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Saturday, May 05, 2018

वास्तुदेव की तीन विशेषताएं 🌸

🌸वास्तुदेव की तीन विशेषताएं 🌸

🌸चर वास्तु  : 🌸
☘इसमें वास्तु पुरुष की  नजर या रुख  भाद्रपद ( अगस्त, सितम्बर ), आश्विन तथा कार्तिक ( अक्टूबर , नवम्बर ) महीनों के अवधि में दक्षिण की ओर  होता है | 
🌸तथा  मार्गशीर्ष (नवम्बर-
दिसंबर ), पौष ( दिसंबर – जनवरी ), और माघ (जनवरी-फरवरी ) महीनों में पश्चिम की ओर होता है |
🌸फाल्गुन (फरवरी – मार्च ), चैत्र (मार्च – अप्रैल ), और  वैशाख (अप्रैल – मई ) महीनों में उत्तर की ओर  होता है |
🌸ज्येष्ठ (मई – जून ), आषाढ़ (जून – जुलाई ), तथा  श्रावण (जुलाई – अगस्त ) महीनों की अवधि में पूर्व की ओर होता है |

☘निर्माण कार्य का आरम्भ  या शिलान्यास  और मुख्य द्वार की स्थापना  ऐसे स्थान पर होनी चाहिए जो वास्तुपुरुष की दृष्टी  या नजर की ओर हो , ताकि मनुष्य उस मकान में शान्ति और सुख से रह सके |

🕉 स्थिर वास्तु :  🕉
☘वास्तु पुरुष का सिर सदैव उत्तर-पूर्व की ओर  तथा पैर दक्षिण – पश्चिम की ओर , दाहिना हाथ उत्तर-पश्चिम की ओर  एवं बांया  हाथ दक्षिण – पूर्व की ओर रहता है  इस बात को ध्यान में रखते हुए मकान का डिजाइन एवं प्लान  बनाना चाहिए |

🌸नित्य वास्तु : 🌸
☘प्रत्येक दिन वास्तु पुरुष की नजर  सुबह प्रथम  तीन घंटे  पूर्व की ओर , इसके पश्चात तीन घंटे दक्षिण  की ओर  तथा उसके बाद तीन घंटे पश्चिम की ओर तथा अंतिम तीन घंटे उत्तर की ओर
दृष्टी अथवा नजर रहती है | भवन का निर्माण कार्य इसी प्रकार समयानुसार करना  चाहिए |

☘वास्तु पुरुष की तीन अवसरों पर पूजा अर्चना करनी चाहिये  निर्माण कार्य में  शिलान्यास  करते समय ,दूसरी बार  मुख्य द्ववार लगाते  समय , तीसरी बार  गृह प्रवेश के समय पूजा करनी चाहिये |

☘गृह प्रवेश उस समय होना चाहिये जब वास्तुपुरुष की नजर उस ओर हो  ये शुभ रहता है |
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☘☘☘

Tuesday, January 24, 2017

*छोटे-बड़े नुकसान से बचने के लिए*

🌷 *छोटे-बड़े नुकसान से बचने के लिए* 🌷

🙏🏻 *धर्म-ग्रंथों में ऐसी कई बातें बताई गई हैं,जिनका ध्यान हर किसी को रखना बहुत ही जरुरी होता है। ग्रंथों में तीन ऐसी परिस्थितियां बताई गई हैं,जिनमें मनुष्य को बहुत ही सोच-समझकर कदम उठाना चाहिए। इन परिस्थितियों में बिना सोचे-समझे लिए गए फैसले आपके लिए कई तरह के नुकसानों का कारण बन सकते हैं।*
🌷 *श्लोक-*
*अनालोक्य व्ययं कर्ता ह्मनर्थः कलहप्रियः।*
*आतुरः सर्वक्षेत्रेषु नरः शीघ्रं विनश्यति।।*
👉🏻 *बचे रहना चाहते हैं हर छोटे-बड़े नुकसान से तो ध्यान रखें ग्रंथों में बताई ये 3 बातें*
1⃣ *बिना सोचे-समझे खर्च करना*
*कई लोगों को पैसों का मूल्य नहीं पता होता। वे मुनाफा या सैलेरी आते ही उसे खर्च करने के बारे में सोचने लगते है। पैसा खर्च करने से पहले अपने वर्तमान के साथ-साथ भविष्य के बारे में भी सोचना बहुत ही जरुरी होता है। जो मनुष्य बिना आगे-पीछे की सोचे पैसों को हर जगह खर्च करता रहता है, उसे आगे चलकर कई परेशानियों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता ही है।*
2⃣ *हर काम में जल्दी दिखाना*
*ग्रंथों में धैर्य रखने की बात कही जाती है। जिस मनुष्य के अंदर धैर्य और शांति की कमी रहती है, वे हर काम में जल्दबाजी करते है। ऐसे में कई बार काम बिगड़ जाते हैं। किसी भी काम को करने के पहले उसके बारे में अच्छी तरह से विचार करना बहुत ही जरुरी होता है। जो मनुष्य बिना विचार किए हर काम में जल्दी दिखाता है, उसे कई तरह के नुकसानों का सामना करना पड़ता है।*
3⃣ *हर बात पर झगड़ा करना*
*कई लोग गर्म मिजाज के होते हैं। छोटी-छोटी सी बातों पर भड़क जाते हैं और लड़ने-झगड़ने  लगते हैं । छोटी-छोटी सी बातों पर गुस्सा होना या दूसरों से लड़ने लगना मनुष्य की सबसे बुरी आदतों में से एक मानी जाती है। जो मनुष्य इस तरह के स्वभाव का होता है, उसे अपनी आदत की वजह से कई बार सभी के सामने शर्मिदा होना पड़ता है। ऐसे स्वभाव की वजह से वे भविष्य में मिलने वाले कई अवसरों को भी खो देते हैं।*

Saturday, November 14, 2015

मुहूर्त विचार (www.AstroRrachita.in)

मुहूर्त विचार

आम भाषा में हम जिसे शुभ और अशुभ समय कहते हैं ज्योतिषशास्त्र की भाषा में वह समय ही मुहूर्त कहलाता है.ज्योतिषशास्त्र कहता है किसी भी कार्य की सफलता की आधी गारंटी तभी मिल जाती है जब कोई कार्य शुभ मुहूर्त में किया जाता है.यही कारण है कि हमें जीवन में मुहूर्त का ध्यान रखकर कोई कार्य शुरू करना चाहिए.

जैसे किसी रोग विशेष के लिए विशेष दवाई खानी होती है ठीक उसी प्रकार कार्य विशेष के लिए अलग अलग शुभ मुहूर्त होता है. प्राचीन काल में यज्ञादि कार्यों के लिए मुहूर्त का विचार किया जाता था परंतु जैसे जैसे मुहूर्त की उपयोगिता और विलक्षणता से हम मनुष्य परिचित होते गये इसकी उपयोगिता दैनिक जीवन में बढ़ती चली गयी. मुहूर्त में विश्वास रखने वाले व्यक्ति कोई भी कदम उठाने से पहले मुहूर्त का विचार जरूर करते हैं.

जिन व्यक्तियो की जन्म कुण्डली नहीं है या उनमें किसी प्रकार का कोई दोष है वैसे व्यक्तियों के लिए भी मुहूर्त बहुत अधिक लाभप्रद होता है. अक्सर देखा देखा गया है कि ऐसे व्यक्ति भी शुभ मुहूर्त में कार्य करके सफल हुए हैं. आम जीवन में मुहूर्त के महत्व पर ज्योतिषशास्त्र कहता है कि जिन व्यक्तियों की कुण्डली उत्तम है वह भी अगर शुभ मुहूर्त का विचार करके कार्य नहीं करें तो उनकी सफलता में भी बाधा आ सकती है अत: मुहूर्त हर किसी के लिए आवश्यक है. विवाह के संदर्भ में तो मुहूर्त का विचार बहुत ही आवश्यक माना गया है. विवाह को नया जन्म माना जाता है, यह नया जीवन कैसा होगा वर वधू के जीवन में किस प्रकार की स्थिति रहेगी यह सब विवाह मुहूर्त देखकर ज्ञात किया जा सकता है.  

मुहूर्त के लिए आवश्यक तत्व

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार मुहूर्त विचार में तिथि के साथ लग्न और नक्षत्र विचार भी आवश्यक होता है. अगर आपको शुभ कार्य करना है तो शुभ और कोमल नक्षत्र में कार्य शुरू करना  चाहिए इसी प्रकार क्रूर कार्य के लिए कठोर और क्रूर नक्षत्रों का विचार किया जाना चाहिए. सफल मुहूर्त के लिए लग्न का शुद्ध होना भी आवश्यक माना गया है अत: मुहूर्त का विचार करते समय लग्न की शुद्धि का भी ध्यान रखना चाहिए अगर नवमांश भी शुद्ध हो तो इसे सोने पे सुहागा कहा जाना चाहिए.

ध्यान देने वाली बात है कि मुहूर्त की सफलता के लिए यह देखना चाहिए कि अष्टम भाव में कोई ग्रह नहीं हो और लग्न स्थान में शुभ ग्रह विराजमान हो. अगर ऐसी स्थिति नहीं बन रही है तो देखना चाहिए कि त्रिकोण एवं केन्द्र में शुभ ग्रह हों तथा तीसरे, छठे, ग्यारहवें भाव में पाप ग्रह हों. उत्तम मुहूर्त का विचार करते समय यह भी देखना चाहिए कि लग्न, चन्द्रमा और कार्य भाव पाप कर्तरी में नहीं हों अर्थात लग्न चन्द्र से दूसरे तथा बारहवें भाव में पाप ग्रह नहीं हों.

मुहूर्त में सावधानी

मुहूर्त के अन्तर्गत कुछ विशेष प्रकार की सावधानियों का जिक्र किया गया है, जिसके अनुसार रिक्ता तिथियों यानी चतुर्थी, नवमी एवं चतुदर्शी के दिन रोजगार सम्बन्धी कोई भी नया काम नहीं शुरू करना चाहिए. शुभ एवं मांगलिक कार्य अमावस्या तिथि में शुरू नहीं करना चाहिए. रविवार, मंगलवार एवं शनिवार के दिन समझौता एवं सन्धि नहीं करनी चाहिए. दिन, तिथि व नक्षत्र का योग जिस दिन 13 आये उस दिन उत्सव का आयोजन नहीं करना चाहिए. नन्दा तिथियों एवं प्रतिपदा, षष्ठी और एकादशी तिथि के दिन नवीन योजना पर कार्य शुरू नहीं करना चाहिए. कोई ग्रह जब उदय या अस्त हो तो उसके तीन दिन पहले और बाद में नया काम नहीं करना चाहिए. जन्म राशि और जन्म नक्षत्र का स्वामी जब अस्त, वक्री अथवा शत्रु ग्रहों के बीच हों तब आय एवं जीवन से जुड़े विषय को विस्तार नहीं देना चाहिए. मुहूर्त में क्षय तिथि का भी त्याग करना चाहिए. असफलता से बचने के लिए जन्म राशि से चौथी, आठवीं, और बारहवीं राशि पर जब चन्द्र हो उस समय नया काम शुरू नहीं करना चाहिए. देवशयन काल में बच्चों को स्कूल में दाखिला नहीं दिलाना चाहिए. बुधवार के दिन उधार देना व मंगलवार को उधर लेना मुहूर्त की दृष्टि से शुभ नहीं माना गया है. नये वाहन खरीदते समय ध्यान रखना चाहिए कि आपकी राशि से चन्द्रमा घात राशि पर मौजूद नहीं हो.

मुहूर्त सार

जीवन में मुहूर्त के महत्व से इंकार नहीं किया जा सकता है. किसी व्यक्ति की सफलता, असफलता और जीवन स्तर में परिवर्तन के संदर्भ में मुहूर्त की महत्ता को अलग नहीं किया जा सकता है. हमारे जीवन से जुड़े 16 संस्कारों एवं दैनिक कार्यकलापों के संदर्भ में भी मुहूर्त की बड़ी मान्यता है जिसे हमें स्वीकार करना होगा.

Monday, May 11, 2015

Remedies for Rahu

www.AstroRrachita.in for complete analysis and remedies in ASTROLOGY, TAROT AND VASTU

Rahu

For Rahu related problems and during the dasa or antardasa of Rahu:



1. Worship Bhairava or lord Shiva.

2. Recite the Kalabhairav asthakam.

3. Japa of the rahu beeja mantra: Om bhram bhreem bhroum sah rahave namah, 18000 times in 40 days.

4. Recite the Rahu stotra:
Ardha Kaayam maha veryam chandraditya vimardhanam
Simhika garbha sambhutam tam rahum pranamamyaham.


5. Donate: Udad dal or coconut on Saturday. Order Shanti Daana online

6. Fasting on Saturdays.

7. Pooja: Bhairav or Shiva or Chandi pooja.

8. Wear An 8 mukhi Rudraksha.

9. One of the best remedies for rahu is reciting the first chapter of Durga Saptasati.

Monday, February 16, 2015

Your best substance to please lord Shiva

17th Feb - Shivratri. The abhishekd  for shivratri is most beneficial when done as per your moon sign.

ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत राशि अनुसार कुछ विशेष उपाय किए जाएं तो जल्दी ही महादेव की कृपा प्राप्त हो सकती है।

मेष- इस राशि के लोग महाशिवरात्रि के दिन जल में गुड़ मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें।

वृषभ- इस राशि के लोगों के लिए दही से भगवान शिव का अभिषेक शुभ फल देता है।

मिथुन- इस राशि का लोग गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक l

कर्क- इस राशि के शिवभक्त अपनी राशि के अनुसार शक्कर मिला हुआ दूध भगवान शिव को चढ़ाएं।

सिंह- सिंह राशि के लोग लाल चंदन के जल से शिव जी का अभिषेक करें

कन्या- इस राशि के लोगों को विजया(भांग) मिश्रित जल से भगवान शिव का अभिषेक

तुला- इस राशि के लोग भगवान शिव का गाय के घी में इत्र मिलाकर अभिषेक करें।

वृश्चिक- शहद मिश्रित जल से भगवान शिव का अभिषेक वृश्चिक राशि के लोगों के लिए शीघ्र फल देने वाला माना जाता है।

धनु- इस राशि के लोगों को दूध में केसर मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए।

मकर- आप अपनी राशि के अनुसार तिल्ली के तेल से भगवान शिव का अभिषेक करें

कुंभ- इस राशि के व्यक्तियों को महाशिवरात्रि के दिन नारियल के पानी या सरसों के तेल से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए।

मीन- इस राशि के लोग महाशिवरात्रि के दिन पानी में केसर मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें।

सुखी , स्वस्थ और समान्नित जीवन

     ✨ www.Astrorrachita.in✨

Friday, December 12, 2014

Feng Shui and Aroma List

Aroma Therapy is a simple and pleasant way to bring a missing Fengshui element into your home.

Lavender: a relaxing smell that brings calmness to all thosearound.have a lavender candle burning during big family functions.

Lemon: an uplifting smell that brings clarity. Great to use when you are studying. Also excellent to give your home a sparkling, clean smell.

Eucalyptus: A good scent to keep colds at bay during the winter season.the smell is invigorating and helps to reduce congestion.

Tea Tree: a great oil to be used as a disinfectant in your mop water. You can also add lemon oil to get that light, clean smell.

Fragrant flowers like Gardenias and Lilacs are great for stimulating energy.

Given below are some more common element aromas that are easy to find and generally inexpensive.

WOOD ELEMENT(GREEN): Chamomile, Clary Sage, Eucalyptus, sweet marjoram

FIRE ELEMENT(SPICY): Sweet basil, clove, cinnamon, black pepper, coriander

EARTH ELEMENT (EARTHY): Sage, sandalwood, pine, frankincense, cedar

METAL (CITRUS): Orange, Lemon, grapefruit, tangerine, Citronella, bergamot

WATER ELEMENT: Floral lavender, Ylang Ylang, Violet, Rose, Geranium

Play with the scents and identify your reactions to the different smells. The uplifting lilac may depress you coz it triggers a past painful memory. Listen to your intuition and it will guide you.

Ach. Rrachita Gupta

Monday, December 08, 2014

Trees to Be planted near Home for Good and Evil Results

THE 5 ELEMENTS (PANCHMAHABHOOTS) rendered by Nature are as useful for environment as they are for us.












TREES TOO CAN BE AUSPICIOUS OR INAUSPICIOUS AS PER THE DIRECTION IN WHICH THEY ARE PLANTED. IT HAS BEEN MENTIONED IN DETAIL IN THE VAASTU CLASSICAL SCRIPTURES.

EAST  DIRECTION


  • PEEPUL IN EAST - FEAR AND DESTITUTION
  • BANYAN IN EAST -  FULFILLMENT OF DESIRES
SOUTH EAST

  • POMEGRANATE IN S.E. - AUSPICIOUS
  • PEEPAL, BANYAN, PAKAR AND GULAR IN S.E. -  AGONY AND DEATH
SOUTH
  • PAKAR IN SOUTH-DISEASE AND DEFEAT
  • GULAR IN SOUTH -  AUSPICIOUS
  • BASIL (TULSI) IN SOUTH OF HOUSE - PANGS OF DEATH
SOUTHWEST
  • IMLI - AUSPICIOUS
WEST
  • BANYAN IN WEST - DEATH OF WIFE AND SON
  • MANGO IN WEST - LOSS OF WEALTH
  • PEEPAL IN WEST  - AUSPICIOUS

NORTH WEST 
  • WOOD APPLE (BEL) - AUSPICIOUS
NORTH
  • GULAR IN NORTH - EYE PROBLEM
  • PAKAR/KATECHU IN NORTH -   AUSPICIOUS
NORTH EAST
  • ANWALA - AUSPICIOUS
  • JACK FRUIT - AUSPICIOUS