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Thursday, February 12, 2015
Vastu Basics for your HAPPY HOME by www.Astrorrachita.in
Monday, February 02, 2015
ज्योतिषीय नज़र से जाने टैरो को - www.Astrorrachita.in
माइनर अर्काना बहुत महत्त्वपूर्ण क्युकी यह हमारे इस जनम के क्रियमाण कर्म की तरफ हमें गाइड करता हैं और बताता हैं की प्रारब्ध या पिछले जनम के कार्मिक समस्याओं के बावजूद हम इस जनम में कैसे अपना जीवन खुशियों और शांति से जी सकते हैं.
टैरो और ज्योतिष का सीधा सम्बन्ध
ज्योतिष में जन्मा कुंडली का सर्वाधिक महत्व हैं. यह कुंडली मानव जीवन पर स्थायी प्रभाव डालती हैं. परन्तु फलित ज्योतिष के लिए उतना ही आवश्यक हैं इन् ग्रहों का गोचर स्थिति (ट्रांसिट ) का अध्ययन. और यहाँ कमाल हैं टैरो का जो गोचर के ग्रहो की स्थिति बताता हैं.
मेजर अर्काना के सभी २२ कार्ड्स किसी न किसी गृह या राशि से सम्बन्ध रखते हैं. जैसे मैजिशियन (magician ) कार्ड बुद्ध गृह से, व्हील ऑफ़ फार्च्यून (wheel of fortune ) कार्ड बृहस्पति गृह से, टावर कार्ड (tower ) मंगल गृह से हर्मिट कार्ड (hermit) कन्या राशि से, इत्यादि.
वास्तव में अलावा 0 के मेजर अर्काना के २१ कार्ड्स ज्योतिष की १२ राशियों और ९ ग्रहो(नवग्रहों ) का ही सम्मिलित रूप हैं और इनकी व्याख्या व सन्देश हमारी प्राचीन ज्योतिषीय व्याख्या पर सटीक बैठते हैं.
कुशल टैरो रीडर को ज्योतिष का ज्ञान रखने की चेष्टा करनी चाहिए. टैरो भी अगर गृह, राशि, तत्त्व एवं भावों की दृष्टि से प्रैक्टिस किया जाएं तो आश्चर्यजनक रूप से फलित होता हैं.
आप भी संपर्क कर सकते हैं विस्तृत और जानकारी से परिपूर्ण टैरो रीडिंग, उपायों और कुंडली विवेचना के लिए :
आचार्य रचिता गुप्ता
(वैदिक व के.पी ज्योतिषी , टैरो कार्ड थेरेपिस्ट
अंकशास्त्री , वास्तुशास्त्री )
संपर्क : 9958067960
राजस्थान में कैसे कैसे मंदिर
राजस्थान में कैसे कैसे मंदिर
१. सोरसन (बारां) का ब्रह्माणी माता का मंदिर-
यहाँ देवी की पीठ का श्रृंगार
होता है. पीठ
की ही पूजा होती है !
२. चाकसू(जयपुर) का शीतला माता का मंदिर- खंडित
मूर्ती की पूजा समान्यतया नहीं होती है,
पर शीतला माता(चेचक की देवी)
की पूजा खंडित रूप में होती है !
३. बीकानेर का हेराम्ब का मंदिर- आपने गणेश
जी को चूहों की सवारी करते
देखा होगा पर यहाँ वे सिंह की सवारी करते
हैं !
४. रणथम्भोर( सवाई माधोपुर) का गणेश मंदिर- शिवजी के
तीसरे नेत्र से तो हम परिचित हैं लेकिन यहाँ गणेश
जी त्रिनेत्र हैं !
उनकी भी तीसरी आँख
है.
५. चांदखेडी (झालावाड) का जैन मंदिर- मंदिर
भी कभी नकली होता है ?
यहाँ प्रथम तल पर महावीर भगवान्
का नकली मंदिर है, जिसमें दुश्मनों के डर से प्राण
प्रतिष्ठा नहीं की गई.
असली मंदिर जमीन के भीतर
है !
६. रणकपुर का जैन मंदिर- इस मंदिर के 1444
खम्भों की कारीगरी शानदार है.
कमाल यह है कि किसी भी खम्भे पर
किया गया काम अन्य खम्भे के काम से नहीं मिलता ! और
दूसरा कमाल यह कि इतने खम्भों के जंगल में भी आप
कहीं से भी ऋषभ देव जी के
दर्शन कर सकते हैं, कोई खम्भा बीच में
नहीं आएगा.
७. गोगामेडी( हनुमानगढ़)
का गोगाजी का मंदिर- यहाँ के पुजारी मुस्लिम
हैं ! कमाल है कि उनको अभी तक काफिर
नहीं कहा गया और न
ही फतवा जारी हुआ है !
८. नाथद्वारा का श्रीनाथ जी का मंदिर - चौंक
जायेंगे. श्रीनाथ जी का श्रृंगार जो विख्यात है,
कौन करता है ? एक मुस्लिम परिवार करता है !
पीढ़ियों से. कहते हैं कि इनके पूर्वज
श्रीनाथजी की मूर्ति के साथ
ही आये थे.
९. मेड़ता का चारभुजा मंदिर - सदियों से सुबह का पहला भोग यहाँ के
एक मोची परिवार का लगता है ! ऊंच नीच
क्या होती है ?
१०. डूंगरपुर का देव सोमनाथ मंदिर-
बाहरवीं शताब्दी के इस अद्भुत मंदिर में
पत्थरों को जोड़ने के लिए सीमेंट या गारे का उपयोग
नहीं किया गया है ! केवल पत्थर को पत्थर में
फंसाया गया है.
११. बिलाडा(जोधपुर)
की आईजी की दरगाह -
नहीं जनाब, यह दरगाह नहीं है ! यह
आईजी का मंदिर है, जो बाबा रामदेव
की शिष्या थीं और
सीरवियों की कुलदेवी हैं.
'अभिनव राजस्थान' की 'अभिनव् संस्कृति' में इस
सबको सहेजना है. दुनिया को दिखाना है.
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वर्ष 2015 हिन्दू तीज त्यौहार की सूची
वर्ष 2015 हिन्दू तीज त्यौहार की सूची :
ज्योतिषाचार्य Rrachita
मोबाइल-9958067960
-: जनवरी :- 2015
०१ बृहस्पतिवार पौष पुत्रदा एकादशी
०५ सोमवार पौष पूर्णिमा
०८ बृहस्पतिवार सकट चौथ
१५ बृहस्पतिवार पोंगल , मकर संक्रान्ति
१६ शुक्रवार षटतिला एकादशी
२० मंगलवार मौनी अमावस
२४ शनिवार वसन्त पञ्चमी
२६ सोमवार रथ सप्तमी
२७ मंगलवार भीष्म अष्टमी
३० शुक्रवार जया एकादशी
फरवरी २०१५
०३ मंगलवार माघ पूर्णिमा
१३ शुक्रवार कुम्भ संक्रान्ति
१५ रविवार विजया एकादशी
१७ मंगलवार महा शिवरात्रि
मार्च २०१५
०१ रविवार आमलकी एकादशी
०५ बृहस्पतिवार होली , होलिका दहन
०६ शुक्रवार रंगवाली होली
१४ शनिवार बसोड़ा , शीतला अष्टमी
१५ रविवार मीन संक्रान्ति
१६ सोमवार पापमोचिनी एकादशी
१७ मंगलवार पापमोचिनी एकादशी
२० शुक्रवार सूर्य ग्रहण
२१ शनिवार चैत्र नवरात्रि , गुड़ी पड़वा , युगादी
२२ रविवार गौरीपूजा , गणगौर
२५ बुधवार यमुना छठ
२८ शनिवार राम नवमी
३१ मंगलवार कामदा एकादशी
अप्रैल २०१५
०४ शनिवार हनुमान जयन्ती , चन्द्र ग्रहण
१४ मंगलवार सोलर नववर्ष , मेष संक्रान्ति
१५ बुधवार बरूथिनी एकादशी
२० सोमवार परशुराम जयन्ती
२१ मंगलवार अक्षय तृतीया
२५ शनिवार गंगा सप्तमी
२७ सोमवार सीता नवमी
२९ बुधवार मोहिनी एकादशी
मई २०१५
०२ शनिवार नरसिंघ जयन्ती
०४ सोमवार बुद्ध पूर्णिमा
०५ मंगलवार नारद जयन्ती
१४ बृहस्पतिवार अपरा एकादशी
१५ शुक्रवार वृषभ संक्रान्ति
१७ रविवार वट सावित्री व्रत
१८ सोमवार शनि जयन्ती
२८ बृहस्पतिवार गंगा दशहरा
२९ शुक्रवार निर्जला एकादशी
जून २०१५
०२ मंगलवार वट पूर्णिमा व्रत
१२ शुक्रवार योगिनी एकादशी
१५ सोमवार मिथुन संक्रान्ति
२८ रविवार पद्मिनी एकादशी
जुलाई २०१५
१२ रविवार परम एकादशी
१६ बृहस्पतिवार कर्क संक्रान्ति
१८ शनिवार जगन्नाथ रथयात्रा
२७ सोमवार देवशयनी एकादशी
३१ शुक्रवार गुरु पूर्णिमा
अगस्त २०१५
१० सोमवार कामिका एकादशी
१७ सोमवार हरियाली तीज , सिंह संक्रान्ति
१९ बुधवार नाग पञ्चमी
२६ बुधवार श्रावण पुत्रदा एकादशी
२८ शुक्रवार वरलक्ष्मी व्रत
२९ शनिवार रक्षा बन्धन , नारली पूर्णिमा
सितम्बर २०१५
०१ मंगलवार कजरी तीज
०५ शनिवार कृष्ण जन्माष्टमी
०८ मंगलवार अजा एकादशी
१३ रविवार सूर्य ग्रहण
१६ बुधवार हरतालिका तीज
१७ बृहस्पतिवार गणेश चतुर्थी , कन्या संक्रान्ति , विश्वकर्मा पूजा
१८ शुक्रवार ऋषि पञ्चमी
२१ सोमवार राधा अष्टमी
२४ बृहस्पतिवार परिवर्तिनी एकादशी
२७ रविवार अनन्त चतुर्दशी , गणेश विसर्जन
२८ सोमवार भाद्रपद पूर्णिमा , चन्द्र ग्रहण , प्रतिपदा श्राद्ध
अक्टूबर २०१५
०८ बृहस्पतिवार इन्दिरा एकादशी
१२ सोमवार सर्वपित्रू अमावस्या
१३ मंगलवार नवरात्रि प्रारम्भ
१८ रविवार सरस्वती आवाहन , तुला संक्रान्ति
१९ सोमवार सरस्वती पूजा
२१ बुधवार दुर्गा अष्टमी , महा नवमी
२२ बृहस्पतिवार दशहरा , विजयदशमी
२३ शुक्रवार पापांकुशा एकादशी
२४ शनिवार पापांकुशा एकादशी
२६ सोमवार कोजागर पूजा , शरद पूर्णिमा
३० शुक्रवार करवा चौथ
नवम्बर २०१५
०३ मंगलवार अहोई अष्टमी
०७ शनिवार रमा एकादशी , गोवत्स द्वादशी
०९ सोमवार धन तेरस , काली चौदस
१० मंगलवार नरक चतुर्दशी
११ बुधवार दीवाली , लक्ष्मी पूजा
१२ बृहस्पतिवार गोवर्धन पूजा
१३ शुक्रवार भैया दूज
१७ मंगलवार छट पूजा , वृश्चिक संक्रान्ति
२१ शनिवार कंस वध
२२ रविवार देवुत्थान एकादशी
२३ सोमवार तुलसी विवाह
२५ बुधवार कार्तिक पूर्णिमा
दिसम्बर २०१५
०३ बृहस्पतिवार कालभैरव जयन्ती
०७ सोमवार उत्पन्ना एकादशी
१६ बुधवार विवाह पञ्चमी , धनु संक्रान्ति
२१ सोमवार मोक्षदा एकादशी , गीता जयन्ती
२४ बृहस्पतिवार दत्तात्रेयM जयन्ती
२५ शुक्रवार मार्गशीर्ष पूर्णिमा
आप के लिए उपयोगी रहेगा ,आगे भी प्रेषित कर दें।
Friday, January 30, 2015
मोटापा घटाने केलिए कुछ आयुर्वेदिक नुस्खेँ
मोटापा घटाने केलिए कुछ आयुर्वेदिक नुस्खेँ
मोटापे को लेकरकई लोग परेशानरहतें हैं और इससेछुटकारा पाना चाहतेंहैं ! कुछ उपाय ढूंढकर उनको प्रयोग में लातें हैं लेकिन कई बार ऐसा देखा गया हैकि हर उपाय हरआदमी के लिएफायदेमंदनहीं हो पाता हैजिसके कारणउनको निराश होनेकि आवश्यकतानहीं है औरउनको दुसरा उपायअपनाना चाहिए !आज में आपके सामनें मोटापे को दूर भगाने के लिए कुछ सामान्यआयुर्वेदिक नुस्खेँ लेकर आया हूँ! जिनका प्रयोग करके फायदा उठाया जा सकता है !
1. मूली के रस मेंथोडा नमक और निम्बूका रस मिलाकरनियमित रूप से पीने से मोटापा कमहो जाता है और शरीरसुडौल हो जाता है !
2. गेहूं, चावल, बाजराऔर साबुत मूंगको समान मात्रा मेंलेकर सेककरइसका दलियाबना लें !इस दलिये में अजवायन 20 ग्राम तथा सफ़ेदतिल 50 ग्रामभी मिला दें ! 50 ग्रामदलिये को 400मि.ली.पानी मेंपकाएं !स्वादानुसार सब्जियां और हल्का नमक मिला लें !नियमित रूप से एकमहीनें तक इस दलिये के सेवन से मोटापा और मधुमेह में आश्चर्यजनकलाभ होता है !
3. अश्वगंधा के एकपत्ते को हाथ सेमसलकर गोली बनाकर प्रतिदिनसुबह,दोपहर,शामको भोजन से एकघंटा पहलेया खाली पेट जल केसाथ निगल लें ! एकसप्ताह के नियमितसेवन के साथफल, सब्जियों, दूध, छाछ और जूस पर रहते हुए कईकिलो वजन कमकिया जा सकता है !
4. आहार में गेहूं केआटे और मैदा से बनेसभी व्यंजनों का सेवन एक माह तक बिलकुल बंद रखें ! इसमें रोटी भीशामिल है !अपना पेट पहले के4-6 दिन तक केवलदाल, सब्जियां औरमौसमी फल खाकरही भरें ! दालों में आपसिर्फ छिलकेवाली मूंग कि दाल, अरहर या मसूर कि दाल ही ले सकतें हैं चनें या उडदकि दाल नहीं !सब्जियों में जो इच्छा करें वही ले सकते हैं !गाजर, मूली, ककड़ी,पालक, पतागोभी, पके टमाटर औरहरी मिर्च लेकरसलाद बना लें ! सलाद पर मनचाही मात्रा में कालीमिर्च, सैंधा नमक, जीरा बुरककर औरनिम्बू निचोड़ करखाएं ! बस गेहूंकि बनी रोटी छोडकरदाल, सब्जी, सलाद और एक गिलास छाछका भोजन करते हुए घूंट घूंट करके पीते हुए पेट भरना चाहिए ! इसमें मात्रा ज्यादा भी हो जाए तो चिंता कि कोई बात नहीं ! इस प्रकार 6-7 दिन तक खाते रहें !इसके बाद गेहूंकि बनी रोटी किजगह चना और जौ के बने आटे कि रोटी खाना शुरू करें !
5 किलो देशी चना और एक किलो जौ को मिलकर साफ़ करके पिसवा लें !6-7 दिन तक इस आटे से बनी रोटी आधी मात्रा में औरआधी मात्रा मेंदाल,सब्जी,सलाद और छाछ लेना शुरू करें ! एकमहीने बाद गेहूंकि रोटी खाना शुरूकर सकते हैं लेकिनशुरुआत एक रोटी सेकरते हुए धीरे धीरेबढाते जाएँ ! भादों केमहीने में छाछका प्रयोगनहीं किया जाता हैइसलिए इस महीनें मेंछाछ का प्रयोगनां करें !!
5. एरण्ड की जड़का काढ़ा बनाकरउसको छानकर एक एक चम्मच की मात्रा में शहद के साथ दिन में तीन बार नियमितसेवन करने सेमोटापा दूरहोता है !!
6. चित्रक कि जड़का चूर्ण एक ग्रामकी मात्रा में शहद केसाथ सुबह शामनियमित रूप से सेवन करने और खानपान का परहेज करनें से भी मोटापा दूर किया जा सकता है !!
Wednesday, January 28, 2015
The magic of WATER and success!!
You're in the shower, and you receive a brilliant idea! Why is that?
1. Water promotes meditation, because it's symbolic of the emotions and unconscious mind. So water's meditative qualities open us up to hearing and listening to guidance.
2. Water relaxes us with its negative ions, particularly from running water like showers, waterfalls, and waves. Negative ions bring about feelings of bliss.
3. Water has healing properties. There's a reason why healing wells like Lourdes, France, have documented miracle healings. Water has long been used in healing ceremonies and health treatments.
4. Water is magnetically attractive, and will hold the energetic properties of prayers and positive intentions.
5. Water is restorative and cleansing. Not only does water wash away physical dirt, but it also cleanses you of any negativity that you've absorbed.
If you're feeling stuck and in need of guidance, go take a shower or soak in a bathtub with the faucet running. Moving water has more negative ions and electric charge than stagnant water. If you have access to a beach, waterfall, or moving river, these are also powerful places to receive inspiration and answers.
Then, hold your question in mind, and send the question heavenward. Releasing the question is important, because that frees your mind to be able to hear the answer you're seeking.
Answers come to you as thoughts, feelings, visions, or words. So notice any impressions that come into your mind or body. If you don't understand what they mean, ask the question, "What does this mean? Please explain further," and then notice insights you receive as clarification.
Some of the insights you receive may not make sense at the time, but they will later. So, write notes of the ideas which come to you, because they contain answers to your questions. You may also receive guidance which intimidates you, because you don't feel qualified or ready to pursue a new project or a different direction. Again, notice the guidance and trust that you'll soon understand.
Please share your experiences of receiving ideas near water. What works better for you: the shower, bathtub, river, ocean, or ??
Louise hay
Sunday, January 25, 2015
Retrograde Mercury - affects communication and travel and technology
ww.AstroRrachita.in
Mercury is retrograde from: January 21 – February 11,
What does Mercury Retrograde mean?
Mercury is retrograde when it’s traveling backwards. That’s an optical illusion, of course, and comes from a change in that planet’s orbital speed in comparison to the Earth’s. (Think of it as the planetary equivalent of speeding up, passing a car and seeing it fall far behind after you in the rear view mirror.)
When Mercury is moving in reverse, the areas of life it governs do not play by the usual rules. Pay extra attention to anything related to communication and travel-including phones, computers and electronic devices, the mail (remember that?), cars, public transportation, and commutes.
EFFECTS :
1.Messages go astray;
2. misunderstandings and confusion abound;
3. technology malfunctions; traffic snarls; travel gets delayed.
CAUTION : Postpone launching major projects, signing major contracts and buying big-ticket items. Double-check fine print, backup your data, and allow lots of extra time when you’re on the road.
The good news? This is an excellent time to :
1.investigate and research,
2. finish old business,
3.clean up paperwork,
4. get in touch with people you haven’t talked to in a while. 5.Pay attention to who surfaces from the past, in person or in thoughts. Their reappearance could help tie up loose ends or resolve lingering business.
Organize and prepare so you’ll be ready to move ahead when Mercury does!
EATING WITH HANDS A "SCIENTIFIC" PRACTICE"
WWW.ASTRORRACHITA.IN
EATING WITH HANDS A "SCIENTIFIC" PRACTICE.
As per the Indian wellness system of AYURVEDA its an excellent practice to mix food while cooking with your hands, example marinating and making batter etc and also to eat eith one's hands just like its done in large parts of India.
Benefits: OUR HAMD IS A BLENDING OF THE 5 TATTVAS(ELEMENTS) OR PRIMAL ESSENCES OF THE UNIVERSE.
THUMB: FIRE ELEMENT
INDEX FINGER: AIR ELEMENT
MIDDLE FINGER: ETHER OR AKASHA ELEMENT
RING FINGER: EARTH ELEMENT
LITTLE FINGER: JALA OR WATER ELEMENT
WHILE USING HAND TO EAT THE FOOD, it IS IMBUED WITH THE UNIQUE QUALITIES OF EACH ELEMENT IN NATURAL PROPORTION AND THEN DIGESTED IN OPTIMAL WAY SINCE THE HUMAN BODY IS ALSO MADE UP OF THE 5 ELEMENTS.
EATING WITH HANDS ALSO SENDS FOOD RELATED SIGNALS TO BRAIN SO THAT THE BRAIN READIES OUR DIGESTIVE SYSTEM FOR THE WORK AHEAD AND THE ENTIRE INTAKE, DIGESTION AND EXCRETION SYSTEM IS STREAMLINED LEADING TO A VIBRANT AND HEALTHY BODY.
OM NAMO SHIVAY
Monday, January 19, 2015
Dreams carry Divine message for your Success
Angel readings and guidance: www.AstroRrachita.in
When we’re sleeping, we’re wide-open to receiving Divine messages which we may have ignored while awake. Our angels, and even our departed loved ones, often visit us during our dreamtime. You may also awaken with the sense that you traveled somewhere during your sleep. .
Here are some ways to receive visitations and Divine messages in your dreams:
1. Go to bed sober, so that your mind is operating at its highest frequency. Drugs and alcohol inhibit Rapid Eye Movement (REM) sleep, so you don’t dream as much or as deeply. And you’ll remember your dreams more easily with a clear, chemical-free mind.
2. As you are falling asleep, pose a question to your guardian angels. Perhaps it’s about a decision you’re trying to make, help with a relationship, or answers to a question. Trust that they’ll answer your question while you’re sleeping.
3. Keep a journal or hand-held tape recorder near your bedside. Immediately record anything that you remember from your dreams. Dream record-keeping has a cumulative effect in increasing the number of profound and memorable dreams.
4. If you don’t understand any dream’s meaning, ask your angels to guide you toward its meaning. Then be open to synchronicities throughout the day, including books that are recommended to you, conversations you overhear, and other messages which will continue your Divine dreams into your waking life.
D. virtue excerpt
Monday, January 12, 2015
शिवलिंग पर क्यों चढ़ाते हैं भस्म
शिवपुराण के अनुसार जानिए शिवलिंग पर क्यों चढ़ाते हैं भस्म
शिवजी के पूजन में भस्म अर्पित करने का विशेष महत्व है। बारह ज्योर्तिलिंग में से एक उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन भस्म आरती विशेष रूप से की जाती है। यह प्राचीन परंपरा है। यहां जानिए शिवपुराण के अनुसार शिवलिंग पर भस्म क्यों अर्पित की जाती है...
शिवजी का रूप है निराला
भगवान शिव अद्भुत व अविनाशी हैं। भगवान शिव जितने सरल हैं, उतने ही रहस्यमयी भी हैं। भोलेनाथ का रहन-सहन, आवास, गण आदि सभी देवताओं से एकदम अलग हैं। शास्त्रों में एक ओर जहां सभी देवी-देवताओं को सुंदर वस्त्र और आभूषणों से सुसज्जित बताया गया है, वहीं दूसरी ओर भगवान शिव का रूप निराला ही बताया गया है। शिवजी सदैव मृगचर्म (हिरण की खाल) धारण किए रहते हैं और शरीर पर भस्म (राख) लगाए रहते हैं।
भस्म का रहस्य
शिवजी का प्रमुख वस्त्र भस्म यानी राख है, क्योंकि उनका पूरा शरीर भस्म से ढंका रहता है। शिवपुराण के अनुसार भस्म सृष्टि का सार है, एक दिन संपूर्ण सृष्टि इसी राख के रूप में परिवर्तित हो जानी है। ऐसा माना जाता है कि चारों युग (त्रेता युग, सत युग, द्वापर युग और कलियुग) के बाद इस सृष्टि का विनाश हो जाता है और पुन: सृष्टि की रचना ब्रह्माजी द्वारा की जाती है। यह क्रिया अनवरत चलती रहती है। इस सृष्टि के सार भस्म यानी राख को शिवजी सदैव धारण किए रहते हैं। इसका यही अर्थ है कि एक दिन यह संपूर्ण सृष्टि शिवजी में विलीन हो जानी है।
Friday, January 09, 2015
Shree Suktam-Divine Song to woo the Lakshmi Goddess
Shree Suktam-divine song to woo the Lakshmi Goddess with lyrics and English subtitles:
http://youtu.be/ih9S-jQgCQU
Sunday, January 04, 2015
Astrorrachita(Rachita) - WWW.ASTRORRACHITA.IN: ASTROLOGICAL TIMING OF SURGERY affects its Succes...
ASTROLOGICAL TIMING OF SURGERY affects its Success- GENERAL RULES TO PONDER
Are you 40+ ? Change your life!
बाज लगभग ७० वर्ष जीता है,
परन्तु अपने
जीवन के ४०वें वर्ष में आते आते उसे एक महत्वपूर्ण निर्णय लेना पड़ता है।
उस अवस्था में उसके शरीर के तीन प्रमुख अंग निष्प्रभावी होने लगते हैं-
पंजे लम्बे और लचीले हो जाते है व
शिकार पर पकड़ बनाने में अक्षम होने लगते हैं।
चोंच आगे की ओर मुड़ जाती है और भोजन निकालने में व्यवधान उत्पन्न करने लगती है।
पंख भारी हो जाते हैं,
और सीने से चिपकने के कारण पूरे खुल नहीं पाते हैं, उड़ानें सीमित कर देते
हैं।
भोजन ढूँढ़ना, भोजन पकड़ना और भोजन खाना, तीनों प्रक्रियायें अपनी धार खोने लगती हैं।
उसके पास तीन ही विकल्प बचते हैं, या तो देह त्याग दे,
या अपनी प्रवृत्ति छोड़ गिद्ध की तरह
त्यक्त भोजन पर निर्वाह करे...
या फिर स्वयं को पुनर्स्थापित करे,
आकाश के निर्द्वन्द्व एकाधिपति के रूप में।
जहाँ पहले दो विकल्प सरल और त्वरित हैं,
वहीं तीसरा अत्यन्त
पीड़ादायी और लम्बा।
बाज पीड़ा चुनता है और स्वयं को पुनर्स्थापित करता है।
वह किसी ऊँचे पहाड़ पर जाता है,
एकान्त में अपना घोंसला बनाता है, और तब प्रारम्भ करता है पूरी प्रक्रिया।
सबसे पहले वह अपनी चोंच चट्टान पर मार मार कर तोड़ देता है..
अपनी चोंच तोड़ने से अधिक पीड़ादायक कुछ भी नहीं पक्षीराज के
लिये। तब वह प्रतीक्षा करता है चोंच के पुनः उग आने की।
उसके बाद वह अपने पंजे भी उसी प्रकार तोड़ देता है और प्रतीक्षा करता है पंजों के पुनः उग आने
की।
नये चोंच और पंजे आने के बाद वह अपने भारी पंखों को एक एक कर नोंच कर निकालता है और प्रतीक्षा करता पंखों के पुनः उग आने की।
१५० दिन की पीड़ा और प्रतीक्षा...
और तब उसे
मिलती है वही भव्य और
ऊँची उड़ान, पहले
जैसी नयी।
इस पुनर्स्थापना के बाद वह ३० साल और जीता है,
ऊर्जा, सम्मान और गरिमा के साथ।
प्रकृति हमें सिखाने बैठी है-
पंजे पकड़ के प्रतीक हैं, चोंच सक्रियता की, और पंख कल्पना को स्थापित करते हैं।
इच्छा परिस्थितियों पर
नियन्त्रण बनाये रखने की,
सक्रियता स्वयं के अस्तित्व की गरिमा बनाये रखने की,
कल्पना जीवन में कुछ नयापन बनाये रखने
की।
इच्छा, सक्रियता और कल्पना,
तीनों के तीनों निर्बल पड़ने लगते हैं,
हममें भी, चालीस तक आते आते।
हमारा व्यक्तित्व ही ढीला पड़ने
लगता है, अर्धजीवन में
ही जीवन समाप्तप्राय सा लगने लगता है,
उत्साह, आकांक्षा, ऊर्जा अधोगामी हो जाते हैं।
हमारे पास भी कई विकल्प होते हैं-
कुछ सरल और त्वरित,
कुछ पीड़ादायी।
हमें भी अपने जीवन के विवशता भरे
अतिलचीलेपन को त्याग कर नियन्त्रण दिखाना होगा-बाज के पंजों की तरह।
हमें भी आलस्य उत्पन्न करने वाली वक्र
मानसिकता को त्याग कर ऊर्जस्वित
सक्रियता दिखानी होगी-बाज की चोंच की तरह।
हमें भी भूतकाल में जकड़े अस्तित्व के
भारीपन को त्याग कर
कल्पना की उन्मुक्त उड़ाने
भरनी होंगी-बाज के
पंखों की तरह।
१५० दिन न सही, तो एक माह
ही बिताया जाये, स्वयं को पुनर्स्थापित करने में। जो शरीर और मन से चिपका हुआ है, उसे तोड़ने और नोंचने में पीड़ा तो होगी ही,
बाज तब उड़ानें भरने को तैयार होंगे, इस बार उड़ानें और ऊँची होंगी, अनुभवी होंगी, अनन्तगामी होंगी।
तो 2015 स्वयं के पुनर्स्थापन के लिए ....


