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Wednesday, November 28, 2018

ज्योतिष मे राहु ग्रह

ज्योतिष मे राहु ग्रह।

राहु से विस्तार की बात केवल इसलिये की जाती है क्योंकि राहु जिस भाव और ग्रह में अपना प्रवेश लेता है उसी के विस्तार की बात जीव के दिमाग में शुरु हो जाती है,कुंडली में जब यह व्यक्ति की लगन में होता है तो वह व्यक्ति को अपने बारे में अधिक से अधिक सोचने के लिये भावानुसार और राशि के अनुसार सोचने के लिये बाध्य कर देता है जो लोग लगातार अपने को आगे बढाने के लिये देखे जाते है उनके अन्दर राहु का प्रभाव कहीं न कहीं से अवश्य देखने को मिलता है। लेकिन भाव का प्रभाव तो केवल शरीर और नाम तथा व्यक्ति की बनावट से जोड कर देखा जाता है लेकिन राशि का प्रभाव जातक को उस राशि के प्रति जीवन भर अपनी योग्यता और स्वभाव को प्रदर्शित करने के लिये मजबूर हो जाता है। राहु विस्तार का कारक है,और विस्तार की सीमा कोई भी नही होती है,पौराणिक कथा के अनुसार राहु की माता का नाम सुरसा था,और जब हनुमान जी सीताजी की खोज के लिये समुद्र पार कर रहे थे तो देवताओं ने हनुमानजी की शक्ति की परीक्षा के लिये सुरसा को भेजा था । सुरसा को छाया पकड कर आसमानी जीवों को भक्षण करने की शक्ति थी,हनुमान जी की छाया को पकड कर जैसे ही सुरसा ने उन्हे अपने भोजन के लिये मुंह में डालना चाहा उन्होने अपने पराक्रम के अनुसार अपनी शरीर की लम्बाई चौडाई को सुरसा के मुंह से दो गुना कर लिया,आखिर तक जितना बडा रूप सुरसा अपने मुंह का बनाने लगी और उससे दोगुना रूप हनुमानजी बनाने लगे,जब कई सौ योजन का मुंह सुरसा का हो गया तो हनुमानजी ने अपने को एक अंगूठे के आकार का बनाकर सुरसा के पेट में जाकर और बाहर आकर सुरसा को माता के रूप में प्रणाम किया और सुरसा की इच्छा को पूरा होना कहकर सुरसा से आशीर्वाद लेकर वे लंका को पधार गये थे। पौराणिक कथाओं के ही अनुसार सुरसा को अहिन यानी सर्पों की माता के रूप में भी कहा गया है। जब कभी राहु के बारे में किसी की कुंडली में विवेचना की है तो कहने से कहीं अधिक बातें कुंडली में देखने को मिली है। राहु चन्द्रमा के साथ मिलकर अपना रूप जब प्रस्तुत करता है तो वह अपनी शक्ति और राशि के अनुसार अपने को कैमिकल के रूप में प्रस्तुत करता है। तरल राशि के प्रभाव में वह बहता हुआ कैमिकल बन जाता है गुरु रूपी हवा के साथ मिलकर वह गैस के रूप में अपनी योग्यता को प्रकट करने लगता है,शनि रूपी पत्थर के साथ मिलकर वह सीमेंट का रूप ले लेता है,और वही शनि अगर पंचम भाव में होता है तो अनैतिकता की तरफ़ ले जाने के लिये अपनी शक्ति को प्रदान करने लगता है। शुक्र के साथ आजाने से राहु का स्वभाव असीम प्यार मोहब्बत वाली बातें करने लगता है और बुध के साथ मिलकर वह केलकुलेशन के मामले में अपनी योग्यता को कम्पयूटर के सोफ़्टवेयर की तरह से सामने हाजिर हो जाता है। सूर्य के साथ मिलकर राज्य की तरफ़ उसका आकर्षण बढ जाता है और जब राहु और सूर्य दोनो ही बलवान होकर पंचम नवम एकादस में अपनी युति राज्य की कारक राशि में स्थान बनाते है तो बडा राजनीतिक बनाने में राहु का पहला प्रभाव ही माना जाता है। मिथुन राशि में राहु का प्रभाव व्यक्ति के अन्दर भाव के अनुसार प्रदर्शित करने की कला को देता है और धनु राहु में राहु अपनी नीचता को प्रकट करने के बाद बडे बडे अनहोनी जैसे कारण पैदा कर देता है और व्यक्ति की जीवनी को आजन्म और उसके बाद भी लोगों के लिये सोचने वाली बात को बनाने से नही चूकता है।

राहु का असर तब और देखा जाता है जब व्यक्ति क नवें भाव में जाकर वह पुराने संस्कारों को तिलांजलि देने के कारकों में शामिल हो जाता है और जिस कुल या समाज में जातक का जन्म होता है जिन संस्कारों में उसकी प्राथमिक जीवन की शुरुआत होती है उन्हे भूलने और समझ मे नही आने के कारण जब वह धन भाग्य और न्याय वाली बातों तथा ऊंची शिक्षाओं अथवा अपने समाज के विपरीत समाज में प्रवेश करने के बाद उसे सोचने के लिये मजबूर होना पडता है। शनि के घर में राहु के प्रवेश होने के कारण तथा व्यक्ति की लगन में होने पर राहु शनि की युति अगर महिला की कुंडली में हो तो शरीर को ढककर चलने के लिये अपनी सोच को देता है और जब वह सप्तम स्थान में चन्द्रमा के साथ अपनी युति बना लेता है जो आजन्म जीवन साथी की सोच को समझने के प्रति असमर्थ बना देता है। राहु को अगर मंगल की युति मुख्य त्रिकोण में मिलती है तो जातक को आजीवन प्रेसर वाले रोग मिलते है। और खून के अन्दर कोई न कोई इन्फ़ेक्सन वाली बीमारी मिलती है,महिलाओं की कुंडली में राहु अगर दूसरे भाव में होता है तो अक्सर झाइयां मुंहासे और चेहरे को बदरंग बनाने से नही चूकता है तथा पुरुष के चेहरे वाली राशि में होता है तो जातक को दाडी बढाने और चेहरे पर तरह तरह के बालों के आकार बनाने में बडा अच्छा लगता है। लगन का मंगल राहु क्षत्रिय जाति से अपने को सूचित करता है,मंगल की सकारात्मक राशि वृश्चिक राशि में अपना प्रभाव देने के कारण वह मुस्लिम संप्रदाय से अपनी युति को जोडता है और चन्द्रमा की राशि कर्क को वह अपनी मोक्ष और धर्म के प्रति आस्थावान बनाता है। गुरु राहु मंगल की युति से जातक को सिक्ख सम्प्रदाय से जोडता है और केतु के साथ शनि के होने से वह ईशाई सम्प्रदाय से सम्बन्धित बात को भी बताता है,बुध के साथ केतु के होने से राहु व्यापार की कला में और खरीदने बेचने के कार्यों में कुशलता देता है।

राहु को सम्भालने के लिये जातक को मंगल का सहारा लेना पडता है। मंगल तकनीक है तो राहु विस्तार अगर विस्तार को तकनीकी रूप में प्रयोग में लाया जाये तो यह अन्दरूनी शक्ति बडे बडे काम करती है। वैसे तो झाडी वाले जंगल को भी अष्टम राहु के लिये जाना जाता है लेकिन उन्ही झाडियों को औषिधि के रूप में प्रयोग करने की कला का अनुभव हो जाये तो जंगल की झाडियां भी तकनीकी कारणों से काम करने के लिये मानी जा सकती है। शनि के अन्दर राहु और केतु का प्रवेश हमेशा से माना जाता है,शनि को अगर सांप माना जाये तो राहु उसका मुंह है और केतु उसकी पूंछ जब भी शनि को कोई कारण जीवन के लिये पैदा करना होता है तो वह हमेशा के लिये समाप्त या हमेशा के लिये विस्तार करवाने के लिये राहु का प्रयोग करता है और उसे केवल झटका देकर बढाने या घटाने की बात होती है तो वह केतु का प्रयोग करता है। सूर्य को समाप्त करने के बाद जो सबसे पहले कारण पैदा होता है वह आसमान की तरफ़ जाने वाला प्रत्यक्ष प्रमाण के रूप में प्रस्तुत करने के लिये माना जाता है। जैसे सूर्य को लकडी के रूप में जाना जाता है और जब सूर्य (लकडी) मंगल (ताप) और गुरु (हवा) का सहारा लेकर जलाया जाता है तो राहु धुंआ के रूप में आसमान में ऊपर की ओर जाते हुये अपनी उपस्थिति को दर्शाता है।

राहु को रूह का भी रूप दिया जाता है अगर यह अष्टम स्थान में वृश्चिक राशि का है तो यह शमशानी आत्मा के रूप में जाना जाता है.इस स्थान का राहु या तो कोई ऐसी बीमारी देता है जिससे जूझने के लिये जातक को आजीवन जूझना पडता है और धर्म अर्थ काम और मोक्ष के कारणों से दूर करता है या घर के अन्दर अपनी करतूतों से शमशानी क्रियायें आदि करने या खुद के द्वारा सम्बन्धित कारणों को समाप्त करने के बाद खाक में मिलाने के जैसा व्यवहार करता है,पैदा होने के पहले भी माता बीमार रहती है पिता को तामसी भोजनों पर विस्वास होता है और जातक के पैदा होने के बाद आठवीं साल की उम्र से कोई शरीर का रोग अक्समात लग जाता है जो आजीवन साथ नही छोडता है।

राहु की अन्य ग्रहों से युति का फल।

1. राहु + सूर्य की युति
सूर्य और राहु दो ऐसे ग्रह हैं जो एक दूसरे से विपरीत होते हुए भी अनेक प्रकार से समान हैं | दोनो ही ग्रह दार्शनिकता और राजनीति के कारक भी हैं | कुडंली मे दोनो की युति ग्रहण योग का निर्माण करती है | यह युति जिस भाव मे बनती है उसके फलो को न्यून करती है | परन्तु ऐसा जातक जिसकी कुंडली मे यह योग होता है वे राजनैतिक सफलता प्राप्त करता है | मेरे अनुभव मे यह आया है कि यदि यह योग 9,10,11 भाव मे बनता है तो ऐसे व्यक्ति राजनीति मे सफल होते देखे गए हैं | शायद यह इसलिए हुआ कि राहु और सूर्य दोनो ही राजनीति, प्रभुत्व एवं सत्ता के कारक ग्रह हैं
2. राहु + चंद्र की युति
राहु और चंद्र दो विपरीत ग्रह परन्तु अनेक प्रकार से समान भी हैं | दोनो ही धन तथा यात्रा के ग्रह हैं | इन दोनो की युति ग्रहण योग का निर्माण करती है जो कि मानसिक बेचैनी का कारण बनती है | इस युति पर यदि बुध की दूषित दृष्टि हो तो त्वचा रोग होता है | परन्तु इस प्रकार के परिणाम लगनस्थ राहु + चंद्र के होने से देखे गए हैं | इस योग के शुभ परिणाम भी आते हैं | अतः इस योग के होने से ज्यादा घबडाने की आवश्यकता नही है | यदि यह युति 3, 7 व 9 भावो मे हो तो यात्राएं करनी पडती हैं | इस योग मे यदि गुरु की शुभ दृष्टि हो तो ऐसे जातक का जीवन शीशे के समान पारदर्शी एवं निष्पक्ष होता है | 11वें भाव मे यदि यह युति शुभ प्रभाव लेकर बैठी हो तो अचानक धन लाभ भी होता है | इसी प्रकार चंद्र यदि चतुर्थेश होकर राहु के साथ 12वें भाव मे युति बनाए तो विदेश यात्रा से इंकार नही किया जा सकता |
3.मंगल + राहु की युति
मंगल और राहु एक दूसरे के शत्रु ग्रह हैं परन्तु साहस,पराक्रम, शत्रु, षडयंत्र, झगडे, विवाद जैसे विषयो मे इनकी समानता है | कुंडली मे इनकी युति अंगारक योग का निर्माण करती है | जिसके फलस्वरुप कुंडली धारक का व्यक्तित्व अतिक्रोधी, कठोर, दुःसाहसी और षडयंत्रकारी होता है | प्रायः इस योग के गलत परिणाम 1, 2, 3, 4, 7, 8 व 12 भाव मे देखने को मिलते हैं | 5 भाव मे यह युति सत्ता पक्ष से लाभ दिलाती है | 6 भाव मे यह युति सर्जन बना सकती है | 9,10,11 भाव मे यह युति राजनीति मे सफलता व प्रभुता संपन्न बनाती है |
बुध + राहु युति
बुध और राहु की युति होने से जडत्व योग बनता है | यह योग जातक को सामन्यतः चालाक बनाता है | यदि इस युति पर गुरु की दृष्टि हो तो जातक अनेक भाषाओं का ज्ञाता होता है तथा बडी चालाकी से अपने कार्यो को सफल कर लेता है | यदि यह योग 1 तथा 6 भाव मे बनता है तो लाइलाज वीमारी देता है | 4 तथा 5 भाव मे यह योग शिक्षा मे विघ्न देता है | 2 व 11 भाव मे अनावश्यक खर्च देता है | 3 भाव मे संबधियो से व 7 भाव मे जीवन साथी से मतभेद देता है | 9 भाव मे यह युति जातक को नास्तिक बनाती है | 10 भाव मे होने से जातक नीतिगत फैसले लेने मे अपने आपको असफल पाता है | 12 भाव मे यह युति शैय्या सुख मे कमी करता है | इस प्रकार विभिन्न भावो मे जडत्व योग अशुभ ही परिणाम देता है परन्तु गुरु की इस योग पर दृष्टि होने से राहत की अपेक्षा की जा सकती है | यदि बुध अस्त न हो तथा बुध केन्द्रेश या त्रिकोणेश हो कर केन्द्र या त्रिकोण पर जडत्व योग बनाए तो यह योग राजयोग कारक होता है तथा जातक बडी चालाकी से अपने समस्त कार्यो को संपादित करता हुआ सफलता के शिखर पर पहुँच जाता है | यदि गुरु का सपोर्ट मिला तो सोने मे सुहागा |
4.गुरु + राहु की युति
गुरु +राहु की युति चांडाल योग का निर्माण करती है। जिस जातक की कुंडली में दोनों ग्रहों की युति होती है, वह परंपरा विरोधी और आध्यात्मिकता में रूचि न रखने वाला होता है। ऐसी स्थिति में राहु गुरु के सात्विक और शुभ गुणों को कम कर देता है। जिस जातक की कुंडली में लग्न में गुरु राहु की युति होती है वह नास्तिक, पाखंडी तथा धार्मिकता में रूचि न रखने वाला होता है। धन भाव में यह योग दरिद्रता का सूचक माना जाता है। किंतु यही युति यदि पंचम, नवम अथवा केंद्र भावों में हो तो ऐसा जातक ज्योतिष शास्त्र का ज्ञाता होता है। तृतीय, सप्तम में धार्मिक यात्राएं तथा दशम, एकादश भाव में राजनीति में सफलता मिलती है। ऐसी स्थिति में यदि राहु गुरु के नक्षत्र में भी हो तो ऐसा जातक सफल राजनेता हो सकता है। एकादश तथा द्वादश भावों में यदि यह युति है तो ऐसा जातक तंत्र साधना अथवा तांत्रिक कार्यों के द्वारा भी धनार्जन करता है। चांडाल योग का निर्माण करती है। जिस जातक की कुंडली में दोनों ग्रहों की युति होती है, वह परंपरा विरोधी और आध्यात्मिकता में रूचि न रखने वाला होता है। ऐसी स्थिति में राहु गुरु के सात्विक और शुभ गुणों को कम कर देता है। जिस जातक की कुंडली में लग्न में गुरु राहु की युति होती है वह नास्तिक, पाखंडी तथा धार्मिकता में रूचि न रखने वाला होता है। धन भाव में यह योग दरिद्रता का सूचक माना जाता है। किंतु यही युति यदि पंचम, नवम अथवा केंद्र भावों में हो तो ऐसा जातक ज्योतिष शास्त्र का ज्ञाता होता है। तृतीय, सप्तम में धार्मिक यात्राएं तथा दशम, एकादश भाव में राजनीति में सफलता मिलती है। ऐसी स्थिति में यदि राहु गुरु के नक्षत्र में भी हो तो ऐसा जातक सफल राजनेता हो सकता है। एकादश तथा द्वादश भावों में यदि यह युति है तो ऐसा जातक तंत्र साधना अथवा तांत्रिक कार्यों के द्वारा भी धनार्जन करता है।
5.शुक्र + राहु की युति
राहु के साथ यदि शुक्र लग्न में है तो ‘क्रोध योग’ का निर्माण होता है। यह योग जातक को क्रोधी स्वभाव का स्वामी बनाकर आजीवन लड़ाई-झगड़े एवं विवाद का कारण बनता है, जिसके फलस्वरूप जातक को अपने कटु स्वभाव के कारण अपने जीवन में अनेकानेक नुकसान उठाने पड़ते हैं। शुक्र और राहु एक दूसरे के परम मित्र ग्रह हैं। शुक्र प्रेम, विवाह, सौंदर्य, घुंघराले बाल एवं श्याम वर्ण इत्यादि का कारक ग्रह है। राहु भी गुप्त संबंधों एवं प्रेम संबंधों का कारक है। व्यक्ति को श्याम वर्ण ही देता है। कुंडली में दोनों ग्रहों की युति जातक को विपरीत लिंग के प्रति स्वाभाविक आकर्षण प्रदान करती है। यदि शुक्र राहु की युति पति पत्नी दोनों की कुंडली में सप्तम भाव में है तो वैवाहिक जीवन में कष्ट एवं संबंध विच्छेद का कारण भी बनती है। ऐसे जातक के अन्यत्र संबंध अवश्य ही बनते हैं।
6.शनि + राहु की युति
शनि के साथ राहु की युति को ज्योतिष में ‘नन्दी योग’ के नाम से जाना जाता है। यह युति जिस भाव में बनती है उस भाव से संबंधित कष्ट एवं जिस भाव पर दृष्टि डालती है उससे संबंधित शुभ फल प्रदान करती है। इस योग के फलस्वरूप जातक को सुख, वैभव एवं समृद्धि भी प्राप्त होती है। शनि राहु की युति पर यदि मंगल का प्रभाव भी आ जाये तो ऐसा जातक साधारणतया क्रूर एवं आतंकवादी प्रवृत्ति का होता है। यह युति यदि लग्न में आ जाये तो ऐसा जातक हत्या या आत्महत्या का प्रयास भी कर सकता है। लग्न में शनि$राहु के फलस्वरूप क्षीण स्वास्थ्य, द्वितीय भाव में धनाभाव, तृतीय भाव में संबंधियों से विरोध, चतुर्थ में माता के लिये अशुभ, पंचम में सफलता मंग कमी, षष्ठ भाव में रोग, सप्तम में जीवन साथी से वैमनस्य, अष्टम में पैतृक संपत्ति प्राप्त करने में अड़चने, नवम में निर्बल भाग्य, दशम में व्यवसाय में परेशानी, एकादश में लाभ कम तथा द्वादश भाव में भी वैवाहिक सुख में कमी होती है।

Wednesday, April 18, 2018

Survival in this poisonous age

Query: A mosquito lives for less than two months (the male lives for only about 10 days), and within that short span of time it becomes immune to every deadly poison invented by man. The collective consciousness of the mosquitoes passes this information to the next generation - through mutated genes; and the newer generations are born with immunity. How cool is that!

So, what makes us think that human cells don't develop immunity against poisons or that human cells don't mutate and pass on the genetic information? Well, we all know that it happens. And yet, we don't trust our innate intelligence. We have more faith in the mosquito's capability than in our own.

This also makes me think that we don't really have to artificially immunize through vaccinations; the environment itself does it in an organic manner.

Vaccinations may be needed if we are being uprooted from one environment and moving into another which has different kinds of pathogens in their environs.

Hummmmmnnnnn!

#MyMusings #chitra #jha

Reply:
I disagree.

Mosquitoes have a far larger population and reproductive rate than we can ever imagine. Also not all of them get uniformly immune at the same time. Many, most in fact, die off.

Are we prepared to let our kids die?

Also, turnover rate for mosquitoes is high unlike ours which is 20 years or so. They produce subsequent generations quickly enough for the immunity to show. We don’t. We can’t. Unless we make kids have kids.

Next, vaccination doesn’t act on everyone uniformly. Some don’t get immunity no matter what. Some cannot be immunized due to inherent issues or age. How we survive nevertheless is because the rest of the Individuals stay immune and this produces herd immunity, thus protecting the weaker individuals. If we were to convince even subtly that immunization is not needed, it would result in a fresh breakout. This happened in the US where the anti vaccination drive is much stronger than before. Kids died of measles, a disease we have effective vaccine for. Needlessly.

India is catching up. So let’s be very very careful making statements that can sway this stance and push us back into poliomyelitis and other deadly diseases killing off half our population like mosquitoes. I am sorry i am way out of your league spiritually and experience wise but I always call a spade a spade. I couldn’t resist especially when i see people killing their kids with their refusal to immunize.

This organic immunity you say will take time to work. We already have stopped vaccinating people for smallpox. But it’s too early for the rest of them. Please trust doctors and scientists. You speak about human immunity to poison. Can’t we then accept what experienced persons tell us? They’re not even poisoning us.

#poorvisha #ravi

Friday, September 18, 2015

Mercury Retrograde in Virgo Until October 9, 2015 by AstroRrachita

Retrograde Mercury - affects communication and travel and technology

www.AstroRrachita.in
Mercury is retrograde from: September 17 2015  to October 9 2015
In particular now, with Mercury exalted and retrograde, and join the North node, there are enormous opportunities for thinking outside of the box and implementing new ways of living and organizing your life.
What does Mercury Retrograde mean?
Mercury is retrograde when it’s traveling backwards. That’s an optical illusion, of course, and comes from a change in that planet’s orbital speed in comparison to the Earth’s. (Think of it as the planetary equivalent of speeding up, passing a car and seeing it fall far behind after you in the rear view mirror.)
When Mercury is moving in reverse, the areas of life it governs do not play by the usual rules. Pay extra attention
to anything related to communication and travel-including phones, computers and electronic devices, the mail (remember that?), cars, public transportation, and commutes.
EFFECTS :
1.Messages go astray;
2. misunderstandings and confusion abound;
3. technology malfunctions; traffic snarls; travel gets delayed.
CAUTION : Postpone launching major projects, signing major contracts and buying big-ticket items. Double-check fine print, backup your data, and allow lots of extra time when you’re on the road.
The good news? This is an excellent time to :
1.investigate and research,
2. finish old business,
3.clean up paperwork,
4. get in touch with people you haven’t talked to in a while. 5.Pay attention to who surfaces from the past, in person or in thoughts. Their reappearance could help tie up loose ends or resolve lingering business.
Organize and prepare so you’ll be ready to move ahead when Mercury does!

Wednesday, September 09, 2015

Coffees and pastries by blind acid attack girl. Salute to humanism.

Share, if you care. Salutes to the Spirit !!

This Cafe In Agra Is The First To Be Fully Managed By Acid Attack Survivors..!!

Twenty-two-year old Neetu can't see properly, but her eyes were shining with happiness and hope when the Sheroes Hangout, the country's first cafe managed and run by acid attack survivors, opened to brisk business and supportive crowds. "It's a dream come true. The cafe has given girls like us a second chance at life," said Neetu, who suffered an acid attack in 1992 which left her with a completely disfigured face and limited vision.

Sheroes- a tribute to the courage of the survivorsThe cafe, located near the Taj Mahal, is a collaborative effort between survivors and Delhi-based NGO, Chaanv Foundation who chose to name it "Sheroes" as a tribute to the courage of survivors. The place became functional after a successful two-month trial run during which the girls got hands-on experience at operations and dealing with customers.

"We have got tremendous support from locals and learnt so many things about how to run an establishment. What really boosted our morale was when many people, who looked strangely at us earlier, came forward to praise the effort," said Rupa, another survivor, whose creations is displayed at a boutique inside the cafe.

At the inauguration of the cafe, Sapna Bhavnani, a member of the Stop Acid Attacks Campaign, was quoted saying, the girls have proved a point to the world. "People call these survivors 'becharis'. Today, they have shown they are no less than anybody else," she said.

Many tourists visiting the Taj were drawn to the cafe because of the eye-catching external graffiti created by one of the survivors. "This place has amazing music and interiors. I happened to visit it by chance but I am so happy to come here. These are lovely brave women," said Alisha Nangia, a tourist from Delhi.

Harshit Raj, another tourist from Kerala, said, "I really appreciate the idea behind the endeavour. The visit to the cafe has made my tour all the more memorable."

The two-floor cafe, which will rehabilitate five survivors, will also house a reading section containing books and journals on women's empowerment. Alok Dixit, founder of the 'Stop Acid Attack' campaign, said that more such cafes are in the pipeline. "This is our model project. Later, we plan to open cafes like these in Delhi, Kanpur and other parts of the country."

(Originally published in The Times of India)

- Team Being Woman

Friday, August 07, 2015

स्त्री शरीर पर तिल का फल।।

स्त्री शरीर पर तिल का फल।।

यदि गाल पर हो तिल

आमतया तिल को शरीर के किसी खास अंग की खूबसूरती का परिचायक माना जाता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि शरीर के अलग-अलग अंगों पर तिल का मौजूद होना आपसे जुड़ी कई मजेदार बातें भी बताता है। 

यदि गाल पर हो तिल: जिनके गाल पर तिल हो, ऐसे लोग बेहद गंभीर और पढ़ने-लिखने में तेज-तर्रार होते हैं। ऐसे लोगों को छोटी-मोटी खुशियां आसानी से आकर्षित नहीं कर सकतीं। ये जो ठान लेते हैं, वह करके मानते हैं।

कान पर तिल हो

कान पर तिल हो: जिनके कान पर तिल हो ऐसे लोग बेहद लकी होते हैं। उनके नसीब में धन-दौलत, घूमना-फिरना सब लिखा होता है।

ठुड्ढी पर हो तो

ठुड्ढी पर हो तो- जिनके ठुड्ढी पर तिल हो, वे भाग्य के बड़े धनी होते हैं। नाम, शोहरत या धन के लिए उन्हें बहुत ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती।

आंख के किनारे पर तिल

यदि किसी की आंख के किनारे पर तिल मौजूद हो तो समझ लीजिए कि आप उनपर आंख मूंदकर भरोसा कर सकते हैं। ऐसे व्यक्ति कभी किसी से धोखा नहीं कर सकते।

भौंह पर हो तिल

भौंह पर हो तिल- यदि दाहिने भौंह पर तिल मौजूद हो तो समझिए कि उनकी शादीशुदा लाइफ काफी अच्छी रहती है। ऐसे लोग हर क्षेत्र मेरहोते हैं। लेकिन जिनकी बाईं भौंह पर तिल हो तो वे सौभाग्य के मामले में कुछ खास धनी नहीं होते। काफी मेहनत के बाद भी भाग्य उनका साथ नहीं देता।

नाक पर हो तिल

नाक पर हो तिल- यदि किसी के नाक पर तिल हो तो समझ लीजिए कि आप उनपर आंख मूंदकर भरोसा कर सकते हैं, क्योंकि ऐसा व्यक्ति एक अच्छा दोस्त साबित हो सकता है। बहुत मेहनती होते हैं

माथे पर हो तिल

माथे पर हो तिल- जिनके माथे के दाहिने साइड पर तिल होता है, ऐसे लोग धनी और सुखी होते हैं। किसी भी काम को करने की अद्भुत क्षमता होती है उनमें और सोचने-समझने की शक्ति भी कमाल की होती है। लेकिन जिनकी ललाट के बाएं साइड कोई तिल हो तो वैसे लोगों को पैसे की कीमत समझ नहीं आती। एक तरफ से पैसा आए तो दूसरी तरफ से उसे उड़ाने में ये कोई कसर नहीं छोड़ते। यदि यह तिल माथे के बीचोबीच हो तो ऐसे लोग जिंदगी में काफी सफल होते हैं।

गले पर हो तिल

गले पर हो तिल- जिनके गले या गर्दन पर तिल हों, ऐसे लोग स्वाभाव से काफी उथल-पुथल वाले होते हैं। पल में आप उन्हें खुश देखेंगे और पल भर में दुखी। वैसे ऐसे लोगों का करियर शुरुआत में भले ढीला-ढाले रहें, लेकिन बाद में सब स्मूथ और बेहतरीन रिजल्ट दे ही जाता है।

हाथ पर हो तिल

हाथ पर हो तिल- जिस व्यक्ति के हाथ पर तिल हो, उन्हें आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता।

उंगलियों पर तिल

उंगलियों पर तिल- जिनकी उंगलियों पर तिल हो, उनपर भूलकर भी विश्वास न करें। ऐसे लोग धोखेबाज किस्म के होते हैं।

कमर पर तिल

कमर पर तिल होना इस बात का संकेत करता है कि आपको उम्र भर कई परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। पेट पर तिल होने आपके यह बताता है कि आप उत्तम भोजन के इच्छुक है। जिसकी पीठ पर तिल होता है वह व्यक्ति अपने जीवन काल में कई यात्राएं करता है।

होंठ पर तिल हो

यदि किसी व्यक्ति के होंठ पर तिल हो तो उसका मन हमेशा वासना विषयक बातों में खोया रहता है। कान पर तिल होना अल्पायु यानी कम उम्र होने की निशानी है। ऐसे लोग अधिक उम्र तक जीवित नहीं रहते।

छाती पर तिल

छाती पर दाहिनी ओर तिल का होना शुभ होता है। ऐसी स्त्री पूर्ण अनुरागिनी होती है। पुरुष भाग्यशाली होते हैं। शिथिलता छाई रहती है। छाती पर बायीं ओर तिल रहने से भार्या पक्ष की ओर से असहयोग की संभावना बनी रहती है। छाती के मध्य का तिल सुखी जीवन दर्शाता है। यदि किसी स

दाहिने घुटने पर तिल होने से गृहस्थ जीवन सुखमय और बायें पर होने से दांपत्य जीवन दुखमय होता है।

कंधों पर तिल

दाएं कंधे पर तिल का होना दृढ़ता तथा बाएं कंधे पर तिल का होना तुनकमिजाजी का सूचक होता है।

पलकों पर तिल

आंख की पलकों पर तिल हो तो जातक संवेदनशील होता है। दायीं पलक पर तिल वाले बायीं वालों की अपेक्षा अधिक संवेदनशील होते हैं।

मुंह पर तिल

मुखमंडल के आसपास का तिल स्त्री तथा पुरुष दोनों के सुखी संपन्न एवं सज्जन होने के सूचक होते हैं। मुंह पर तिल व्यक्ति को भाग्य का धनी बनाता है। उसका जीवनसाथी सज्जन होता है।