधों से परेशानी व जुए-सट्टे से लाभ भी हो सकता है।

6-छटम भाव में अंगारक योग होने से कर्जदार, ऋण लेकर उन्नति करने वाला, शत्रुहंता, व्यक्ति खूनी, उग्र परंतु "डा. सर्जन" भी बन सकता है।

7-सप्तम भाव में अंगारक योग होने से दुखी-विवादित वैवाहिक जीवन, नाजायज संबंध, हिंसक जीवन साथी, कामातुर, विधवा या विधुर होना परंतु सांझेदारी में धोका भी मिल सकता है।

8-अष्टम भाव में अंगारक योग होने से  आरोप-अपमान, धन-हानि, घुटनों से नीचे दर्द रहना, चोटें लगना, सड़क दुर्घटनाऐं के प्रबल योग बनते हैं। परंतु पैत्रिक संपती मिलने और लुटाने के प्रवल योग भी बनते हैं।

9-नवम भाव में अंगारक योग होने से उच्च शिक्षा में बाधाऐ, भाग्यहीन, वहमी, रूढ़ीवादी व तंत्रमंत्र में लिप्त, पित्र-श्रापित, संतान से पीडित होते हैं। तथा बहुत ही परेशानियों का सामना करते हैं।

10-दशम भाव में अंगारक योग होने से परंपराओं को तोडने वाले, पित्र संमत्ती से बंचित, माता-पिता की भावनाओं को आहत करने वाले परंतु ऐसे व्यक्ति अति कर्मठ, अधिकारी, मेहनतकश, स्पोर्टमेन व आत्यधिक सफल हो सकते है।

11-एकादश भाव में अंगारक योग होने से, गर्भपात, संतान में विकलांगता, अनैतिक आय, व्यक्ति चोर, धोखेबाज़ होते हैं। पंरंतु प्रापर्टी से लाभ हो सकता है।

12-द्वादश भाव में अंगारक योग होने से अपराधी प्रवृत्ति, वलात्कारी, जबरन हक जमाने वाले और अहंकारी हो सकते हैं। परंतु आयात-निर्यात, विदेशी व्यापार एवं  रिश्वतख़ोरी से लाभ प्राप्त होता है ।

Thursday, January 18, 2018

ग्रहों की नाराजगी दूर करें - making planets work in your favour

ग्रहों की नाराजगी दूर करें -
1-सूर्य-(The Sun) भूल कर भी झूठ न
बोलें,सूर्य का गुस्सा कम हो जाएगा .झूठ क्या है ?झूठ वो है
जो अस्तित्व में नहीं है और यदि हम झूठ बोलेंगे
तो सूर्य को उसका अस्तित्व(Existence)
पैदा करना पडेगा (आश्चर्य की कोई बात
नहीं है -ये नौ ग्रह हमारे जीवन के
लिए ही अस्तित्व (existence)में आये हैं )सूर्य
का काम बढ़ जाएगा और मुश्किल भी हो जाएगा .
2-चंद्रमा (The Moon)-- जितना ज्यादा हो सके सफाई पसंद
हो जाईये ,और साफ़ रहिये भी -
चंद्रमा का गुस्सा कम हो जाएगा .
चंद्रमा को सबसे ज्यादा डर राहू से लगता है .राहू अदृश्य
ग्रह है ,राहू क्रूर
है .हमारी रोजमर्रा की ज़िंदगी में
राहू गंदगी है .हम हमारे घर को, आसपास के
वातावरण को कितना भी साफ़ करें -उसमें ढूँढने जायेंगे
तो गंदगी मिल
ही जायेगी ,या हम हमारे घर और
आस पास के वातावरण को कितना भी साफ़ रखें
वो गंदा हो ही जाएगा और हम सब जानते हैं
कि गंदगी कितनी खतरनाक
हो सकती है और होती है --
ज़िंदगी के लिए ,न जाने कितने बेक्टीरिया ,
वायरस ,जो अदृश्य होते हुए
भी हमारी ज़िंदगी को भयभीत
कर देते हैं ,बीमार
करके ,ज़िंदगी को खत्म तक कर देते
हैं ,चंद्रमा (जो सबके मन को आकर्षित करता है स्वय राहू के
मन को भी) राहू से डरता है .अतः यदि आप साफ़
रहेंगे तो चंद्रमा को अच्छा लगेगा और उसका क्रोध शांत रहेगा .
चंद्रमा का गुस्सा उतना ही कम हो जाएगा .
3-मंगल(Mars)-यह ग्रह सूर्य
का सेनापती ग्रह है भोजन में गुड है .सूर्य गेंहू
है रविवार को गेहूं के आटे का चूरमा गुड डालकर बनाकर खाएं
खिलाये ,मंगल को बहुत अच्छा लगेगा .सूर्य गेहूं है -मंगल गुड
है और घी चंद्रमा है ,अब तीनो प्रिय
मित्र हैं तो तीन मित्र मिलकर जब खुश होंगे
तो गुस्सा किसे याद रहेगा .
4-बुध (Mercury)-बुध ग्रह यदि आपकी जन्म
पत्रिका में क्रोधित है तो बस तुरंत मना लीजिये --
गाय को हरी घास खिलाकर -
धरती और गाय दोनों शुक्र (Venus)ग्रह
का प्रतिनिधित्व करती है .
हरी घास है जो बुध ग्रह का प्रतिनिधित्व
करती है -बुध ग्रह का रंग हरा है ,वो बच्चा है
नौ ग्रहों में शारीरिक रूप से सबसे कमजोर और
बौद्धिक रूप में सबसे आगे आगे .
घास है जो पृथ्वी के अन्य पेड़ पौधों के मुकाबले
कमजोर है बिलकुल बुध ग्रह की तरह , घास
भी शारीरिक रूप से बलवान
नहीं होती है मगर ताकत देने में कम
नहीं अतः बुध स्वरूप
ही है .हरी हरी घास से
सजी धरती कितनी सुंदर
और खुश दिखती है -घास =बुध और
धरती = शुक्र
इसी तरह गाय हरी -
हरी घास खा कर कितनी खुश
होती है
इसलिए - हरी- हरी घास =बुध ग्रह
और गाय (और धरती )= शुक्र
इसलिए गाय को हरी हरी घास खिलाएंगे
तो दो बहुत अच्छे दोस्तों को मिला रहे होंगे -
ऐसी हंसी खुशी के
वातावरण में हर कोई गुस्सा थूक देता है और बुध ग्रह
भी अपना क्रोध शांत कर लेंगे .
5-बृहस्पति (Jupiter)-चने की दाल parrots
को खिलादे .बृहस्पति कभी गुस्सा नहीं करेंगे.
चने की दाल पीले रंग
की होती है और
बृहस्पति भी पीले रंग के हैं .
बृहस्पति का भी घनत्व सौरमंडल में ज्यादा है और
चने की दाल
भी हलकी फुल्की नहीं होती पचाने
में हमारी आँतों को ज्यादा मेहनत
करनी पड़ती है .
तोता हरे रंग का होता है .बुध ग्रह भी हरे रंग
का होता है .
तोता भी दिन भर बोलता रहता है और बुध ग्रह
भी बच्चा होना के कारण बोलना पसंद करता है .
अतः तोता =बुध ग्रह
और चने की दाल = बृहस्पति ग्रह
बुध ग्रह बृहस्पति के जायज पुत्र और चंद्रमा के नाजायज
पुत्र है.
बुध के पिता बृहस्पति हैं और बृहस्पति के चंद्रमा अच्छे मित्र
हैं और बृहस्पति की पत्नी तारा ने
चंद्रमा से नाजायज शारीरिक सम्बन्ध बनाकर बुध
ग्रह को जन्म दिया था इस बात से
बृहस्पति अपनी पत्नी तारा से नाराज़
रहते है और बुध की माँ से नाराज़ रहने के कारण
अपने जायज पिता बृहस्पति से बुध ग्रह नाराज़ रहता है .इस
बात से बृहस्पति दुखी रहता है अतः जब
तोता जो बुध स्वरूप है जब चने की दाल खाकर पेट
भरेगा और खुश
होगा तो बृहस्पति को खुशी मिलेगी और
गुस्सा तो अपने आप कम हो जाएगा .
6-शुक्र(Venus) - यदि नाराज़ हो तो गाय
को रोटी खिलाओ .
सूर्य गेहूं है
और शुक्र गाय .
किस बलवान व्यक्ति को उसके खुद के अलावा कोई और
राजा हो तो अच्छा लगता है !
शुक्र को भी सूर्य के अधीन
रहना पसंद नहीं है अतः जब आप उसके शत्रु
सूर्य जो गेहूं को गाय जो शुक्र है को खिलाएंगे तो वो अपने आप
ही गुस्सा भूल जाएगा .
7-शनि(Saturn) -जिस किसी से
भी नाराज़
हो तो उसकी पीड़ा तो बस वो खुद
ही जानता है .
शनि समानतावादी है .The planet Saturn is
one and only real democrat in our Solar
System.He does not like Monarchy.
ये बड़ा है और ये छोटा है ऐसी बातें शनि को क्रोधित
कर देती है
क्योंकि शनि सूर्य (राजा ) का पुत्र है और उसके पिता सूर्य ने
उसकी माँ का सम्मान नहीं किया इसलिए
शनि को अपनी माँ छाया से प्यार होने के कारण सूर्य
पर बहुत गुस्सा आता है --किसी का बड़े होने
का अहंकार ज़रा भी नहीं भाता है .
अतः जो सर्वहारा वर्ग (मेहनतकश लोग )है उसको खुश
रखो तो शनि खुद ही खुश हो जाएगा .आपको उन्हें
दान नहीं देना है क्योंकि शनि श्रम
का पुजारी है .शनि ईमानदार है और मेहनतकश लोग
भी दान लेने के बजाय मेहनत कर के खुश रहते
हैं अतः किसी मेहनतकश की मेहनत
का तन ,मन और धन से उचित सम्मान करने से शनि खुश
हो जाता है और खुश हो जाएगा तो गुस्सा तो कम
हो ही जाएगा .
8-राहू -राहू के दिए दुःख गैबी होते हैं
(जिनका कारण समझ में ना आये ).
राहू स्वय अदृश्य रहता है .(अतः उसके दिए
दुखों को समझना भी मुश्किल है ).राहू एक
हिस्सा उसके शरीर का ऊपरी भाग
वो स्वय है और उसके नीचे का हिस्सा केतु है .
(समुद्र मंथन के समय छल से देवताओं का रूप धर अमृत
पीने जब वो आया तो विष्णु ने उसे पहचान लिया और
अपने सुदर्शन चक्र से उसके दो टुकड़े कर दिए (एक बूँद
अमृत उसके शरीर में
जा चुका था अतः उसकी मृत्यु
नहीं हुयी )ऊपर का हिस्सा राहू
कहलाया और नीचे का हिस्सा केतु )

Wednesday, October 21, 2015

मंगल मंत्रो के जाप से विशेष शुभ फल

मंगल मंत्रो के जाप से विशेष शुभ फल की प्राप्ति होती है ! मंगल ग्रह के वैदिक एवं पोराणिक तथा तांत्रिक मंत्रो में से किसी एक मंत्र का जाप करे जो की निम्नानुसार है !

वैदिक मंत्र:-

                          ॐ क्राम क्रीम क्रोम सः ॐ भूर्भुवः  स्वः  ॐ अग्निर्मुधा दिवः ककुत्पति: पृथिव्या अयं 

                          अपागु रेतागु सिजिंवती ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः क्रोम क्रीम क्राम ॐ भोमाय नमः 

उपरोक्त मंत्र सुख शांति के लिए जाप करे ! 

  

पोराणिक मंत्र:-

                                  

                                        धरणीगर्भ सम्भूतं विधुत्कान्ति-समप्रभम्म !
                                                  कुमारं शक्तिहस्तं च मंगल प्रन्माम्यहम !!

उपरोक्त मंत्र को सुख शांति के लिए जाप करे !

तांत्रिक मंत्र:-

                                   !! ॐ क्राम क्रीम क्रोम सः ॐ  भोमाय नमः  !!

उक्त मंत्र का जाप विवाह से संबधित विषय एवं धन संपत्ति इत्यादी के लिए करे !
 

जाप स्वयं करे, यदि संभव न हो सके तो योग्य ब्राह्मण द्वारा जाप करावे ! स्वयं जाप करते समय निम्न बातो का ध्यान रखे !

१.जाप प्रतिदिन  निर्धारित संख्या में करे !

२.जाप करने से पूर्व स्नान अवश्य करे !

३.जाप करने से पूर्व मस्तक पर लाल कुंकुम का तिलक अवश्य लगाये !

४.शुद्ध कम्बल अथवा कुशा  के आसन पर बैठ कर जाप करे !

५.मूंगे की माला से मंगल मंत्रो के जाप करे तो अति उत्तम होगा !

६.जाप के पूर्व मंगल यन्त्र का पूजन अवश्य करे एवं शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करे तथा यह दीपक जाप होने तक जलता रहे इस बात का ध्यान रखे!

७.जाप अवधि में मोन धारण रखे !

८.एकाग्र चित्त एवं विचार शुन्य होकर जाप करे ! (इसका धीरे धीरे ही अभ्यास होगा !)

उपरोक्त विधि अनुसार जाप करने से निश्चित रूप से लाभ प्राप्त होगा !