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Wednesday, July 06, 2022

सावन के आयुर्वेदिक नियम Do's and don't in monsoon

#सावन__के__आयुर्वेदिक__नियम
इस महीने में नहीं पीना चाहिए दूध, ये चीजें जरूर खाएं

तेज लू-लपट और झुलसा देने वाली तेज गर्मी के बाद बारिश का मौसम बहुत सुहाना लगता है। बारिश के मौसम की ठंडी हवाएं, फुहार और हरियाली माहौल खुशनुमा बना देती हैं। इस मौसम में बरसते पानी को देखते हुए पकौड़ों का लुत्फ उठाने का भी अपना मजा है।

👉🏽 #_आयुर्वेद के नजरिए से देखा जाए तो इस मौसम में जठराग्नि कमजोर रहती है और वात प्रकुपित रहता है। इसलिए आहार-विहार संबंधी नियमों का पालन भी जरूरी होता है। आइए, आज जानते हैं कि आयुर्वेद के अनुसार किन चीजों को सावन में खाना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए।
 
▪️ #_न_करें_दूध_का_सेवन - आयुर्वेदिक नियमों के अनुसार सावन के महीने में दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। आप सोच रहे होंगे कि भला दूध से क्या नुकसान हो सकता है। दरअसल, सावन में बारिश के कारण हरियाली ज्यादा होती है। मौसम परिवर्तन के कारण हरियाली में जहरीले कीड़ेे-मकोड़ों की भी अधिकता होती है।

सावन के महीने में दूध से बनी चीजों को भी सावन में खाने से मना किया जाता है। सावन के महीने में कच्चा दूध नहीं पीना चाहिए। कच्चा दूध पीने से पित्त और कफ की परेशानी हो सकती है।  

यही कारण है कि गाय या भैंस घास के साथ कई कीड़े-मकोड़ों को भी खा जाते  है। इसलिए दूध हानिकारक हो जाता है। इस समय में दूध के सेवन से वात बढ़ता है, जिसके कारण बीमार होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए सावन में दूध नहीं पीना चाहिए। इस कारण दूध गुणकारी कम और हानिकारक ज्यादा हो जाता है।

▪️ #_कच्ची_हरी_सब्जियों_से_दूर_रहें- सावन के महीने में हरी सब्जियों का सेवन वर्जित माना गया है। दरअसल, आयुर्वेद के अनुसार बारिश की हरी सब्जियों में बीमारी फैलाने वाले कीटाणु बहुत अधिक होते हैं। इससे पेट व त्वचा से संबंधित बीमारियां ज्यादा होती हैं। इस मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है। इसीलिए सावन में हरी सब्जियां नहीं खानी चाहिए।

▪️ #_बैंगन से करें तौबा - सावन के महीने में बैंगन भी नहीं खाना चाहिए। इसका वैज्ञानिक कारण यह है कि सावन में बैंगन में कीड़े अधिक लगते हैं। ऐसे में बैंगन का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। 

▪️ #_जरूर_खाएं ये चीजें- आयुर्वेद के अनुसार बारिश में सुपाच्य, ताजा, गर्म और जल्दी पचने वाली चीजें खानी चाहिए। इस मौसम में पुराना गेहूं, चावल, मक्का, सरसों, राई, खीरा, खिचड़ी, दही, मूंग, अरहर की दाल, सब्जियों में लौकी, तुरई, टमाटर। फलों में सेब, केला, अनार, नाशपाती, पके जामुन, देशी आम और घी व तेल में बनी नमकीन चीजें खानी चाहिए। इस मौसम में जामुन खाने के भी अनेक फायदे हैं। जामुन खाने से हीमोग्लोबिन बढ़ता है, त्वचा रोग, प्रमेह रोग आदि दूर रहते हैं। भुट्टों का सेवन भी स्वास्थ्य के लिए बेहतर होता है। वैज्ञानिक तौर पर सावन के महीने में सलाद का सेवन नहीं करना चाहिए। बारिश के मौसम में सब्जियों में बैक्टीरिया पैदा हो जाता है इसलिए कच्ची सब्जियों का खाना वर्जित होता है। खास तौर पर सावन के महीने में मशरुम का सेवन एकदम नहीं करना चाहिए।

▪️ #_सावन के महीने में तली और भुनी चीजें सेहत के लिए नुकसान दायक होती हैं। डॉक्टर कहते हैं कि ऐसी चीजें इस मौसम में खाने से पेट में सूजन आ जाती है और साथ ही पाचन क्रिया भी कमजोर हो जाती है।

Wednesday, May 04, 2022

पेट की गर्मी को करें ऐसे उदर शांत अपनावे ये घरेलू उपाय_*

*☘️ *_पहचाने अपनी पेट की गर्मी को करें ऐसे उदर शांत  अपनावे ये घरेलू उपाय_*

पेट के रोग और पेट की गर्मी

*हमारे पेट में गर्मी हो रही है, इस बात पता ऐसे लगाएं*

छाती या सीने में जलन होना
सांस लेने में तकलीफ होना
मुंह में खट्टा पानी और खट्टी डकारें आना
घबराहट और उल्टी जैसा महसूस होना
पेट में  जलन और दर्द होना
गले में जलन होना
पेट का फूल जाना (पेट में अफ़ारा होना)
कब्ज होना
सिर दर्द होना
पेट में गैस का बनना

 *पेट को ठंडा रखने के लिए क्या खाएं?*

पेट को ठंडा रखने के लिए हमें सबसे पहले अपने खान-पान के तरीकों में बदलाव लाना होगा. 

*पेट को ठंडा रखने के लिए करें ये उपाय:*

1. केला खाएं:
पेट की गर्मी को शांत करके उसे ठंडा रखने में केला बहुत मदद करता है. केले के पोटेशियम की मात्रा पेट में बनने वाले एसिड को नियंत्रित करती है और केले का पी एच तत्व  एसिड को कम करता है. साथ ही केला, पेट में एक चिकनी पर्त बना देता है जिससे एसिडिटी में कमी आती है. केले का फाइबर पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखता है.

 2. तुलसी के पत्तों का सेवन:
तुलसी के पत्तों का सेवन करने से पेट में पानी की मात्रा बढ़ जाती है जिससे पेट के अतिरिक्त ऐसिड में कमी आती है. इसे खाने से मिर्च-मसाले वाला खाना भी सरलता से पच जाता है. रोज खाने के बाद पाँच-छह तुलसी के पत्ते खाने से एसिडिटी नहीं होती है.

 3. ठंडा दूध पियें:
दूध का कैल्शियम, पेट के एसिड को एब्जॉर्ब करके उसे बहुत आसानी से ख़त्म कर देता है. रोज सुबह एक कप ठंडा दूध पेट को ठंडा रखने का रामबाण इलाज है.

 4. सौंफ खाएं:
खाना खाने के बाद सौंफ का सेवन इसलिए अच्छा माना जाता है क्योंकि सौंफ की तासीर ठंडी होती है जो पेट की जलन और गरमी को शांत करती है. इसलिए अगर एसिडिटी की शिकायत ज्यादा हो तो सौंफ को पानी में उबालकर उसका सेवन करें.

Monday, June 29, 2020

Ayurveda tips for Teeth & Gums to be healthy shiny

जाने दांतो का इलाज करने वाले आयुर्वेदिक दंतमंजन के बारे में, जिन्हें आप खुद अपने घर पर ही बना सकते हो।
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सेंधा नमक
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 पिसा हुआ सेंधा नमक को दांतों पर मलते रहने से दांत जड़ों से मजबूत होते हैं। सेंधा नमक दांतों में जमी गंदगी को दूर करता है साथ ही कैमिकल रूप से जमें हुए एसिड़ को भी खत्म करता है।

नींबू का मंजन बनाने का तरीका
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नींबू को आप छाया में सुखा लें फिर इन्हें कूट लें और पाउडर तैयार करें। इस पाउडर को आप दांतों पर मंजन करें। यह दांतों को मोती जैसी चमक दिलवाता है।

बादाम का मंजन कैसे बनाएं
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बादामों के छिलकों को जलाकर उन्हें पीस लें और उसमें थोड़ा सेंधा नमक डालकर मंजन बना लें। इस मंजन के प्रयोग से दांतों की चमक बढ़ती है।

आम का पत्तों का मंजन
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आम के ताजे पत्तों को चबा-चबा कर खाएं और थूकते रहें। नियमित रूप से कुछ दिनों तक करते रहने से दांत जड़ से मजबूत हो जाते है। यदि आम के पत्तों को छांव में सुखाकर उन्हें जला लें फिर उसका चूर्ण बनाकर दांतों पर लगाने से दांतों की उम्र लंबी होती है।

 बेकिंग सोडा
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सेंधा नमक, बेकिंग सोडा, सिरका के साथ फिटकरी को मिला कर दांतों पर मंजन के तौर पर प्रयोग करें।

नारियल का तेल
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कुल्ला तेल से करें यह प्राचीन समय का नुस्खा है जो दांतों की गंदगी को दूर करता है। नारियल तेल से कुल्ला करने से दांत साफ होते हैं।
कुछ देर तक कुल्ला करने के बाद दांतों को मुलायाम और सूखे ब्रश से दांतों को साफ करना चाहिए।

प्राकृतिक तेल का प्रयोग
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दांतों के लिए पुदीने का तेल, दालचीनी का तेल, लौंग का तेल आदि एंटीबैक्टीरियल हैं जिनका इस्तेमाल दांतों की सफाई के रूप में किया जा सकता है।

सरसों का तेल
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दांतों को जड़ से मजबूत करने में सरसों का तेल का प्रयोग करना चाहिए यह भी एक प्राचीन उपाय है। सरसों के तेल में नमक, हल्दी को मिलाकर डेली दांत मांजने चाहिए।

मिट्टी का प्रयोग
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चिकनी मिट्टी को रात को पानी में भिगो कर रखें और सुबह और शाम मसूड़ों पर लगाते रहने से थोड़े ही दिनों में आपके दांत मजबूज हो जाएगें।
यदि मसूड़ों में दर्द और सूजन है तो एलोवेरा और हल्दी का पाउडर को मिलाकर बना हुआ पेस्ट को मसूड़ों पर लगाने से मसूड़े ठीक होते हैं।
पानी से भी ब्रश कर सकते हो। एैसा करने से दांत में फंसे खाने को आराम से निकाला जा सकता है।

दालचीनी 
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दालचीनी मुंह की बदबू को कम करती है साथ ही मुंह में किसी तरह के कीड़े को नहीं लगने देती है। दालचीनी पूरी तरह से एंटी बैक्टीरियल है।

जीरा
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जीरे को हल्की आग में सेक लें और इसका नित्य सेवन करें। यह मुंह की दुर्गन्ध को कुछ ही दिनों में जड़ से खत्म कर देगा।

इन आसान तरीकों से आप अपने घर में ही प्राकृतिक दांतमंजन बना सकते हो। यदि दांत ठीक हैं तो आपकी सेहत भी ठीक हैं।

WWW.ASTRORRACHITA.IN 
Acharya Rrachita Gupta +919958067960

Friday, September 07, 2018

Healthy eating and drinking ways to long life

*1. सुबह उठ कर कैसा पानी पीना चाहिए*?

    उत्तर -     हल्का गर्म

*2.  पानी पीने का क्या तरीका होता है*?

    उत्तर -    सिप सिप करके व नीचे बैठ कर

*3. खाना कितनी बार चबाना चाहिए*?

     उत्तर. -    32 बार

*4.  पेट भर कर खाना कब खाना चाहिए*?

     उत्तर. -     सुबह

*5.  सुबह का नाश्ता कब तक खा लेना चाहिए*?

     उत्तर. -    सूरज निकलने के ढाई घण्टे तक

*6.  सुबह खाने के साथ क्या पीना चाहिए*?
    
     उत्तर. -     जूस

*7.  दोपहर को खाने के साथ क्या पीना चाहिए*?

    उत्तर. -     लस्सी / छाछ

*8.  रात को खाने के साथ क्या पीना चाहिए*?

    उत्तर. -     दूध

*9.  खट्टे फल किस समय नही खाने चाहिए*?

    उत्तर. -     रात को

*10. आईसक्रीम कब खानी चाहिए*?

       उत्तर. -      कभी नही

*11. फ्रिज़ से निकाली हुई चीज कितनी देर बाद*
      *खानी चाहिए*?

      उत्तर. -    1 घण्टे बाद

*12. क्या कोल्ड ड्रिंक पीना चाहिए*?

       उत्तर. -      नहीं

*13.  बना हुआ खाना कितनी देर बाद तक खा*
      *लेना चाहिए*?

      उत्तर. -     40 मिनट

*14.  रात को कितना खाना खाना चाहिए*?

       उत्तर. -    न के बराबर

*15.  रात का खाना किस समय कर लेना चाहिए*?

      उत्तर. -     सूरज छिपने से पहले

*16. पानी खाना खाने से कितने समय पहले*
     *पी सकते हैं*?

      उत्तर. -     48 मिनट

*17.  क्या रात को लस्सी पी सकते हैं*?

     उत्तर. -     नहीं 

*18.  सुबह नाश्ते के बाद क्या करना चाहिए*?

       उत्तर. -     काम

*19. दोपहर को खाना खाने के बाद क्या करना*
       *चाहिए*?

       उत्तर. -     आराम

*20. रात को खाना खाने के बाद क्या करना*
     *चाहिए*?

      उत्तर. -    500 कदम चलना चाहिए

*21. खाना खाने के बाद हमेशा क्या करना चाहिए*?

      उत्तर. -     वज्रासन

*22. खाना खाने के बाद वज्रासन कितनी देर*
      *करना चाहिए.*?
    
      उत्तर. -     5 -10 मिनट

*23.  सुबह उठ कर आखों मे क्या डालना चाहिए*?

      उत्तर. -    ठंडा पानी।

*24.  रात को किस समय तक सो जाना चाहिए*?

      उत्तर. -     9 - 10 बजे तक

*25. तीन जहर के नाम बताओ*?

      उत्तर.-    चीनी , मैदा , सफेद नमक

*26. दोपहर को सब्जी मे क्या डाल कर खाना*
      *चाहिए*?

      उत्तर. -     अजवायन

*27.  क्या रात को सलाद खानी चाहिए*?

      उत्तर. -     नहीं

*28. खाना हमेशा कैसे खाना चाहिए*?

      उत्तर. -     नीचे बैठकर व खूब चबाकर

*29. चाय कब पीनी चाहिए*?

      उत्तर. -     कभी नहीं

*30. दूध मे क्या डाल कर पीना चाहिए*?

      उत्तर. -    हल्दी

*31.  दूध में हल्दी डालकर क्यों पीनी चाहिए*?

      उत्तर. -    कैंसर ना हो इसलिए

*32. कौन सी चिकित्सा पद्धति ठीक है*?

      उत्तर. -   आयुर्वेद

*33. सोने के बर्तन का पानी कब पीना चाहिए*?

      उत्तर. -   अक्टूबर से मार्च (सर्दियों में)

*34. ताम्बे के बर्तन का पानी कब पीना चाहिए*?

      उत्तर. -    जून से सितम्बर(वर्षा ऋतु)

*35. मिट्टी के घड़े का पानी कब पीना चाहिए*?

      उत्तर. -  मार्च से जून (गर्मियों में)

*36. सुबह का पानी कितना पीना चाहिए*?

      उत्तर. -  कम से कम 2 - 3 गिलास।

*37. सुबह कब उठना चाहिए*?

       उत्तर. -  सूरज निकलने से डेढ़ घण्टा पहले।

Thursday, September 21, 2017

Remedies for ACNE, BACK ACHE, ACIDITY, BAD BREATH , ANAEMIA

*Acne*

1. Orange peel pounded well with water applied to effected acne area helps cure acne.

2. Cucumber leaves or grated pieces applied to the acne.

3. Rub the pimple( acne) with a fresh cut clove of garlic.

4. Drink atleast 1 litre of water a day of impart a healthy glow to skin.

5. Paste of fenugrek (methi) leaves applied overnight on acne and washed off next morning.
[9/21, 17:35] Bhumika Modi: *Asthama*

1. Juice of 1 clove of garlic with a tsp of honey should be taken twice a day.

2. 1/2 a tsp of hing and 50 ml sesame oil and a pinch of camphor are mixed and applied on the chect to cure the congestion.

3. A tsp full each of ginger paste, betal and garlic juice are mixed and 1 tsp of it can be taken trice a day.

4. Equal portion of tulsi juice and honey is best remedy for it.

5. Onion juice is good to intake.
[9/21, 17:35] Bhumika Modi: *Acidity*

1. Consuming fresh mint juice on regular basis helps curing acidity.

2. Drink atleast half a litre of water in the early morning when you are on empty stomach.

3. Banana, cucumber and watermelon cures acidity.

4. Yogurt is known to be as excellent remedy for acidity.

5. Chewing a few basil (tulsi) leaves cures acidity.
[9/21, 17:35] Bhumika Modi: *Anaemia*

1. Green vegetables and dairy products need to be taken.

2. Eat oranges and drink lemon juices.

3. Have water stored in a copper vessel overnight every morning.

4. Soak the black sesame seeds in some water for two to three hours and then grind them into a paste. Have this with a teaspoon of honey every day.

5. Eat a handful of raisins and one or two dates for breakfast or as a mid-meal snack
 
[9/21, 17:35] Bhumika Modi: *Backache*

1. Limejuice serves as an excellent home remedy for backache. Squeeze the juice of 1 lemon and add common salt in it. Drink it 2 times a day. It will act as a great back pain reliever.

2. Applying garlic oil on the back gives immense relief from back pain. Take about 10 small garlic cloves and fry them in oil on low flame. You can either use sesame oil, coconut oil or mustard oil. Fry till the garlic turns light brown. Let the oil prepared from garlic cool completely. Thereafter apply it on back and keep it for about 3 hrs. In a couple of days you will feel the magical effects.

3. Apply some ginger paste on the affected area, followed by eucalyptus oil.

4. Grind together 1 cup each of poppy seeds (khus khus) and rock candy (misri).Consume two teaspoons of this mixture twice daily, followed by a glass of milk.

5. Massaging your back with an herbal oil can help your muscles relax and relieve pain. You can use any herbal oil such as eucalyptus oil, almond oil, olive oil or coconut oil. Heat the oil until warm and massage it gently over the aching area.
[9/21, 17:35] Bhumika Modi: *Bad Breath*

1. Drink plenty of water and swish cool water around in your mouth. This is especially helpful to freshen “morning breath.”

2. Chew a piece of lemon or orange rind for a mouth- freshening burst of flavor. (Wash the rind thoroughly first.) The citric acid will stimulate the salivary glands—and fight bad breath.

3. Wash mouth with neem bark powder dissolved in water a couple of times a day.

4. Green cardamom is good mouth freshner.

5. The gargles of cold decoction of Aloe Vera mixed with honey can helps a lot.

Saturday, July 22, 2017

अदरक के लाभ benefits of ginger herb और प्राचीन काल में प्रयोग

-अदरक का प्राचीन काल में प्रयोग--*

ऐतिहासिक अभिलेखों से भी पहले से भारत और चीन में अदरक को एक मसाले और औषधि के रूप में उपजाया और इस्तेमाल किया जाता था।
दोनों देशों के शुरुआती चिकित्सा ग्रंथों में ताजे और सुखाए गए, दोनों रूपों में इस मसाले के औषधीय इस्तेमाल का विस्तार से वर्णन है।
चौथी शताब्दी ईसापूर्व के चीनी ग्रंथों में अदरक को पेट की समस्याओं, मतली, दस्त, हैजा, दांतदर्द, रक्तस्राव और गठिया के उपचार के लिए एक औषधि के रूप में बताया गया है।
चीन के जड़ी-बूटी विशेषज्ञ इस बूटी का इस्तेमाल सर्दी-खांसी सहित तमाम श्वास संबंधी बीमारियों के उपचार में भी करते हैं।
पांचवीं सदी में चीनी नाविक लंबी समुद्री यात्राओं में स्कर्वी के इलाज के लिए अदरक में मौजूद विटामिन सी तत्वों का इस्तेमाल करते थे।
भारत के आयुर्वेदिक ग्रंथों में अदरक को सबसे महत्वपूर्ण बूटियों में से एक माना गया है।
यहां तक कि उसे अपने आप में औषधियों का पूरा खजाना बताया गया है। 
आयुर्वेदिक चिकित्सक इसको एक शक्तिशाली पाचक के रूप में लेने की सलाह देते हैं क्योंकि यह पाचक अग्नि को भड़काता है और भूख बढ़ाती है। इसके पोषक तत्व शरीर के सभी हिस्सों तक आसानी से पहुंच पाते हैं।
आयुर्वेद में अदरक को जोड़ों के दर्द, मतली और गति के कारण होने वाली परेशानी के उपचार में भी इस्तेमाल किया जाता है।--अदरक से सावधानी--*

अदरक का ज्यादा सेवन कई बार सीने में जलन की समस्या की वजह बन सकता है।
जहां डायरिया में लाभकारी है वही ज्यादा इस्तेमाल डायरिया बढ़ा भी सकता है।
अदरक की तासीर गरम होती है इसलिए कई बार माहवारी में ज्यादा ब्लीडिंग होने की परेशानी हो सकती है।

अदरक कई बार त्वचा पर इरिटेशन की वजह भी बन सकता है।

ऐसा भी कहा जाता है कि प्रेग्नेंसी में अदरक के इस्तेमाल से फीटल के सेक्स हार्मोन प्रभावित होते हैं। कई बार मिसकैरिज भी हो सकता है।

अदरक का सेवन ब्लड शुगर को लो कर सकता है जिससे डायबिटीज की समस्या हो सकती है।

अदरक की हाई डोज़ दिल की कुछ समस्याओं को और भी बढ़ा सकती है।

ब्रेस्ट फीडिंग कराने वाली महिलाओं को भी अदरक का सेवन नहीं करना चाहिए।

बवासीर की तकलीफ वालों को अदरक का सेवन कम करना चाहिए। बेड टी में अदरक ऐसे लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है।

गर्मी के दिनों में अदरक का ज्यादा सेवन नुकसान कर सकता है।

खून की उल्टी में अदरक का इस्तेमाल बिलकुल न करें।
*--अदरक में पाए जाने वाले पोषक तत्व--*

अदरक में बहुत से औषधीय गुण(medicinal properties) पाए जाते है| अदरक के सेवन से बहुत से रोगों से मुक्ति मिलती है|
अदरकमें 80 प्रतिशत जल पाया जाता है|
जबकि सोंठ(सूखी अदरक) में लगभग 10 प्रतिशत ही जल पाया जाता है|
इसके अलावा इसमें 53 प्रतिशत स्टार्च, 12.4 प्रतिशत प्रोटीन, 7.2 प्रतिशत फाइबर, 6.6 राख, 1.8 प्रतिशत तात्विक तेल(essential oil) पाया जाता है और इसमें नाइट्रोजन, एमिनो एसिड, ग्लूकोज, सुक्रोस, फ्रक्टोज, सुगन्धित तेल, ओलियोरेसिन, जिन्जिवरीन, रैफीनीस, कैल्शियम, विटामिन B और C, प्रोतिथीलिट एंजायम, औथियोरेजिन और लौह(आयरन) तत्व पाया जाता है|
--भूख बढ़ाने के लिए--*

अदरक का नियमित सेवन करने से भूख न लगने की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।
अगर आपको भूख कम लगती हैं तो अदरक को बारीक काटकर, थोड़ा सा नमक लगाकर दिन में एक बार लगातार आठ दिन तक खाइए।
इससे पेट साफ होगा और ज्यादा भूख लगेगी
-अदरक एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है--*

दुनिया में हुए बहुत से अध्ययनों में पाया गया है कि अदरक में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो लिपिड पेरोक्सिडेशन और डीएनए क्षति को रोकती है।

एंटीऑक्सीडेंट बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि वे फ्री रेडिकल्स के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करते हैं। इससे उम्र के साथ आने वाली तमाम तरह की बीमारियों जैसे कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, आर्थराइटिस, अल्जाइमर्स और बाकी रोगों से बचाव में मदद मिलती है।

हालांकि सभी मसालों में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, अदरक उनमें ज्यादा प्रभावशाली है। इसमें अपनी 25 अलग-अलग एंटीऑक्सीडेंट विशेषताएं हैं। इसके कारण यह शरीर के अलग-अलग हिस्सों में तमाम तरह के फ्री रेडिकल्स से लड़ने में बहुत असरदार है।
--त्वचा को आकर्षित बनाने के लिए--*

अदरक के सेवन से त्वचा आकर्षित और चमकदार बनती है।
अगर आप भी अपनी त्वचा को आकर्षित बनाना चाहते हैं तो  सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी के साथ अदरक का एक टुकड़ा जरूर खाएं।
इससे न केवल आपकी त्वचा में निखार आएगा बल्कि आप लंबे समय तक जवां दिखेंगे
--कोलेस्ट्राल में फायदेमंद--*

अदरक का प्रयोग हमारे कोलेस्ट्रोल को भी कंट्रोल करता है, इससे ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहता है और इसके इस्तेमाल से खून में क्लाट नहीं बनते साथ ही इसमें एंटी फंगल और कैंसर प्रतिरोधी होने के गुण भी पाए जाते हैं।

Friday, January 30, 2015

मोटापा घटाने केलिए कुछ आयुर्वेदिक नुस्खेँ

मोटापा घटाने केलिए कुछ आयुर्वेदिक नुस्खेँ

मोटापे को लेकरकई लोग परेशानरहतें हैं और इससेछुटकारा पाना चाहतेंहैं ! कुछ उपाय ढूंढकर उनको प्रयोग में लातें हैं लेकिन कई बार ऐसा देखा गया हैकि हर उपाय हरआदमी के लिएफायदेमंदनहीं हो पाता हैजिसके कारणउनको निराश होनेकि आवश्यकतानहीं है औरउनको दुसरा उपायअपनाना चाहिए !आज में आपके सामनें मोटापे को दूर भगाने के लिए कुछ सामान्यआयुर्वेदिक नुस्खेँ लेकर आया हूँ! जिनका प्रयोग करके फायदा उठाया जा सकता है !

1. मूली के रस मेंथोडा नमक और निम्बूका रस मिलाकरनियमित रूप से पीने से मोटापा कमहो जाता है और शरीरसुडौल हो जाता है !

2. गेहूं, चावल, बाजराऔर साबुत मूंगको समान मात्रा मेंलेकर सेककरइसका दलियाबना लें !इस दलिये में अजवायन 20 ग्राम तथा सफ़ेदतिल 50 ग्रामभी मिला दें ! 50 ग्रामदलिये को 400मि.ली.पानी मेंपकाएं !स्वादानुसार सब्जियां और हल्का नमक मिला लें !नियमित रूप से एकमहीनें तक इस दलिये के सेवन से मोटापा और मधुमेह में आश्चर्यजनकलाभ होता है !

3. अश्वगंधा के एकपत्ते को हाथ सेमसलकर गोली बनाकर प्रतिदिनसुबह,दोपहर,शामको भोजन से एकघंटा पहलेया खाली पेट जल केसाथ निगल लें ! एकसप्ताह के नियमितसेवन के साथफल, सब्जियों, दूध, छाछ और जूस पर रहते हुए कईकिलो वजन कमकिया जा सकता है !

4. आहार में गेहूं केआटे और मैदा से बनेसभी व्यंजनों का सेवन एक माह तक बिलकुल बंद रखें ! इसमें रोटी भीशामिल है !अपना पेट पहले के4-6 दिन तक केवलदाल, सब्जियां औरमौसमी फल खाकरही भरें ! दालों में आपसिर्फ छिलकेवाली मूंग कि दाल, अरहर या मसूर कि दाल ही ले सकतें हैं चनें या उडदकि दाल नहीं !सब्जियों में जो इच्छा करें वही ले सकते हैं !गाजर, मूली, ककड़ी,पालक, पतागोभी, पके टमाटर औरहरी मिर्च लेकरसलाद बना लें ! सलाद पर मनचाही मात्रा में कालीमिर्च, सैंधा नमक, जीरा बुरककर औरनिम्बू निचोड़ करखाएं ! बस गेहूंकि बनी रोटी छोडकरदाल, सब्जी, सलाद और एक गिलास छाछका भोजन करते हुए घूंट घूंट करके पीते हुए पेट भरना चाहिए ! इसमें मात्रा ज्यादा भी हो जाए तो चिंता कि कोई बात नहीं ! इस प्रकार 6-7 दिन तक खाते रहें !इसके बाद गेहूंकि बनी रोटी किजगह चना और जौ के बने आटे कि रोटी खाना शुरू करें !

5 किलो देशी चना और एक किलो जौ को मिलकर साफ़ करके पिसवा लें !6-7 दिन तक इस आटे से बनी रोटी आधी मात्रा में औरआधी मात्रा मेंदाल,सब्जी,सलाद और छाछ लेना शुरू करें ! एकमहीने बाद गेहूंकि रोटी खाना शुरूकर सकते हैं लेकिनशुरुआत एक रोटी सेकरते हुए धीरे धीरेबढाते जाएँ ! भादों केमहीने में छाछका प्रयोगनहीं किया जाता हैइसलिए इस महीनें मेंछाछ का प्रयोगनां करें !!

5. एरण्ड की जड़का काढ़ा बनाकरउसको छानकर एक एक चम्मच की मात्रा में शहद के साथ दिन में तीन बार नियमितसेवन करने सेमोटापा दूरहोता है !!

6. चित्रक कि जड़का चूर्ण एक ग्रामकी मात्रा में शहद केसाथ सुबह शामनियमित रूप से सेवन करने और खानपान का परहेज करनें से भी मोटापा दूर किया जा सकता है !!

Sunday, January 25, 2015

EATING WITH HANDS A "SCIENTIFIC" PRACTICE"

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EATING WITH HANDS A "SCIENTIFIC" PRACTICE.

As per the Indian wellness system of AYURVEDA its an excellent practice to mix food while cooking with your hands, example marinating and making batter etc and also to eat eith one's hands just like its done in large parts of India.
Benefits: OUR HAMD IS A BLENDING OF THE 5 TATTVAS(ELEMENTS) OR PRIMAL ESSENCES OF THE UNIVERSE.
THUMB: FIRE ELEMENT
INDEX FINGER: AIR ELEMENT
MIDDLE FINGER: ETHER OR AKASHA ELEMENT
RING FINGER: EARTH ELEMENT
LITTLE FINGER: JALA OR WATER ELEMENT

WHILE USING HAND TO EAT THE FOOD,  it  IS IMBUED WITH THE UNIQUE QUALITIES OF EACH ELEMENT IN NATURAL PROPORTION AND THEN DIGESTED IN OPTIMAL WAY SINCE THE HUMAN BODY IS ALSO MADE UP OF THE 5 ELEMENTS.
EATING WITH HANDS ALSO SENDS FOOD RELATED SIGNALS TO BRAIN SO THAT THE BRAIN READIES OUR DIGESTIVE SYSTEM FOR THE WORK AHEAD AND THE ENTIRE INTAKE, DIGESTION AND EXCRETION SYSTEM IS STREAMLINED LEADING TO A VIBRANT AND HEALTHY BODY.
OM NAMO SHIVAY