Thursday, April 27, 2017

various essential oils and their uses

Here we have a list of various essential oils and their uses.
Anise Oil: Will help to increase clairvoyance, purification and protection. Great for purification rituals
Benzoin Oil: Mainly used in purification rituals and prosperity spells, you can also add benzoin to  any oil blend as it also acts like a preservative.
Camphor Oil: Divination, prophetic dreams, psychic awareness, etc it is great to use in rituals to banish ill health.
Cinnamon Oil: Is used for astral projection, prosperity, riches and lust potions and is used in moon rituals.
Sage Oil: Is great to be used for protection, cleansing from negativity, banishing rituals and to remove bad spirits.
Clove Oil: Used in banishing rituals, also will enhance wisdom, ward of negative thoughts, and also for inspiration.
Dragon’s Blood Oil: Used mainly in love attraction potions, exorcism and protection rituals.
Eucalyptus Oil: Great for purifying, healing etc and is great to be used as an anointing oil and for purification rituals.
Frankincense Oil: Use for spirituality, exorcism, purification, and in luck and protection rites.
Ginger Oil: Used in Success spells, or to ensure the success of love and prosperity spells.
Jasmine Oil: Used in love and money spells, helps with dreaming, hold attraction.
Lavender Oil:  Is widely used in cleansing rituals, healing and love.
Lemongrass Oil: Provides a person with psychic mental clarity
Lime Oil: Used to increase energy, fidelity and loyalty, also used to keep a relationship faithful.
Lotus Oil: Assists with elevating physical awareness, protection, great for anointing and is very cleansing.
Orange Oil: Will help to attract men, peace, personal power, luck.
Patchouli Oil: Assists in mastering skills, growth, love and physical attraction
Peppermint Oil: Gives energy, mental stimulant, enhances vitality, great for anointing.
Pine Oil: Grounding, strengthening cleansing for rituals and sacred spaces.
Sandalwood Oil: Assists in spirituality, self healing, healing rituals to banish illness and to ward from disease.
Vanilla Oil: Lust, mental powers, sexual prowess, personal power rituals.
Ylang-Ylang Oil: Use to bring peace, and for love and sex spells, wear on the body, blend with sweet oils.

Monday, March 27, 2017

cleanse your Karmas in 4 simple steps :ЁЯМЯ⭐ЁЯМ╕

✨✨✨✨🌸☘🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🌟A power prayer before going to bed to cleanse your Karmas in 4 simple steps :🌟⭐🌸✨✨✨🍃🍃🍃✨✨✨✨✨

Step 1.
Remain in Gratitude 🙏:

Divine Thanks  to The Universe for blessing me with everything that I have got in my life today. Thank you! Thank you ! Thank you!

Step 2
Ask for Forgiveness:

Right from my FIRST birth in all my lifetimes till now all those beings, things, souls whom I have hurt knowingly or unknowingly, I am "SORRY" for that, Please FORGIVE me, Thank You, I love you and bless you from my heart for your Highest Good in life

Step 3
FORGIVE OTHERS

All those beings,  souls who have hurt me frm my first birth in all my lifetimes till nw I "FORGIVE" them fm my heart forever and release them from any oaths, ya ny curses if any, given knowingly, unknowingly to them.

Step 4

SELF FORGIVENESS:

I "FORGIVE" myself and release myself from any guilt, if any. I love and thank every cell of my body that supported and loved me from my first birth till nw.

THANK YOU THANK YOU THANK YOU🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃

🌟🌟🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃

Friday, March 17, 2017

"рджुрд░्рдЧा рдкूрдЬा рдХे рдиौ рджिрди NAVRATRAS MARCH APRIL 2017

"दुर्गा पूजा के नौ दिन तक देवी दुर्गा का पूजन, दुर्गा सप्तशती का पाठ इत्यादि धार्मिक किर्या पौराणिक कथाओं में शक्ति की अराधना का महत्व व्यक्त किया गया है।

चैत्र शुक्ल पक्ष के नवरात्रों का आरंभ वर्ष 28 मार्च 2017 के दिन से होगा। इसी दिन से हिंदु नवसंवत्सर का आरंभ भी होता है। चैत्र मास के नवरात्र को ‘वार्षिक नवरात्र’ कहा जाता है। हिन्दू धर्म में माता दुर्गा को आदिशक्ति कहा जाता है। शक्तिदायिनी मां दुर्गा की आराधना के लिए साल के दो पखवाड़े बेहद महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। यह दो समय होते हैं चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र। चैत्र नवरात्र चैत्र माह में मनाया जाता है। जबकि शारदीय नवरात्र आश्विन माह में मनाया जाता है।
इस साल चैत्र नवरात्र 28 मार्च से शुरू होंगे और 05 अप्रैल को खत्म होंगे। चैत्र नवरात्र की मुख्य तिथियां निम्न हैं:
28 मार्च 2017 : इस दिन घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 08 बजकर 26 मिनट से लेकर 10 बजकर 24 मिनट तक का है। नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है।
29 मार्च 2017 : नवरात्र के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है।
30 मार्च 2017 : नवरात्र के तीसरे दिन देवी दुर्गा के चन्द्रघंटा रूप की आराधना की जाती है।
31 मार्च 2017): इस साल 31 तारीख को माता के चौथे स्वरूप देवी कूष्मांडा जी की आराधना की जाएगी।
1 अप्रैल 2017 : नवरात्र के पांचवें दिन भगवान कार्तिकेय की माता स्कंदमाता की पूजा की जाती है।
2 अप्रैल 2017 :नारदपुराण के अनुसार शुक्ल पक्ष यानि चैत्र नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विधान है।
3 अप्रैल 2017 :  नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का विधान है।
04 अप्रैल 2017: नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन कई लोग कन्या पूजन भी करते हैं।
05 अप्रैल 2017 : नौवें दिन भगवती के देवी सिद्धदात्री स्वरूप का पूजन किया जाता है। सिद्धिदात्री की पूजा ��

Tuesday, March 07, 2017

рдкीрдкрд▓ рдХी рдкूрдЬा рд╕े рд▓ाрдн pipal tree as astrology remedy

पीपल की पूजा से  लाभ और अनेक समस्याओं का निवारण
     
हिन्दू धर्म में पीपल वृक्ष को देवों का देव कहा गया है. स्वयं कृष्ण ने गीता में कहा है कि मैं वृक्षों में पीपल हूं. जिसने भी इस वृक्ष की सेवा श्रद्धा भाव से की है, उसे लाभ की अनुभूति अवश्य हुई है. आप भी आने वाले शुक्लपक्ष के शनिवार से पीपल के वृक्ष की सेवा शुरू करके अनेक प्रकार की समस्याओं से छुटकारा पाकर सुखी व समृद्ध जीवन गुजार सकते है

उपाय
पीपल के वृक्ष की प्रत्येक शनिवार को (दूध, जल, शक्कर, शहद, काले तिल, गंगा जल और गुड़ इन सभी चीजों को जल में मिलायें) तत्पश्चात यह मीठा जल पीपल वृक्ष पर चढ़ायें और आटे का दीपक जलाकर उसमें सरसों का तेल, एक लोहे की कील व 11 साबुत उड़त के दाने डालकर धूप दीप के साथ आर्पित करें बायें हाथ से पीपल के वृक्ष की जड़ को स्पर्श कर अपने माथे में लगायें व 11 बार परिक्रमा करें

यह उपाय करने से कुछ ही समय पश्चात आपको शनिदेव की कृपा मिलने लगेगी. इस उपाय को करने से निम्न प्रकार की समस्याओं से
मुक्ति मिलेगी

यदि कोई व्यक्ति लगातार अस्वस्थ्य रह रहा हो अथवा अल्पायु योग हो तो वह उपरोक्त उपाय को करके लाभ प्राप्त कर सकता है

यदि आपको शत्रु अधिक परेशान कर रहें है, तो आप उपरोक्त उपाय के साथ-साथ पीपल वृक्ष के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें. ऐसा करने से शत्रुओं का नाश होगा

यदि किसी कन्या की कुंडली में प्रबल वैधव्य यानी विधवापन होने का  योग हो तो उसे उपरोक्त उपाय को कम से कम 1 वर्ष तक करने से लाभ अवश्य प्राप्त होगा

यदि किसी के जन्मपत्री में कालसर्प योग हो तो उपरोक्त उपाय करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलेगी

देव गुरू बृहस्पति की अशुभता समाप्त करने के लिए केले के वृक्ष के साथ पीपल के वृक्ष की भी निममित सेवा करें तो लाभ होगा

किसी शुभ मुहूर्त में पीपल के पौधे को लगाने से तथा उसकी नियमित सेवा करने से आर्थिक स्थिति अच्छी बनी रहती है

यदि आपको कोई विशेष कार्य सिद्ध करना है, तो  के दिन उपरोक्त उपाय करने से पूर्व अपना कार्य होने का निवेदन कर पीपल वृक्ष के समक्ष मिट्टी में एक बड़ी लोहे की कील गाड़ दें और कार्य सिद्ध होने के पश्चात निकाल दें

यदि आपको हाथ-पैरों में अथवा कमर के निचले हिस्से में दर्द बना रहता है तो आप काले कपड़े में पीपल के वृक्ष की जड़ व लकड़ी को रखकर अपने बिस्तर के सिरहाने रख लें और साथ में पीपल वृक्ष की सेवा करते रहें. कुछ समय बाद आप दर्द से मुक्त हो जायेंगे

कैंसर जैसे असाध्य रोग में भी यदि उपरोक्त उपाय को श्रद्धा पूर्वक किया जाये तो लाभ मिलेगा.

यदि आपको निरन्तर हानि उठानी पड़ रही है तो प्रत्येक शनिवार को पीपल के एक नया पत्ते पर ऊँ लिखकर उस पत्ते को पीपल की लकड़ी के साथ धन रखने के स्थान पर रख दें. यह उपाय कम से कम 8 शनिवार तक करना होगा. कुछ समय में ही आपको लाभ होने लगेगा.और खर्चों मे कमी होगी

प्रथम सोमवार को पीपल वृक्ष के नीचे शिव प्रतिमा अथवा शिवलिंग को रख कर नियमित “ऊँ नम: शिवाय” का जाप कर जल से आभिषेक करें. आपके परिवार में सुख व समृद्धि की हमेशा  रहेगी.
         🙏 jyotishvani 🙏

Saturday, March 04, 2017

рддिрд▓рдХ рд▓рдЧाрдиे рдХे рдлाрдпрджे

तिलक लगाने के फायदे

     किसी के माथे पर तिलक लगा देखकर मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर टीका लगाने से फायदा क्या है? क्या यह महज दूसरों के सामने दिखावे के मकसद से किया जाता है या फिर तिलक धारण का कुछ वैज्ञानिक आधार भी है? दरअसल, टीका लगाने के पीछे आध्यात्म‍िक भावना के साथ-साथ दूसरे तरह के लाभ की कामना भी होती है l

आइये जानते हैं तिलक लगाने के क्या फायदे होते हैं l

आम तौर पर चंदन, कुमकुम, मिट्टी, हल्दी, भस्म आदि का तिलक लगाने का विधान है. अगर कोई तिलक लगाने का लाभ तो लेना चाहता है, पर दूसरों को यह दिखाना नहीं चाहता, तो शास्त्रों में इसका भी उपाय बताया गया है. कहा गया है कि ऐसी स्थ‍िति में ललाट पर जल से तिलक लगा लेना चाहिए l

इससे लोगों को प्रत्यक्ष तौर पर कुछ लाभ बड़ी आसानी से मिल जाते हैं. आगे तिलक धारण करने के फायदों की चर्चा की गई है l

1. तिलक करने से व्यक्त‍ित्व प्रभावशाली हो जाता है. दरअसल, तिलक लगाने का मनोवैज्ञानिक असर होता है, क्योंकि इससे व्यक्त‍ि के आत्मविश्वास और आत्मबल में भरपूर इजाफा होता है l

2. ललाट पर नियमित रूप से तिलक लगाने से मस्तक में तरावट आती है. लोग शांति व सुकून अनुभव करते हैं. यह कई तरह की मानसिक बीमारियों से बचाता है l

3. दिमाग में सेराटोनिन और बीटा एंडोर्फिन का स्राव संतुलित तरीके से होता है, जिससे उदासी दूर होती है और मन में उत्साह जागता है. यह उत्साह लोगों को अच्छे कामों में लगाता है l

4. इससे सिरदर्द की समस्या में कमी आती है l

5. हल्दी से युक्त तिलक लगाने से त्वचा शुद्ध होती है. हल्दी में एंटी बैक्ट्र‍ियल तत्व होते हैं, जो रोगों से मुक्त करता है l

6. धार्मिक मान्यता के अनुसार, चंदन का तिलक लगाने से मनुष्य के पापों का नाश होता है. लोग कई तरह के संकट से बच जाते हैं. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, तिलक लगाने से ग्रहों की शांति होती है l

7. माना जाता है कि चंदन का तिलक लगाने वाले का घर अन्न-धन से भरा रहता है और सौभाग्य में बढ़ोतरी होती है l
                 🙏 jyotishvani 🙏

Wednesday, March 01, 2017

рд╡िрд╡ाрд╣ рдирд╣ीं рд╣ो рд░рд╣ा рд╣ो рдЕрдерд╡ा рд╣ोрдиे рдоें рджेрд░ी рд╡ाрд╕्рддु рджोрд╖

🌷 *वास्तु शास्त्र* 🌷

🏡 *यदि घर में वास्तु दोष हो तो उसके कारण परिवार के सभी सदस्यों पर कोई न कोई बुरा प्रभाव जरूर पड़ता है। यह दुष्प्रभाव किसी भी रूप में हो सकता है। यदि परिवार में किसी का विवाह नहीं हो रहा हो अथवा होने में देरी हो रही है,तो इसका कारण भी वास्तु दोष हो सकता है। यदि आप भी अपनी संतान के विवाह में हो रही देरी से परेशान हैं,तो एक बार घर के वास्तु दोषों पर जरूर विचार करें और आगे बताए गए उपाय करें-*
➡ *विवाह योग्य युवक-युवती जिस पलंग पर सोते हैं, उसके नीचे बेकार सामान नहीं रखना चाहिए इससे विवाह योग में बाधा होती है ।*
➡ *विवाह योग्य युवक-युवतियों को उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित कमरे में रहना चाहिए ।इससे उनके विवाह के प्रस्ताव आने लगते हैं ।*
➡ *कमरे एवं दरवाजे का रंग गुलाबी, हल्का पीला या सफेद  (चमकीला) हो तो विवाह में आ रही परेशानियाँ दूर हो जाती हैं ।*
➡ *मंगल दोष हो तो दरवाजे का रंग लाल अथवा गुलाबी रखने से मंगल दोष का प्रभाव कम होता है व विवाह के प्रस्ताव आने लगते हैं ।*
➡ *घर आए अतिथियों को इस प्रकार बैठाएं कि उनका मुख घर में अंदर की ओर हो । इससे विवाह के योग बनने की संभावना बढ़ जाती है ।*

Monday, February 27, 2017

Increase money. Become rich. Ideas in astrology and numerology

पर्स में नहीं रखना चाहिए ऐसी चीजें
1 ज्‍योतिष के अनुसार पर्स में ऐसी वस्तुएं हरगिज न रखें जो नकारात्मक ऊर्जा को संचारित करती हैं।
2 पर्स में किसी भी प्रकार के बिल या भुगतान से संबंधित कागज नहीं रखने चाहिए।
3 इसके साथ ही पर्स में किसी भी प्रकार की अपवित्र वस्तु भी न रखें।
4 जो वस्तुएं फिजूल हैं, जिनका कोई उपयोग नहीं है उन वस्तुओं को तुरंत ही पर्स से बाहर कर देना चाहिए।
5 इनके अतिरिक्त पर्स में धार्मिक और पवित्र वस्तुएं रखें, जिनसे सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जिन्हें देखकर हमारा मन प्रसन्न होता है।
6 खाने-पीने की चीजें भी पर्स में नहीं रखना चाहिए। जैसे पाउच, चॉकलेट्स आदि। पर्स में दवाइयां भी नहीं रखनी चाहिए।
7 ध्यान रखें पर्स में देवी-देवताओं की फोटो रखें तो खुद को अपवित्र स्थानों से दूर रखें और अधार्मिक कर्मों से बचें। पर्स में किसी भी प्रकार की अपवित्र वस्तु न रखें।
8 देवी लक्ष्मी के पूजन में रखे हुए गौमती चक्र को पूजा के बाद पर्स में रखना बहुत ही शुभ माना जाता है।
9 महालक्ष्मी की प्रतीक पीली कौडिय़ां पर्स में रखी जा सकती है। यह भी धन को आपकी ओर आकर्षित करती हैं।
10 पैसा रखने के लिए सभी के पास पर्स रहता है, अत: पर्स के संबंध में एक सटीक उपाय है जिसे अपनाने से कभी भी आपका पर्स खाली नहीं रहेगा। साथ ही फिजूल खर्चों में कमी आएगी। इस उपाय में आपको किसी भी शुभ मुहूर्त या अपने जन्म दिन पर माता-पिता से एक नोट पर केसर से तिलक लगवाएं। नोट कैसा भी हो सकता है बड़ा या छोटा। केसर का तिलक लगवाने के बाद माता-पिता के चरण स्पर्श करें और आशीर्वाद प्राप्त करें।
ऐसा हो आपका पर्स
मूलांक 1
अपने लाल रंग के वॉलेट या पर्स में एक 100 और 20 रुपये के एक एक नोट तथा 1 रुपये के सात नोट को नारंगी रंग के कागज में रखें. एक ताम्बे का सिक्का भी रखें।
मूलांक 2
अपने सफेद रंग के वॉलेट या पर्स में एक रुपये के दो और 20 रुपये का एक नोट चाँदी की तार में लपेट कर रखें. एक चान्दी का सिक्का भी रखें.
मूलांक 3
अपने पीले या मेहन्दी रंग के वॉलेट या पर्स में दस रुपये के तीन नोट तथा 1 रूपये के तीन नोट को पीले रंग के कागज में रखें. एक गोल्डन फॉइल का तिकोना टुकडा भी रखें.
मूलांक 4
अपने भूरे रंग के वॉलेट या पर्स में दस रुपये के दो और 20 रुपये का दो नोट चन्दन का इत्र लगाकर रखें. अपने घर की चुट्की भर मिट्टी भी रखें.
मूलांक 5
अपने हरे रंग के वॉलेट या पर्स में पाँच रुपये का एक और 10 रुपये के पाँच नोट एक हरे कागज में रखें. एक बेल का पत्ता भी रखें.
मूलांक 6
अपने चमकीले सफेद रंग के वॉलेट या पर्स में पाँच सौ रुपये का और 100 रुपये का एक एक नोट तथा 1 रुपये के छ: नोट को सिल्वर फॉइल में रखें. एक पीतल का सिक्का भी रखें.
मूलांक 7
अपने बहुरंगी वॉलेट या पर्स में एक रुपये के सात और 20 रुपये का एक नोट नारंगी रंग के कागज में रखें. एक मछली का चित्र अंकित किया हुआ सिक्का भी रखें.
मूलांक 8
अपने नीले रंग के वॉलेट या पर्स में 100 रुपये का एक और 20 रुपये के चार नोट नीले रंग के कागज में रखें. एक मोर पंख का टुकडा भी रखें.
मूलांक 9
अपने नीले और नारंगी रंग के वॉलेट या पर्स में पाँच रुपये का एक और दो रुपये के दो नोट चमेली का इत्र लगे नारंगी रंग के कागज में रखें. एक पीतल का सिक्का भी रखें.
11 यदि आप भी किसी ग्रह बाधा से पीडि़त हैं और आपके पर्स में अधिक समय तक पैसा नहीं टिकता तो निम्र उपाय करें
किसी भी शुभ मुहूर्त या अक्षय तृतीया या पूर्णिमा या दीपावली या किसी अन्य मुहूर्त में सुबह जल्दी उठें। सभी आवश्यक कार्यों से निवृत्त होकर लाल रेशमी कपड़ा लें। अब उस लाल कपड़े में चावल के 21 दानें रखें। ध्यान रहें चावल के सभी 21 दानें पूरी तरह से अखंडित होना चाहिए यानि कोई टूटा हुआ दान न रखें। उन दानों को कपड़े में बांध लें। इसके बाद धन की देवी माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजन करें। पूजा में यह लाल कपड़े में बंधे चावल भी रखें। पूजन के बाद यह लाल कपड़े में बंधे चावल अपने पर्स में छुपाकर रख लें।
ऐसा करने पर कुछ ही समय में धन संबंधी परेशानियां दूर होने लगेंगी। ध्यान रखें कि पर्स में किसी भी प्रकार की अधार्मिक वस्तु कतई न रखें। इसके अलावा पर्स में चाबियां नहीं रखनी चाहिए। सिक्के और नोट अलग-अलग व्यस्थित ढंग से रखे होने चाहिए। किसी भी प्रकार की अनावश्यक वस्तु पर्स में न रखें। इन बातों के साथ ही व्यक्ति को स्वयं के स्तर भी धन प्राप्ति के लिए पूरे प्रयास करने चाहिए।
12 अपनी राशी के अनुसार रखे पर्स का रंग
मेष, सिंह, और धनु राशि वाले अपना पर्स लाल या नारंगी रंग का रखे तो लाभ होगा
वृष, कन्या, और मकर राशि वालों को भूरे रंग का पर्स तथा मटमैले रंग का पर्स बहुत फायदा पंहुचायगा
मिथुन, तुला, और कुम्भ राशि वाले यदि नीले रंग व सफ़ेद रंग का प्रयोग करते है तो मानसिक स्थति के साथ साथ धन के के आगमन के रास्ते भी खुलेंगे
कर्क, वृश्चिक, और मीन राशि को तो हमेशा हरा रंग और सफ़ेद रंग का प्रयोग अपने पर्स में करना लाभदायक रहेगा
13 सभी चाहते हैं कि उनका पर्स हमेशा पैसों से भरा रहे और फिजूल खर्च न हो। ज्यादा पैसा कमाने के लिए कड़ी मेहनत के साथ अच्छी किस्मत भी महत्व रखती है। कुछ परिस्थितियों में मेहनत के बाद भी पर्याप्त धन प्राप्त नहीं हो पाता या खर्चों की अधिकता की वजह से बचत नहीं हो पाती।
14 कुछ लोग पर्स में ही चाबियां भी रखते हैं, चाबियां रखना भी अशुभ ही माना जाता है इसके लिए पर्स में किसी भी प्रकार की अपवित्र वस्तु भी न रखें। जो वस्तुएं फिजूल हैं, जिनका कोई उपयोग नहीं है उन वस्तुएं तुरंत ही पर्स से बाहर कर दें।
15 क्योंकि मेरे विचार से हम सब के जीवन में पर्स एक महत्वपूर्ण भूमिका रखता है. जैसे मासिक वेतन मिला तो गया पर्स में अर्थात पूरे महीने की आमदनी को हमने पर्स के हवाले कर दिया. वस्तुओं के खरीद-फरोख्त में भी पर्स सामने आता है किसी वस्तु को खरीदने से नुक्सान हुआ तो किसी में फायदा हुआ या कभी पर्स पाकेटमार ने पार कर दिया तो कभी पर्स में रखे धन की बरकत खत्म हो जाती है सुबह रुपये रखो और शाम आते ही पर्स खाली. इन्हीं बातो को ध्यान में रख कर यदि हम पर्स को कुछ नियमों के अनुसार रखे तो हमे पर्स के द्वारा भी बरकत मिल सकती है और धन के नुक्सान से बच सकते है.
16 पर्स में सिक्के और नोट दोनों को ही अलग-अलग स्थानों पर रखना चाहिए। इसके अलावा पर्स में मृत व्यक्तियों के चित्र रखना भी शुभ नहीं माना जाता है। अत: इस प्रकार के चित्रों को भी पर्स में नोटों के साथ नहीं रखें।
17 एक जमानें में तिजौरी का घर,दूकान आदि में बड़ा महत्व होता था क्यों ? क्योंकि वही एकमात्र धन को संग्रह करने का स्थान था. समय बीता और तिजौरी का स्थान धीरे धीरे हटने लगा,परिणाम स्वरूप आज तिजौरी बहुत कम यदा-कदा ही मिलती है. वास्तु में तिजौरी का वर्णन मिलता है. पिछले कई वर्षो से पर्स का चलन बड़ने लगा है और
#पर्स महिलाओं के हाथ में होना एक फैशन का रूप भी बन गया है
पर्स के बिना धन नहीं रखते
18 मेरे अनुभव में तिजौरी और पर्स में कोई विशेष अन्तर नहीं रहा. दैनिक कार्यों में पर्स की महत्ता ज्यादा है, आपके पर्स का आकार, रंग आपके पर्स में रखे हुए सामान आपके जीवन में होने वाली छोटी से छोटी घटना के सूचक होते है.
19 पर्स में किसी भी प्रकार के बिल या भुगतान से संबंधित कागज नहीं रखने चाहिए।
20 अपने पर्स में एक लाल रंग का लिफाफा रखें। इसमें आप अपनी कोई भी मनोकामना एक कागज में लिख कर रखें। वह शीघ्र पूरी होगी।
21 बैग में लाल रेशमी धागे से एक गांठ बांध कर रखें।
22 बैग में शीशा और छोटा चाकु अवश्य रखें।
23 बैग में रुपये पैसे जहां रखते हों वहां पर कौड़ी या गोमती चक्र अवश्य रखें।
24 चाबी को छल्ले में डाल कर रखें। यदि इस छल्ले में लाफिंग बुद्धा या अन्य कोई फेंगशुई का प्रतीक अच्छा रहता है।
25 पर्स में किसी भी प्रकार का पिरामिड रखें। यह आपके लिए लाभदायक होगा।
26 रात्री में सोते समय पर्स कभी भी सिरहाने ना रख कर उसे हमेशा अलमारी में रखें.
27 पर्स में रूपये कभी भी मोड या फोल्ड कर ना रखे.
28 पर्स में कभी भी रुपयों के साथ कोई बिल-रसीद या टिकट ना रखे इससे विवाद बड़ता है .
29 पर्स में सिक्कों की व्यवस्था अलग हो तथा बंद कर के रखें पर्स खोलते समय सिक्का नीचे नहीं गिरना चाहिये.इससे अपव्यय बढता है.
30 अपने पर्स में किसी पूर्णिमा को लाल रेशमी कपडे में चुटकी भर या 21 दाने अखंडित चावल बाँध कर छुपा कर रखने से बेवजह खर्च नहीं होता है. राशी के अनुसार रखे पर्स का रंग
मेष,सिंह, और धनु राशि वाले अपना पर्स लाल या नारंगी रंग का रखे. तो लाभ होगा
वृष,कन्या, और मकर राशि वालों को भूरे रंग का पर्स तथा मटमैले रंग का पर्स बहुत फायदा पंहुचायगा
मिथुन,तुला, और कुम्भ राशि वाले यदि नीले रंग व सफ़ेद रंग का प्रयोग करते है तो मानसिक स्थति के साथ साथ धन के के आगमन के रास्ते भी खुलेंगे.
कर्क,वृश्चिक, और मीन राशि को तो हमेशा हरा रंग और सफ़ेद रंग का प्रयोग अपने पर्स में करना लाभदायक रहेगा


рдкंрдЪрдХ panchak nakshatra in astrology what to do? Avoid?

*सावधान*
*चल रहे पंचक*
🌑🌑🌑🌑🌑🌑🌑🌑🌑🌑
🌑🌑🌑🌑🌑🌑🌑🌑🌑🌑🌑🌑
☆धनिष्ठा का उतरार्ध, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उतरा भाद्रपद व रेवती इन पांच नक्षत्रों ( सैद्धान्तिक रुप से साढेचार) को पंचक कहते है. पंचक का अर्थ ही पांच का समूह है. सरल शब्दों में कहें तो कुम्भ व मीन में जब चन्द्रमा रहते है. तब तक की अवधि को पंचक कहते है. इन्ही को कहीं-कहीं पर धनिष्ठा पंचक (Dhanishtha Panchak) भी कहा जाता है
एक अन्य मत से पंचकों में धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति को अंग दोष होने का विचार किया जाता है. धनिष्ठा नक्षत्र के प्रथम आधे भाग को भी कुछ स्थानों पर शुभ नहीं समझा जाता है. पंचक में पांच कार्य करने सर्वथा वर्जित माने जाते है. इसमें
*1.दक्षिण दिशा की यात्रा*
*2.ईंधन एकत्र करना*
*3. शव का अन्तिम संस्कार*
*4. घर की छत डालना*
*5. चारपाई बनवाना*
शुभ नहीं माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन नक्षत्र समय में इनमें से कोई भी कार्य करने पर, उक्त कार्य को पांच बार दोहराना पड सकता है एक अन्य प्रसिद्ध ग्रन्थ "मुहूर्तगणपति" के अनुसार उक्त कामों के अतिरिक्त स्तम्भ बनवाना या स्तम्भ खडा करना भी इस अवधि में वर्जित होता है.
इसी प्रकार कुछ काम पंचक में करने शुभ फलदायी भी होते है . जैसे कि क़र्ज़ उतरना , दान देना , पूजा पाठ करना, बैंक में पैसा जमा करवाना
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Saturday, February 25, 2017

рд╣рдиुрдоाрди рдЬी рдХे рд╕िंрджूрд░ -рдЧुрд╕्рд╕े рдФрд░ рдЬिрдж рдкрд░ рдХाрдмू рдкाрдпें

गुस्से और जिद्द पर काबू कैसे पायें

हनुमान जी के सिंदूर का प्रयोग कर गुस्से और जिद पर काबू पायें
हर माता – पिता की यही प्रयास करते हैं कि वो अपने बच्चों को अच्छी परवरिश तथा अच्छा जीवन दें. जिसके लिए वो अपने बच्चों की हर इच्छा को पूर्ण कर देते हैं. लेकिन कभी – कभी बच्चों के द्वारा कुछ ऐसी वस्तुओं की मांग की जाती हैं. जिनको पूरा कर पाना उनके माता – पिता के लिए असंभव हो जाता हैं. ऐसी स्थिति में कुछ बच्चे अपने माता – पिता से गुस्सा हो जाते हैं और अपनी मांग की पूर्ति हेतु जिद्द  करते हैं. अगर इसके बाद लगातार बच्चों की बातों को माता – पिता नजरअंदाज करने लगते हैं तो गुस्सा और जिद्द उनके व्यवहार में निहित हो जाता हैं. जिसके बुरे परिणाम का भी कई बार बच्चों के साथ – साथ उनके माता – पिता को सामना करना पड़ता हैं. यदि आपका बच्चा भी जिद्दी हैं और उसे जल्द ही गुस्सा आ जाता हैं. तो नीचे दिए गये उपायों का प्रयोग जरूर करें.
हनुमान चालीसा एक चमत्कारी रामबाण उपाय ...

1.कभी – कभी बच्चे अपनी छोटी – छोटी बातों को मनवाने के लिए जिद्द करने लग जाते हैं. जिससे जिद्द करना उनकी आदत बन जाती हैं. अपने बच्चे की जिद्द करने की प्रवृति को कम करवाने के लिए आप पहले तो बच्चों को आराम से प्यार से समझाएं. अगर वो इसके बाद भी न माने तो नीचे अगला प्रयोग आजमायें. ना ...
ुस्से और जिद्द पर काबू कैसे पायें

2.शास्त्रों के अनुसार यदि कोई बच्चा बहुत ज्यादा जिद्दी हो, छोटी – छोटी बातों पर गुस्सा हो जाता हो, माता – पिता की बात बिल्कुल न सुनता हो, जिद्द के कारण ही जमीन पर लेट जाता हो, चिडचिडापन उसके व्यवहार की मुख्य प्रवृति बन गई हो. तो इसके लिए हनुमान जी के मंदिर में शनिवार और मंगलवार को जाएँ और उनके बायें पैर का सिंदूर लेकर उसके माथे पर लागायें. हर मंगलवार और शनिवार के दिन इस प्रयोग को करने से आपका बच्चा जिद्द करना और गुस्सा करना बिल्कुल छोड़ देगा.

हनुमान जी के सिंदूर का महत्व

हनुमान जी के दोनों पैरों पर लगा सिंदूर बहुत ही प्रभावशाली होता हैं. ऐसा माना जाता हैं कि इस सिंदूर का तिलक जब कोई भी व्यक्ति अपने मस्तिष्क पर लगता हैं. तो हनुमान जी उस व्यक्ति को सद्बुद्धि प्रदान करते हैं. इसीलिए हनुमान जी को बल और बुद्धि का दाता भी माना जाता हैं तथा इसीलिए जो व्यक्ति या बच्चे ज्यादा जिद्दी या गुस्सैल होते हैं. उनके लिए यह सिंदूर बहुत ही उपयोगी सिद्ध होता हैं. हनुमान जी के सिंदूर को लगाने के बाद व्यक्ति का गुस्सा जैसे – एक दम से ही गायब हो जाता हैं और जिद्द धीरे – धीरे ख़त्म हो जाती हैं. हनुमान जी के सिंदूर को लगाने से व्यक्ति को इन दोनों ही चीजों से मुक्ति तो मिलती ही हैं. इसके साथ ही उन्हें पुण्य लाभ भी प्राप्त होता